Monday, September 20, 2021

गोंडवाना समय ई पेपर 20 सितंबर 2021

Sunday, September 19, 2021

गोंडवाना समय ई पेपर 19 सितंबर 2021

Saturday, September 18, 2021

भील आदिवासियों का दण्ड के नाम पर आर्थिक रूप से शोषण कर रहा राजस्व विभाग

भील आदिवासियों का दण्ड के नाम पर आर्थिक रूप से शोषण कर रहा राजस्व विभाग 

रतलाम कलेक्ट्रेट में राजस्व विभाग की लूटपाट के विरोध में सौंपा ज्ञापन 


रतलाम। गोंडवाना समय।

जयस, जय आदिवासी युवा संगठन भील एकता मिशन के द्वारा रतलाम कलेक्टर आॅफिस पर पहुंचकर रावटी पटवारी द्वारा अवैध रूप से भील आदीवासियों से रूपए वसूलने, पटेलों को धमकाने आदि शिकायतों पर पीड़ितों के साथ जाकर न्याय दिलाने के लिये कमलेश्वर डोडियार भील संस्थापक अध्यक्ष जयस, जय आदिवासी युवा संगठन भील एकता मिशन के द्वारा कलेक्टर रतलाम के नाम ज्ञापन सौंपा गया। जिसमें रावटी तहसील के तहसीलदार, पटवारी व राजस्व विभाग के अन्य कर्मचारी के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने की मांग की गई है।  

ज्यादा वसूल रहे थे आर्थिक दण्ड रसीद दे रहे थे कम रूपये की 


जयस, जय आदिवासी युवा संगठन भील एकता मिशन के द्वारा रतलाम कलेक्टर के नाम सौंपे गये ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि अतिक्रमणकर्ता के दण्ड की रसीद से अधिक की राशि प्राप्त करने एवं सामान्य वर्ग को आदिवासी बताकर अतिक्रमण कराते हुये अतिक्रमणित भूमि पर खनिज व्यापार हेतु क्रेशर प्लांट स्थापित कराते हुये अनाधिकृत रूप से लाभ दिलाये जाने के गंभीर मामलों पर न्यायोचित कार्यवाही की मांग की गई है। ज्ञापन में आगे उल्लेख किया गया है कि 17 सितंबर 2021 दिन शुक्रवार को शासकीय प्राथमिक विद्यालय आमलीपाड़ा तहसील रावटी जिला रतलाम में अतिक्रमणकारियों को सूचना पत्र जारी करते हुये आर्थिक दण्ड के रूप में राशि एकत्र करने के लिये आदेशित किया गया था जिस पर पीड़ित नरू पिता रूपा निवासी आमलीपाड़ा से 5000 हजार रूपये और दिनांक 15 सितंबर 2021 को 2000 हजार रूपये की रसीद बनाई गई थी। 

पहले लिया 3000 हजार आपत्ति लिया तो वापस कर दिये 2500 रूपये 

वहीं आगे ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि उसके तुरंत बाद माण जी पिता रामा निवासी लाखिया से 3000 हजार रूपये प्राप्त किया गया ओर रसदी 1000 रूपये की बनाई गई। इस पर पीड़ित पक्ष ने आपत्ति भी कम रूपये की रसीद दिये जाने की दर्शाई थी जिस पर 500 रूपये की रसीद काटकर तहसीलदार द्वारा उक्त रसीद काटकर 2500 रूपये भाण जी को लौटा दिया गया था। इस तरह की अनेकों की अनियमिततायें की जा रही है। जिसकी जानकारी राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं है लेकिन सीधे साधे भील आदिवासी समुदाय के लोगों को लूटकर आर्थिक रूप से शोषण किया जा रहा है। जबकि वास्तविक रूप से आर्थिक दण्ड वसूलकर शासन मद में जमा किया जाना चाहिये। 

