Sunday, May 31, 2020

गोंडवाना समय ई पेपर 31 मई 2020

Saturday, May 30, 2020

ट्विटर हैंडल @LabourDG का उद्घाटन

ट्विटर हैंडल @LabourDG का उद्घाटन 

हैंडल श्रम कल्‍याण संबंधी नवीनतम आंकड़े प्रदान करेगा


नई दिल्ली। गोंडवाना समय। 
श्रम कल्याण से संबंधित अद्यतन नवीनतम आंकड़ों की आपूर्ति करने के प्रयास में
श्रम और रोजगार राज्य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभारश्री संतोष कुमार गंगवार ने कल श्रम ब्यूरो के लिए ट्विटर हैंडल @LabourDGका उद्घाटन किया। इस अवसर परश्रम और रोजगार सचिव श्री हीरालाल सामरिया,एसएलईए औरश्रम ब्यूरो में महानिदेशक श्री डीपीएस नेगी भी उपस्थित थे। मंत्री ने ट्वीट किया कि यह हैंडल भारतीय श्रम बाजार के संकेतकों पर स्नैपशॉट का एक नियमित और अद्यतन स्रोत होगा।
श्रम ब्यूरोश्रम और रोजगार मंत्रालय का एक संलग्न कार्यालय श्रम कानूनों के विभिन्न पहलुओं जैसे मजदूरीकमाईउत्पादकताअनुपस्थितिश्रम-परित्यागऔद्योगिक संबंधोंकाम करने और रहन-सहन की स्थिति और विभिन्न कार्यों के मूल्यांकन के बारे में जानकारी एकत्र करता रहा है और उसका प्रसार किया है। श्रम ब्यूरो द्वारा प्रसारित सूचना देश में रोजगार नीतियों और प्रक्रियाओं के निर्माण और कार्यान्वयन के लिए सरकार को सलाह देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। श्रम ब्यूरो के पास सूचकांक संख्याओं के संकलन और रखरखाव का आदेशपत्र हैश्रम के क्षेत्र में आँकड़ों के संग्रह के लिए सर्वेक्षण करना और प्रशासनिक श्रम सांख्यिकी का संकलन और संकलन करना। श्रम ब्यूरो श्रम बल सर्वेक्षण और उद्यम सर्वेक्षण में लगा हुआ है जो मुख्य रूप से श्रम बल से संबंधित संकेतकों का अनुमान प्रदान करता है।
लेबर ब्यूरो की स्थापना 1946 में हुई थी। लेबर ब्यूरो की दो मुख्य शाखाएं चंडीगढ़ और शिमला में हैं। इसके पाँच क्षेत्रीय कार्यालय हैंजिनमें से एक-एक अहमदाबादकानपुरकोलकातागुवाहाटी और चेन्नई में हैं जिसका उप-क्षेत्रीय कार्यालय मुंबई में है। भारतीय आर्थिक सेवा (आईईएस) के महानिदेशक के नेतृत्‍व मेंएक अपर सचिव स्तर के अधिकारी भारतीय आर्थिक सेवा और भारतीय सांख्यिकीय सेवा के पेशेवर इस टीम के सदस्‍य हैं।

वेबिनार के माध्‍यम से 45,000 उच्‍च शिक्षण संस्‍थाओं के प्रमुखों से बातचीत की

वेबिनार के माध्‍यम से 45,000 उच्‍च शिक्षण संस्‍थाओं के प्रमुखों से बातचीत की

श्री निशंक ने सभी उच्‍च शिक्षण संस्‍थाओं से एनएएसी प्रत्‍यायन प्रक्रिया में भाग लेने का अनुरोध किया

सभी विश्‍वविद्यालय कोविड-19 की वजह से उपजे विशेष हालात के कारण विद्यार्थियों के समक्ष उत्‍पन्‍न विभिन्‍न समस्‍याओं के समधान के लिए आवश्‍यक रूप से विशेष प्रकोष्‍ठ का गठन करें 


