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किसानों के खेतों से गायब नीलक्रांति के तालाब

किसानों के खेतों से गायब नीलक्रांति के तालाब 

मछली विभाग की नीलक्रांति योजना में करोड़ों का फर्जीवाड़ा 

सिवनी। गोंडवाना समय। शासन द्वारा तकरीबन सात-आठ साल पहले शुरू की गई नीलक्रांति योजना के तहत सिवनी जिले में आधा सैकड़ा से ज्यादा बनाए गए तालाब किसानों के खेतों से गायब हो गए हैं। हर साल नीलक्रांति के तालाब बनाए जाने के बावजूद खेतों में नहीं है या यू कहें कि अधिकांश किसानों ने मछली विभाग के भ्रष्ट अफसरों के साथ मिलकर नीलक्रांति योजना को निगल गए हैं। हकीकत धरातल में दिखाई दे रही है लेकिन सांठगांठ और बंदरबांट करने वाले जिले के मत्स्य विभाग के प्रभारी उपसंचालक रवि गजभिये ने ऐसा कैसा चश्मा पहने हुए हैं कि सिर्फ कार्यालय में बैठकर भी किसान के खेतों में तालाब नजर आ रहे हैं।

 बंधक जमीन पर भी बन गया तालाब

 मत्स्य विभाग के कार्यालय से आरटीआई के तहत निकाले गए दस्तावेज और खसरा नंबर खंगाले जाने के बाद मत्स्य विभाग ने किसान के साथ मिलकर एक एक नया कारनामा कर दिया है।कुरई विकसखंड के पीपरवानी के दुर्गाप्रसाद झनकलाल और नरेला के ढब्बु सिंह पिता कोदू सिंह की बैंक पर बंधक जमीन पर भी नीलक्रांति का तालाब दर्शाया गया है। जबकि बैंक में बंधक रहने पर कैसे खसरा-नक्शा बन गया और कैसे नीलक्रांति का तालाब बन गए यह सवाल खड़ा हो रहा है। जानकारी के मुताबिक दुर्गाप्रसाद पिता झनकलाल की जमीन खसरा नंबर व रकबा 98/4/2.67 में और नरेला के किसान ढब्बु सिंह कोदू सिंह ने खसरा रकबा 513/3/1.00 में नीलक्रांति का तालाब बनाना बताया जा रहा है। जबकि वर्तमान में वहां कोई तालाब नजर नहीं आ रहा है। वे हर साल उक्त खसरा नंबर में गेंहू और धान की फसल लगा रहे हैं। वर्तमान में उक्त खसरा नंबर पर धान की फसल लगाई हुई है।

जहां बता रहे तालाब वहां हो रही खेती- 

पीपरवानी के दुर्गाप्रसाद झनक,सकीना बी पति कदीर खान झीलपिपरिया,दानसिंह सुखलाल खिरखिरी,टिकेश मानसिंह थांवरझोड़ी,बतिया बाई फूलसिंह थांवरझोड़ी,राधा बाई पति कान्हाजी बावली,उर्मिला पति गजेन्द्र, बसंत डोमा कोहका, ढब्बू सिंह कोदू सिंह नरेला,प्रणय देवेन्द्र छीतापार, रमनलाल जागेलाल मोहम्मदपुर,समीदा लतीफ मोहम्मदपुर सुखवती हरिचन्द्र झीलपिपरिया, मेहताब सुकरत चुरनाटोला राधेश्याम मंगल निवासी धनौली सहित अन्य किसानों के खेतों में नीलक्रांति के नाम तालाब दर्शाकर लाखों रुपए का अनुदान निकालकर खेल कर लिया गया है लेकिन हकीकत में अधिकांश गांव में नीलक्रांति के तालाब गायब है। झीलपिपरिया और गेहरूटोला गांव में तीन किसानों के खेतों में जायजा लिया तो सकीना बी और गोपी चन्द्रवंशी के खेतों में जहां मत्स्य विभाग तालाब दर्शा रहा है वहां पर खेती की जा रही है। खेत को देखकर ऐसा लगता है कि कभी उस जगह में तालाब बनाया ही नहीं गया है। बिना तालाब बनाए ही अनुदान निकालकर बंदबांट कर लिया गया है। सकीना बी और उनको परिवार राजीव गांधी मछुआ समिति से जुड़ा हुआ भी है। वहीं गोपी चन्द्रवंशी का तालाब भी खेत में ढूढ़ने से नहीं मिल रहा है। सुखवती हरिचंद्र के यहां भी तालाब दर्शाकर 60 हजार रूपए का अनुदान लिया गया है। जहां सुखवती के पति और पुत्र पहली पहाड़ी के पीछे तालाब बनाए जाने का दावा कर रहे हैं लेकिन वहां जब गोंडवाना की टीम पहुंची तो एक छोटी सी डबरी थी जो मुश्किल से 30 से 40 हजार रुपए की लागत से बनाई गई होगी जिसे दर्शाया गया है लेकिन झिलपिपरिया गांव के पूर्व सरपंच एवं वर्तमान में जनपद पंचायत सिवनी के जनपद उपाध्यक्ष बताते हैं कि वह डबरा-डबरी पंचायत द्वारा बनाया गया था। ऐसे में नीलक्रांति योजना के फर्जीवाडेÞ से इंकार नहीं किया जा सकता है।

 मछली पालन को बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने शुरू की थी योजना-

 मछली पालन को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने मत्स्य पालक विकास अभिकरण योजना को बंद कर पूरे देश में नील क्रांति योजना शुरू की है। इस योजना के तहत एक हेक्टेयर का तालाब बनाने पर मछली पालकों को पचास प्रतिशत वित्तीय सहायता दी जाती है। केन्द्र सरकार ने मछली पालन को बढ़ावा देकर किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ाने और बेरोजगार युवाओं को रोजगार देकर आत्म निर्भर बनाने की मंशा लिए नीलक्रांती योजना शुरू की है। इसके पूर्व मत्स्य पालक विकास अभिकरण योजना चल रही थी।

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