न्यायोचित कार्यवाही नहीं की गई तो जनहित में करेंगे जनआंदोलन 

जयस, जय आदिवासी युवा संगठन भील एकता मिशन के कमलेश डोडियार ने बताया कि ग्रामीणजन व किसानों को इस तरह से राजस्व विभाग के कुछ अधिकारी कर्मचारी द्वारा लूटपाट किया जा रहा है। जबकि किसान व ग्रामीणजन किसानी, मेहतन मजूदरी करके अपने घर परिवार का पालन पोषण करते हुये अपना पेट भी पालते है। इस तरह से आर्थिक शोषण किया जाकर जहां एक ओर सीधे सीधे भील आदिवासी समुदाय को लूटा रहा है वहीं दूसरी ओर शासन के मद में भी वास्तविक राशि जमा न करते हुये शासन को भी राजस्व की नुकसान पहुंचाया जा रहा है। ऐसे कृत्य करने वाले अधिकारी व कर्मचारी पर कलेक्टर व वरिष्ठ अधिकारियों को संज्ञान लेकर त्वरित रूप से कार्यवाही करना चाहिये। वहीं कमलेश डोडियार ने कहा कि जयस, जय आदिवासी युवा संगठन भील एकता मिशन के द्वारा सौंपे गये ज्ञापन पर न्यायोचित कार्यवाही नहीं की गई तो आगामी समय में हमारे द्वारा जन आंदोलन जनहित में किया जायेगा। 


गोंडवाना समय ई पेपर 18 सितंबर 2021

Friday, September 17, 2021

राजा शंकर शाह जी व कुंवर रघुनाथ शाह जी के नाम पर केंद्र सरकार पुलिस व सेना के जवानों को पुरस्कार देने की कब करेगी घोषणा ?

राजा शंकर शाह जी व कुंवर रघुनाथ शाह जी के नाम पर केंद्र सरकार पुलिस व सेना के जवानों को पुरस्कार देने की कब करेगी घोषणा ?

राजा शंकर शाह जी व कुंवर रघुनाथ शाह जी की शहादत को वास्तविक सम्मान देने के लिये गृह मंत्री अमित शाह से आदिवासी वर्ग ने जताई अपेक्षा 

अंग्रेजों से स्वतंत्रता दिलाने तोफ के मुंह में उड़कर ऐतिहासिक शहादत का प्रमाण है राजा शंकर शाह व कुंवर रघुनाथ शाह


संपादक विवेक डेहरिया
सिवनी/जबलपुर। गोंडवाना समय।

अंग्रेजों से आजादी दिलाने के लिये देश में सर्वप्रथम आदिवासी समाज ने ही विद्रोह का बिगुल फूंका था। यह ऐतिहासिक व यथार्थ सत्य है भले ही इतिहासकारों ने आदिवासी समाज के द्वारा आजादी के आंदोलन में दिये बलिदान, शहादत, योगदान को कलम के माध्यम से इतिहास के पन्नों में जगह नहीं दिया हो लेकिन सच आज भी भारत के बुद्धिजीवि जानते है कि आजादी के आंदोलन में सबसे ज्यादा योगदान आदिवासी समाज का ही रहा है। 

राजा शंकर शाह व कुंवर रघुनाथ शाह को आम जनता के सामने अंग्रेजों ने तोफ में बांधकर उड़ा दिया था 


हम बात करते है कि अंग्रेजों से देश को आजाद कराने के लिये विद्रोह करने के लिये शहादत देने वालों की तो सर्वप्रथम व एकमात्र ऐतिहासिक प्रमाण के रूप में हमें गोंडवाना साम्राज्य के अंतिम चिराग राजा शंकर शाह व कुंवर रघुनाथा शाह जी का बलिदान व शहादत ही प्रमाणित रूप में दिखाई देती है। हालांकि लाखों देशप्रेमियों ने अंग्रेजों से आजादी दिलाने के लिये अपने प्राणों की आहूति, बलिदान, शहादत दिया है।
                