नई दिल्ली। गोंडवाना समय। 
केंद्रीय मानव संसाधन विकास  मंत्री  श्री रमेश पोखरियाल निशंक ने नेशनल असेस्‍मेंट एंड एक्रीडेशन काउंसिल (एनएएसी), बेंगलुरु द्वारा आयोजित वेबिनार के माध्‍यम से देश भर की 45,000 से ज्‍यादा उच्‍च शिक्षण संस्‍थाओं के प्रमुखों से बातचीत की। श्री निशंक ने देश भर के उपकुलपतियों/कुलसचिवों/प्रोफेसरों/आईक्‍यूएसी प्रमुखों/ प्रधानाचार्यों/ संकाय सहित शिक्षाविदों के विशिष्‍ट समूह को संबोधित किया और उनके साथ बातचीत की।
महामारी के मौजूदा दौर में एनएएसी द्वारा की गई पहल की सराहना करते हुए श्री पोखरियाल ने देश की उच्‍च शिक्षण संस्‍थाओं का आह्वान किया कि वे मौजूदा हालात को प्रणाली की सीमाओं पर काबू पाने के अवसर की तरह से लें। उन्‍होंने शिक्षाविदों, विद्यार्थियों और अभिभावकों से ऑन-लाइन पद्धति अपनाने और ऐसे हालात तैयार करने का अनुरोध किया जिनसे विद्यार्थियों और उच्‍च शिक्षण संस्‍थाओं के अकादमिक सत्र में बाधा नहीं पहुंचे। उन्‍होंने कहा कि भारत में ऑनलाइन व्‍यवस्‍था को बेहतर बनाने और संवर्धित किए जाने की तत्‍काल आवश्‍यकता है और शिक्षकों को इसकी पहुंच को व्‍यापक बनाने में योगदान देना चाहिए ताकि ऑनलाइन शिक्षा ग्रामीण क्षेत्रों तक भी पहुंच सके
घंटे भर तक चली बातचीत और सम्‍बोधन में केंद्रीय मंत्री ने अकादमिक कैलेंडर, ऑनलाइन शिक्षा, परीक्षाओं, शुल्‍कों, विद्यार्थियों के मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य , विद्यार्थियों की समस्‍याओं, फेलोशिप्‍स, एनईईटी, प्रवेश परीक्षओं आदि से संबंधित विभिन्‍न समस्‍याओं और चिंताओं पर विचार किया। उन्‍होंने महामारी की अवधि के दौरान की गई स्‍वयं प्रभा, दीक्षारम्‍भ, परामर्श और  अनेक विशिष्‍ट पहलों के बारे में विस्‍तार से चर्चा की। उन्‍होंने समस्‍त उच्‍च शिक्षण संस्‍थाओं से एनएएसी प्रत्‍यायण प्रक्रिया में भाग लेने का भी अनुरोध किया। उन्‍होंने दोहराया कि भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी उच्‍च शिक्षण संस्‍थाओं के कल्‍याण को लेकर बहुत ज्‍यादा चिंतित हैं और उन्‍होंने विद्यार्थियों की अकादमिक गति‍विधियों को आगे बढ़ाने में हरसंभव मदद का आश्‍वासन दिया।
केंद्रीय मंत्री ने समस्‍त विश्‍वविद्यालयों से एक विशेष प्रकोष्‍ठ का गठन करने को कहा, जो कोविड-19 के कारण उपजे विशेष हालात के कारण उत्‍पन्‍न हो रही विद्यार्थियों की अकादमिक कैलेंडर और परीक्षा जैसी समस्‍याओं का समाधान करने में समर्थ हो। उन्‍होंने कहा कि विद्यार्थियों की विभिन्‍न समस्‍याओं का समाधान करने के लिए यूजीसी और एनसीईआरटी में एक कार्यबल का सृजन किया गया है। श्री निशंक ने भरोसा दिलाया कि मंत्रालय संकट की घड़ी में विद्यार्थियों को हर संभव सहायता उपलब्‍ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री इस बात पर प्रकाश डाला कि किस प्रकार नए सत्र की प्रक्रिया शुरु होगी, साथ ही उन्‍होंने विस्‍तृत रूप से बताया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकतादी जाएगी।
श्री निशंक ने शैक्षणिक बिरादरी को कोराना वारियर्स करार दिया क्‍योंकि इस अभूतपूर्व स्थिति में वे विद्यार्थियों को गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए चौबीसों घंटे कार्य कर रहे हैं।
इस अवसर पर यूजीसी के अध्‍यक्ष प्रोफेसर डी पी सिंह, अध्‍यक्ष,ईसी, एनएएसी  प्रोफेसर वीरेंद्र एस चौहानभी मौजूद थे। एनएएसी के निदेशक प्रोफेसर एस सी शर्मा ने इस आयोजन का संचालन एवं समन्‍वयन किया।

वित्त मंत्री ने ‘आधार’ पर आधारित ई-केवाईसी के जरिए ‘तत्काल पैन आवंटन’ की सुविधा का शुभारंभ किया

वित्त मंत्री ने ‘आधार’ पर आधारित ई-केवाईसी के जरिए ‘तत्काल पैन आवंटन’ की सुविधा का शुभारंभ किया


नई दिल्ली। गोंडवाना समय। 
केन्द्रीय बजट में की गई घोषणा के अनुरूप केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने नई दिल्‍ली में 
‘पैन के तत्काल आवंटन (लगभग वास्तविक समय के आधार पर) की सुविधा’ का शुभारंभ औपचारिक रूप से किया। यह सुविधा अब उन पैन आवेदकों के लिए उपलब्ध है जिनके पास वैध ‘आधार नंबर’ है और इसके अलावा ‘आधार’ के साथ पंजीकृत मोबाइल नंबर भी है। इसकी आवंटन प्रक्रिया कागज रहित है और आवेदकों को इलेक्ट्रॉनिक पैन (ई-पैन) नि:शुल्क जारी किया जाता है।
उल्‍लेखनीय है कि वित्त मंत्री श्रीमती सीतारमण ने केन्द्रीय बजट 2020 में ‘तत्काल पैन आवंटन’ की सुविधा शीघ्र ही शुरू करने की घोषणा की थी। बजट भाषण के पैरा 129 में वित्त मंत्री ने कहा था, ‘पिछले बजट में मैंने ‘पैन (स्‍थायी खाता संख्‍या)’ और ‘आधार’ की अंतर-परिवर्तनीयता की सुविधा की शुरुआत की थी जिसके लिए आवश्यक नियमों को पहले ही अधिसूचित कर दिया गया था। पैन आवंटन की प्रक्रिया को और आसान बनाने के लिए जल्द ही हम एक ऐसी प्रणाली शुरू करेंगे जिसके तहत विस्तृत आवेदन पत्र भरने की आवश्यकता के बिना ही ‘आधार’ का उपयोग करते हुए पैन को तत्काल ऑनलाइन आवंटित कर दिया जाएगा।’   
आधार’ पर आधारित ई-केवाईसी के माध्यम से तत्काल पैन आवंटन की सुविधा की औपचारिक शुरुआत भले ही आज की गई होलेकिन इसका बीटा संस्करण’ परीक्षण के आधार पर आयकर विभाग की ई-फाइलिंग वेबसाइट पर 12 फरवरी 2020 को ही शुरू कर दिया गया था। तब से लेकर 25 मई 2020 तक लगभग प्रति 10 मिनट में 6,77,680  तत्‍काल पैन आवंटित किए जा चुके हैं। 

यह भी गौर करने वाली बात है कि 25 मई 2020 तक  करदाताओं को कुल 50.52 करोड़ पैन आवंटित किए जा चुके हैं जिनमें से लगभग 49.39 करोड़ पैन विभिन्‍न व्यक्तियों को जारी किए गए हैं और 32.17 करोड़ से भी अधिक पैन को आधार के साथ जोड़ा गया है।
‘तत्काल पैन’ के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया बहुत सरल है। तत्काल पैन प्राप्त करने के लिए आवेदक को आयकर विभाग की ई-फाइलिंग वेबसाइट पर जाकर अपना वैध आधार नंबर डालना होता है। इसके बाद उसके ‘आधार पंजीकृत मोबाइल नंबर’ पर एक ओटीपी आता है जिसे उसे वेबसाइट पर डालना होता है। यह प्रक्रिया पूरी होते ही 15 अंकों वाली एक पावती संख्या प्राप्त होती है। यदि आवश्यकता पड़े तो आवेदक किसी भी समय अपने आधार नंबर के जरिए अपने अनुरोध की​ स्थिति की जांच कर सकता है। आवंटन सफलतापूर्वक हो जाने पर आवेदक अपना ई-पैन डाउनलोड कर सकता है। ई-पैन को आवेदक के ई-मेल पते पर भी भेजा जाता है, बशर्ते कि वह ‘आधार’ के साथ पंजीकृत हो।
तत्काल पैन आवंटन सुविधा का शुभारंभ आयकर विभाग द्वारा डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ाया गया एक और अहम कदम हैजिससे करदाताओं के लिए नियमों का अनुपालन करना और भी अधिक आसान हो गया है।