वहीं राजा शंकर शाह व कुंवर रघुनाथ शाह जी की शहादत अंग्रेजों ने जिस तरह से लिया था वह सुनकर ही इंसान की रूंह कंपा देता है। अंग्रेजों ने मध्य प्रदेश के जबलपुर में आम जनता के बीच में पिता व पुत्र यानि की राजा शंकर शाह जी व कुंवर रघुनाथ शाह जी को तोफ के मुंह में बांधकर उड़ा दिया था। अब देश वासी ही विचार मंथन करें कि पिता पुत्र देशभक्तों को अंग्रेजों ने तोफ के मुंह में बांधकर जिस समय उड़ाया होगा वहां का मंजर व स्थिति कैसी रही होगी।
            जबकि आम जनता को बुलाकर उनके सामने राजा शंकर शाह व कुंवर रघुनाथ शाह की शहादत अंग्रेजों ने लिया था ताकि आम जनता अंग्रेजों की  िखलाफत न कर पाये लेकिन जिस तरह से हंसते-हंसते पिता पुत्र राजा शंकर शाह व कुंवर रघुनाथ शाह जी ने तोफ के मुंह में बंधने के बाद भी देश को आजाद कराने के लिये अपनी कुर्बानी देते हुये प्राण न्यौछाबार कर दिये थे।
        तोफ के मुंह में अंगे्रजों के द्वारा उड़ाने के बाद उनके क्षत-विक्षत शव को राजा शंकर शाह जी की पत्नि रानी फुलकुंवर ने अपने हाथों से पति व पुत्र के शव को समेट कर एकत्र किया था सोचिये किस तरह से रानी फुलकुंवर ने यह काम किया होगा। 

गृह मंत्री अमित शाह से आदिवासी वर्ग ने पुलिस व सेना के जवानों के लिये पुरस्कार दिये जाने की घोषणा करने की उम्मीद जताई 


अब प्रश्न यह उठता है कि अंग्रेजों से आजादी दिलाने के लिये ऐतिहासिक शहादत देने वाले पिता पुत्र गोंडवाना साम्राज्य के राजा शंकर शाह व कुंवर रघुनाथ शाह जी के बलिदान को क्या आजादी के बाद केंद्र सरकार व राज्य सरकार ने वो सम्मान आज तक क्यों नहीं दिया जिसके वे वास्तविक हकदार थे और आज भी है।
            केंद्र सरकार के रक्षा मंत्रालय व गृह मंत्रालय को पुलिस जवान व सेना के जवानों को उनकी बहादुरी के लिये एवं सर्वोत्तम कार्य के लिये दिये जाने वाले पुरस्कारों के रूप में राजा शंकर शाह जी व कुंंवर रघुनाथ शाह जी के नाम पर पुरस्कार व सम्मान देने की योजना बनाकर लागू करना चाहिये।
        आदिवासी समाज के सगाजनों की भी यही अपेक्षा है कि केंद्र सरकार व राज्य सरकार को पुलिस व सेना के जवानों को पुरस्कार देने के लिये राजा शंकर शाह जी व कुंवर रघुनाथ शाह जी के नाम पर दिये जाने के लिये योजना बनाकर संचालित करना चाहिये जिससे राजा शंकर शाह व कुंवर रघुनाथ शाह की शहादत को वास्तविक सम्मान मिल सकता है।
        वहीं केंद्र सरकार के गृह मंत्री श्री अमित शाह स्वयं 18 सितंबर 2021 को जबलपुर पहुंचकर अमर शहीद राजा शंकर शाह व कुंवर रघुनाथ जी की शहादत स्थल पर स्थित प्रतिमा पर माल्यापर्ण कर बलिदान दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान गृह मंंत्री अमित शाह से आदिवासी वर्ग ने अपेक्षा जताई है कि राजा शंकर शाह व कुंवर रघुनाथ शाह जी की शहादत को वास्तविक सम्मान देने के लिये पुलिस व सेना के जवानों के लिये पुरस्कार देने की घोषणा करनी चाहिये। 

गोंडवाना समय ई पेपर 17 सितंबर 2021

Thursday, September 16, 2021

गोंडवाना समय ई पेपर 16 सितंबर 2021

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