एफसीआई खाद्य वितरण के लिए जीवन रेखा बन गया है

एफसीआई खाद्य वितरण के लिए जीवन रेखा बन गया है



नई दिल्ली। गोंडवाना समय। 
केंद्रीय उपभोक्ता मामले
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री राम विलास पासवान ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिये खाद्यान्नों के वितरण और खरीद पर भारतीय खाद्य निगम के जोनल कार्यकारी निदेशकों तथा क्षेत्रीय महाप्रबंधकों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
अपने संबोधन में श्री पासवान ने लॉकडाउन के दौरान एफसीआई की भूमिका की सराहना की और कहा कि खाद्यान्न की आवाजाही सर्वकालिक ऊंचाई पर रही है। उन्होंने कहा कि एफसीआई कार्यबल वैश्विक महामारी संकट के समय एक खाद्य योद्धा के रूप में उभरा है और उन्होंने इस चुनौती को एक अवसर के रूप में बदल दिया। एफसीआई ने लॉकडाउन अवधि के दौरान खाद्यान्न रिकार्ड लोडिंगअनलोडिंग और परिवहन किया है। दूसरी तरफखरीद भी बिना किसी बाधा के जारी रही और सरकारी एजेन्सियों द्वारा इस वर्ष की गेहं की खरीद ने पिछले वर्ष के आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया।
      मंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) में खाद्यान्नों के वितरण का भी जायजा लिया।
आत्म निर्भर भारत पैकेज 
            प्रवासी/फंसे हुए प्रवासियों के लिए आत्म निर्भर भारत पैकेज के तहत खाद्यान्नों के आवंटन की समीक्षा करते हुएश्री पासवान ने कहा कि भारत सरकार ने मई एवं जून 2020 के महीनों के लिए 37 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 8.00 एलएमटी खाद्यान्न (2.44 एलएमटी गेहूं और 5.56 एलएमटी चावल) का आवंटन किया है। एफसीआई के अनुसारइस आवंटन में से राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा 27.05.2020 तक 2.06 एलएमटी खाद्यान्नों का उठाव हो चुका है। अंडमान एवं निकोबारआंध्र प्रदेश एवं लक्षद्वीप दो महीनों के लिए पूरे आवंटन का उठाव कर चुके हैं। मंत्री ने एफसीआई को राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय करने और खाद्यान्नों के उठाव में तेजी लाने का निर्देश दिया।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना
            इस योजना के तहतसरकार ने अप्रैलमई एवं जून 2020 के महीनों के लिए 37 राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों को 120.4 एलएमटी खाद्यान्न (15.65 एलएमटी गेहूं और 104.4 एलएमटी चावल) का आवंटन किया है। इस स्कीम की समीक्षा करते हुएश्री पासवान ने संबंधित अधिकारियों को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय करके उठाव में तेजी लाने का निर्देश दियाजिससे कि खाद्यान्न समय पर लाभार्थियों तक पहुंच सके। एफसीआई ने सूचना दी कि पीएमजीकेएवाई के आवंटन में से 27.05.2020 तक 95.80 एलएमटी खाद्यान्न (15.6 एलएमटी गेहूं और 83.38 एलएमटी चावल) राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा उठाये जा चुके हैं।

बिना ई-नीलामी के ओएमएसएस (डी) के तहत चैरिटेबल /एनजीओ को खाद्यान्न की बिक्री
      एफसीआई ने सूचना दी कि भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप 25.05.2020 तक इसने 186 संगठनों को 1179 एमटी गेहूं तथा 890 संगठनों को 8496 एमटी चावल की बिक्री को अनुमोदित कर दिया है, जिसमें से इन संगठनों द्वारा 886 एमटी गेहूं और 7778 एमटी चावल उठाये जा चुके हैं।

पश्चिम बंगाल एवं ओडिशा में अम्फान तूफान
            एफसीआई के अनुसारपश्चिम बंगाल सरकार ने बिना ई-नीलामी के ओएमएसएस (डी) के तहत 2250 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 11,800 एमटी चावल भंडार का आग्रह किया है लेकिन ओडिशा सरकार ने अभी तक खाद्यान्न की जरुरत की कोई सूचना नहीं दी है। श्री पासवान ने कहा कि एफसीआई को पश्चिम बंगाल एवं ओडिशा की राज्य सरकारों के साथ समन्वय करना चाहिए और तूफान प्रभावित राज्यों में खाद्यान्न की नवीनतम स्थिति का मूल्यांकन करना चाहिए।

खरीद (चावल/गेहूं)
            समीक्षा बैठक में मंत्री ने आरएमएस 2020-21 में गेहूं की बिक्री तथा केएमएस 2019-20 में चावल खरीद की समीक्षा की। चूंकि गेहूं की खरीद पहले ही पिछले वर्ष की खरीद मात्रा से अधिक हैमंत्री ने एफसीआई को गेहूं (आरएमएस 2020-21) और चावल केएमएस (20-21) की खरीद को और अपडेट करने को कहा। एफसीआई के अनुसार, 27.05.2020 तक कुल 351 एलएमटी गेहूं (आरएमएस 2020-21) की खरीद की जा चुकी है। 60.40 एलएमटी चावल (आरएमएस) की खरीद की गई है। 2019-20 में कुल 700.29 एलएमटी धान ( 470.23 एलएमटी चावल सहित) की खरीद की गई है।

खाद्यान्नों का चलन
            लॉकडाउन के समय से ही पूर्वोत्‍तर राज्यों सहित देश भर में सड़कोंरेलवेजलमार्गों तथा दुर्गम एवं पहाड़ी क्षेत्रों में विमानों द्वारा खाद्यान्नों का उठाव और परिवहन किया गया है। 3550 रेल रेकों के जरिये लगभग 100 एलटी खाद्यान्नों की माल ढुलाई हुई है। सड़कों द्वारा 12 एलटी खाद्यान्नों की माल ढुलाई हुई है जबकि 12 जहाजों द्वारा 12,000 टन खाद्यान्नों की माल ढुलाई हुई है। पूर्वोत्‍तर राज्यों को कुल 9.61 एलएमटी खाद्यान्नों की माल ढुलाई हुई है।

केंद्रीय पूल में भंडार
            एफसीआई ने 27.05.2020 तक खाद्यान्नों के वर्तमान भंडार स्थिति के बारे में सूचित किया है। अधिकारियो ने कहा कि 479.40 एलएमटी गेहूं तथा 272.29 एलएमटी चावलकुल 751.69 एलएमटी खाद्यान्न केंद्रीय पूल में उपलब्ध है। देश की वर्तमान एवं भविष्य की खाद्यान्न जरुरतों को पूरा करने के लिए भंडार की स्थिति पर संतोष जताते हुए श्री पासवान ने एफसीआई के अधिकारियों एवं श्रमिकोंजो संकट के इस समय में कड़ी मेहनत करते रहे हैंको सरकार द्वारा पूरी सहायता दिए जाने का संकल्प दुहराया।

टीके के विकास और दवाओं के परीक्षण के लिए सीसीएमबी में कोरोना वायरस कल्चर

टीके के विकास और दवाओं के परीक्षण के लिए सीसीएमबी में कोरोना वायरस कल्चर


नई दिल्ली। गोंडवाना समय। 
वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला आणविक जीवविज्ञान केन्द्र (सीसीएमबी
) के वैज्ञानिकों ने मरीजों के नमूने से कोविड-19 के लिए जिम्मेदार कोरोना वायरस (SARS-CoV-2) का स्थिर संवर्धन (कल्चर) किया है। लैब में वायरस के संवर्धन की क्षमता से सीसीएमबी के वैज्ञानिकों को कोविड-19 से लड़ने के लिए टीका विकसित करने और संभावित दवाओं के परीक्षण में मदद मिल सकती है।

वैज्ञानिक जब वायरस कल्चर करते हैंतो यह स्थिर होना चाहिएजिसका अर्थ है कि वायरस संवर्धन निरंतर होते रहना चाहिए। इसीलिएइसे स्थिर संवर्धन कहा जाता है। नोवेल कोरोना वायरस एसीई-2 नामक रिसेप्टर प्रोटीन के साथ मिलकर मानव के श्वसन मार्ग में एपीथीलियल कोशिकाओं को संक्रमित करता है। श्वसन मार्ग में एपीथीलियल कोशिकाएं प्रचुरता से एसीई-2 रिसेप्टर प्रोटीन को व्यक्त करती हैं, जिससे इस वायरस से संक्रमित मरीजों में श्वसन रोगों का खतरा बढ़ जाता है। कोशिकाओं में वायरस के प्रवेश की एंटोसाइटोसिस नामक प्रक्रिया के बाद वायरस आरएनए कोशिकाओं के साइटोप्लाज्म में रिलीज होता है, जहाँ यह पहले वायरल प्रोटीन बनाता है और फिर जीनोमिक आरएनए की प्रतिकृति बनने लगती है। इस प्रकार, वायरस इन कोशिका संसाधनों का उपयोग अपनी संख्या बढ़ाने के लिए करता है।

सीसीएमबी के विषाणु-विज्ञानी (वायरलोजिस्ट) डॉ. कृष्णन एच. हर्षन के नेतृत्व में शोधार्थियों की एक टीम ने नमूनों से संक्रामक वायरस पृथक किया है। डॉ. कृष्णन ने बताया कि “वर्तमान में, मानव एपीथीलियल कोशिकाएँ प्रयोगशालाओं में निरंतर कई पीढ़ियों तक नहीं बढ़ पाती हैं, जो लगातार वायरस संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण है। इसीलिए, सीसीएमबी और अन्य लैब जो वायरस को संवर्धित कर रहे हैं, उन्हें कभी न खत्म होने वाली सेल लाइन की आवश्यकता है।” इसीलिए, वैज्ञानिक विरो सेल का प्रयोग करते हैं- जो अफ्रीकी बंदर के गुर्दे की एपीथीलियल कोशिका लाइनों से प्राप्त होते हैं, और जो एसीई-2 प्रोटीन को व्यक्त करते हैं। इसके साथ ही, ये कोशिका विभाजन भी करते हैं, जिससे वे अनिश्चित काल तक वृद्धि कर सकते हैं।

यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर क्या कारण है कि वैज्ञानिक इस घातक वायरस का संवर्धन करने में जुटे हुए हैं! वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि हम बड़ी मात्रा में वायरस का संवर्धन करते हैं और उन्हें निष्क्रिय कर देते हैंतो इसका उपयोग निष्क्रिय वायरस के टीके के रूप में किया जा सकता है। एक बार जब हम निष्क्रिय वायरस को इंजेक्ट करते हैंतो मानव प्रतिरक्षा प्रणाली रोगाणु-विशिष्ट एंटीबॉडी के उत्पादन को बढ़ा देती है। ताप या रासायनिक साधनों द्वारा वायरस को निष्क्रिय किया जा सकता है। निष्क्रिय वायरस एंटीबॉडी प्रतिक्रिया को बढ़ा सकता हैलेकिन हमें संक्रमित करके बीमार नहीं करता है।

सीसीएमबी के निदेशक, डॉ. राकेश मिश्र ने कहा है कि “कोरोना वायरस को विकसित करने के लिए विरो सेल लाइनों का उपयोग करते हुए, सीसीएमबी अब विभिन्न क्षेत्रों से वायरल उपभेदों को अलग करने और बनाए रखने में सक्षम है। हम बड़ी मात्रा में वायरस का उत्पादन करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिसे निष्क्रिय किया जा सकता है, और चिकित्सीय उद्देश्यों के लिए टीका विकास और एंटीबॉडी उत्पादन में उपयोग किया जा सकता है। हमने इस वायरल कल्चर का उपयोग करते हुए डीआरडीओ और अन्य भागीदारों के साथ संभावित दवाओं का परीक्षण शुरू कर दिया है।”

क्या ज्यादा पैसे देने वालों की खबर लगती है गोंडवाना समय पर ?

क्या ज्यादा पैसे देने वालों की खबर लगती है गोंडवाना समय पर ?

राष्ट्रीय पत्रकारिता पर 
आपबीती, अनुभव लेख
विवेक डेहरिया
संपादक 
दैनिक गोंडवाना समय
लेख प्रारंभ से लेकर अंत तक कड़वा सच से भरा हुआ है जिन्हें बुरा लगे उन्हें प्रकृति शक्ति हमेशा सुरक्षित, स्वस्थ्य व प्रसन्न रखे यही प्रकृति शक्ति से मेरी प्रार्थना है और बुरा मानने वालों से मैं पहले ही क्षमा मांग लेता हूं। हिन्दी राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस पर गोंडवाना समय संपादक विवेक डेहरिया को काफी लोगों ने बधाई दिया तो सोचा कि क्यों न पत्रकारिता के 12 वर्षों और स्वयं के अखबार के 8 वर्षों यानि 20 वर्षों का अनुभव आज मैं लिखूं ताकि पत्रकारिता करना कितना आसान है और अखबार को छपवाकर पाठकों के हाथों तक पहुंचाने के बीच कितना व किस तरह का संघर्ष है।
                इसके साथ ही पत्रकारिता करने वाले और मेहनत करने वाले अखबार के संपादक के लिये ये सफर किस तरह संघर्षशील है इसके बाद भी इसे लाखों-करोड़ों रूपये कमा लिये या कमाई का जरिया बताने वालों की कमी नहीं है, सभी को एक ही तराजू में रखकर तौलने वाले, बिकाऊ मीडिया दो शब्दों से संघर्ष ईमानदारी, योग्यता, मेहनत को तार-तार कर देते है। खैर अभिव्यक्ति की आजादी के आगे बोलने वाले और उसी को लिखने वालों को कौन रोक सकता है। 
       मैंने 12 वर्षों की पत्रकारिता में दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर भोपाल समेत और भी अखबारों में पत्रकारिता करने का अवसर मिला। इस दौरान दैनिक भास्कर लीडिंग अखबार में मुख्य पृष्ठ पर लगातार चार दिनों तक वाईनेम खबर भी प्रकाशित हुई इस तरह के समाचारों को दैनिक भास्कर भोपाल के अखबार में मुख्य पृष्ठ में मेरी खबरों को स्थान मिला।
             दैनिक भास्कर अखबार की सिवनी शहर के 7 प्रमुख रोड जैसे नागपूर रोड, जबलपुर रोड, अमरवाड़ा रोड, बालाघाट रोड, कटंगी रोड, मंडला रोड, छिंदवाड़ा रोड की आखिरी छोर तक व शहर के प्रमुख वार्डों में किराये की साईकिल में वितरण करने के लिये मैंने साईकिल किराये पर लेकर कभी 2 रूपये से ज्यादा किराया नहीं दिया, क्योंकि प्रतिघंटा साईकिल का किराया 2 रूपये लगता था और जहां से साईकिल किराये पर उठाता था वहां के रजिस्टर में यदि सुरक्षित होगा तो आज भी मेरा नाम मिल सकता है।
           अत्याचार, शोषण, अन्याय, के खिलाफ कलम के लिये स्वयं का अखबार निकालने का सोचा तो पत्रकारिता के दौरान ही गोंडवाना आंदोलन के कार्यक्रमों को कवरेज करते करते हुये गोंडवाना के मिशन को समझा जो प्रकृति व मानवतावादी विचारयुक्त पाया। 
गोंडवाना आंदोलन के दौरान समझ आया कि प्रकृति के प्रति इनका प्रेम क्यों है और क्यों जरूरी है। यही सोचकर गोंडवाना आंदोलन के मिशन से जुड़ भी गया, राजनैतिक पृष्ठभूमि में भी मीडिया प्रभारी के रूप में काम किया लेकिन कुछ विशेष पदाधिकारियों के द्वारा मेहनत को नकारने वालों की यहां भी कमी नहीं थी मतलब हत्सोसाहन के रूप में परिणाम मिलता रहा हां गोंडवाना समग्र क्रांति आंदोलन के महानायक ने कभी दरकिनार नहीं किया मुझे व मेरे परिवार को आज भी वे नाम से और काम से जानते है यही मेरे लिये सबसे बड़ा ईनाम है और गोंडवाना के कारण ही आज मेरी पहचान है और नाम सरकार, शासन-प्रशासन में हो या राजनैतिक क्षेत्र में हो या कोई भी क्षेत्र हो गुमनाम नहीं हूं मैं भले ही चेहरा कम ही जानते है। 

कैसे शुरू हुआ गोंडवाना समय के प्रकाशन का सफर

पत्रकारिता करते करते सोचा कि क्यूं न अन्याय, अत्याचार, शोषण की आवाज को हूबहू उतारने के लिये और समस्याओं को कटौती युक्त स्थान की वजाय, फुल पेज में छापने के लिये स्वयं का समाचार पत्र होना जरूरी है और आपने देखा होगा कि गोंडवाना समय समाचार पत्र में कभी भी आपको शेष पेज क्रमांक पर लिखा हुआ कभी नहीं दिखेगा पूरी खबर एक ही स्थान पर होती है चाहे पूरा पेज ही क्यों न भरना पड़े।
             यही विचार आया और गोंडवाना समय का वर्ष 2011 में साप्ताहिक समाचार पत्र के लिये पंजीयन कराया और उसका आरएनआई पंजीयन वर्ष 2012 में संघर्षमय परीश्रम के बाद आ पाया जिसे पक्का पंजीयन कहा जाता है। 

साप्ताहिक समाचार का भी रहा संघर्षमय सफर


गोंडवाना समय के प्रथम अंक वर्ष 2011 का 1 नंबर पेज और 4 पेज

साप्ताहिक समाचार पत्र के पंजीयन के बाद उसे कंपोज कर, प्रकाशन करना, छपवाना उतना आसान नहीं था, कई प्रिंटिंग प्रेस बदला, और छपवा भी लिया तो उसे वितरित कर पाना उससे ज्यादा कहीं कठिन था। मुझे याद है मैं स्वयं सिवनी जिले में दुपहियावाहन में पेपर लेकर गांव-गांव जाता था और रास्ते में सामुहिक रूप से मिलने वाले लोगों के बीच में वितरित करता था, कुछ नाम सुनकर खुश हो जाते थे तो कुछ नकारात्मक जवाब भी देते थे।

गोंडवाना समय द्वितीय अंक वर्ष 2011 का 1 नंबर पेज पर देखे खबर 


           
गिरते पानी, कड़ी धूप, कड़कड़ाती ठण्ड, दिन हो या रात का समय नहीं देखा गांव-गांव स्वयं पहुंचाने का प्रयास किया। चूंकि समाचार पत्र और पत्रकारिता का महत्व गोंडवाना आंदोलन से जुड़े हुये लोगों ने समझ ही नहीं पाया इसलिये संवाददाता भी बनने को तैयार नहीं होते थे कुछ तैयार हुये तो अखबार चला नहीं पाये और न पेपर का बिल भी भुगतान कर पाये नुकसान मुझे ही सहना पड़ा।
            इसके बाद भी गोंडवाना समय का साप्ताहिक प्रकाशन कम बंद नहीं किया संघर्ष करते-करते कुछ अच्छे भी लोग मिले जिन्होंने उत्साह बढ़ाया, हौंसला भी बढ़ाया और सहयोग भी किया पर उनकी संख्या अंगूली में गिनने लायक ही रही। इसके बाद जब मैंने देखा कि जो पीड़ित या शोषित होता है और यह समस्या सबसे ज्यादा जनजाति समुदाय के साथ दिखाई देती थी लेकिन समाचार पत्र सप्ताह में एक बार छपता था तब तक सरकार, शासन-प्रशासन व पाठकों तक बात पहुंचाने में देर हो जाती थी और समस्या इतनी होती थी कि 4 पेज में जगह ही नहीं रह पाती थी किस समस्या को पहले उठाऊं और किसे नहीं यह समस्या बन जाती थी। यही सोचकर विचार आया कि क्यों न इसे दैनिक समाचार पत्र के रूप में प्रकाशन किया जाये लेकिन साप्ताहिक समाचार पत्र का ही खर्च निकालना मुश्किल था तो दैनिक कैसे निकालते लेकिन मेरे साथ कंधा से कंधा मिलाकर साथ देने वाले और साप्ताहिक समाचार पत्र में सबसे ज्यादा आर्थिक मदद करने वाले मेरे साथी में मुझे हिम्मत दिया और कहा कि दैनिक अखबार निकालों और मैंने शुरूआत कर दिया।
             गोंडवाना समय अखबार के छपाई के लिये प्रिंटिंग मशीन को खरीदने में मेरे साथी के परिवार का सबसे बड़ा योगदान है। जिसकी बदौलत गोंडवाना समय को छपवाने के लिये भटकना नहीं पड़ता है। इसमे साथी का नाम नहीं लिखुंगा पर जो जानते है उन्हें मालूम है। 

14 अप्रैल 2017 से हुई दैनिक गोंडवाना समय के संघर्ष की शुरूआत अब भी सफर जारी 

प्रतिदिन बढ़ते शोषण, अन्याय, अत्याचार की आवाज को समाचार का रूप देने के लिये दैनिक गोंडवाना समय का प्रकाशन बहुत ही कारगर सिद्ध हुआ। समस्यायें दबना अब आसान नहीं था वह उजागर होकर पाठकों तक पहुंचने में देर नहीं लगती थी परंतु दैनिक समाचार पत्र का प्रकाशन उतना आसान नहीं था।
              कहने में तो सरल लगता है समाचार पत्र लेकिन उस बीच के संघर्ष व खर्च को कौन समझता है जो समझते है उन्हें मालूम है कि कितना मुश्किल व खर्चिला है। यदि आप 1000 ही कापी प्रकाशित करते है और यदि खुद की मशीन है तो दिन भर पहले रिपोर्टिंग कर समाचार बनाना, कंपोज करने के लिये कर्मचारी व कम्पूयटर की आवश्यकता, प्रिंटिंग मशीन में कर्मचारियों की आवश्यकता है, उसमें लगने वाली महंगी सामग्री जैसे, कागज, स्याही, प्लेट और मशीन जो किराये के मकान में है वहां का किराया और प्रिंटिग मशीन का भारी भरकम बिजली बिल का भुगतान करना बहुत मुश्किल था।
             इसके बाद उसका वितरण कराना और तहसील व दूसरे जिलों में पहुंचाना उतना आसान नहीं था। इतना जरूर था कि सिवनी शहर में लोगों के जुवान पर गोंडवाना समय का नाम रट गया और चर्चा में रहता है गोंडवाना समय का नाम। 

दैनिक गोंडवाना समय के संघर्ष के दौरान आई कुछ तकलीफे

दैनिक गोंडवाना समय का संचालन के लिये सबसे ज्यादा जरूरी एक कार्यालय का होना जरूरी था जो बहुत मुश्किल से मिला जिसे हम ढाई साल के सफर में चार बार स्थान बदल चुके है। उसके साथ ही मेहनत करने के बाद भी गोंडवाना समय समाचार पत्र प्रिंटिंग प्रेस की तीन बार लाईट कट जाना कारण बिल नहीं पटा पाना लेकिन स्वयं की प्रिटिंग मशीन होने के बाद भी गोंडवाना समय का छपना बंद नहीं हुआ।
           हालांकि जो लोग नहीं चाहते थे कि गोंडवाना समय समाचार पत्र छपे उनके चेहरे की खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पाई। उस मुश्किल को भी इंदौर के एक सख्स के सहयोग से दूर कर लिया गया जिन्होंने मेरी मेहनत गोंडवाना समय समाचार की अहमियत को समझा था। दैनिक समाचार पत्र का प्रकाशन बहुत ही खर्च वाला काम है क्योंकि लागत ज्यादा लगती है और आवक कम होती है इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि विज्ञापन का सपोट गोंडवाना समय को बहुत कम मिला, जिससे आर्थिक समस्यायें समाचार पत्र की हल हो सकती थी।
          इसके बाद भी गोंडवाना समय का संघर्ष का सफर रूका नहीं बीच में जब पुन: दिक्कत आई तो भोपाल के गोंडवाना समय के शुभचिंतक लेखक इतिहास को खोजने वाले ने बिना बताये ही तकलीफ को समझ लिया और मदद के लिये गुहार लगाई तो देश भर से गोंडवाना के शुभचिंतकों ने मदद के लिये हाथ भी बढ़ाया और कुछ तकलीफ कम भी हुई।
           गोंडवाना समय के संपादक के रूप में लगभग 12 से 16 घंटे काम करने के दौरान समाचार बनाते-बनाते सबसे ज्यादा टेंशन यही होती है कि कागज खत्म हो रहा है, प्लेट खत्म हो रही है, स्याही नहीं है, कार्यालय का किराया देना है, मशीन के भवन का किराया देना है, बिजली बिल नहीं पटा है, कर्मचारियों को वेतन देना है, प्रतिदिन का कार्यालय का मेंटनेंस भी करना है कैसे होगा लेकिन संघर्ष के साथ तकलीफ आज भी साथ साथ चल रही है। 

फ्री के ब्लॉगर से चलाया काम, बेवसाईट में अ‍ॅपडेट तो किया पर

तकनीकि व आधुनिक युग व प्रतिस्पर्धा के इस युग में गोंडवाना समाचार पत्र के नाम पर इतना कमाया कि फ्री के ब्लॉगर का उपयोग करना पड़ा, इसके बाद जब बेवसाईट कुछ महिने पहले परिवर्तित किया गया है लेकिन जैसे बेवसाईट और भी समाचार पत्रों की होती है वह अत्याधिक खर्चीला है। जो इतना कमाने के बाद भी फिलहाल गोंडवाना समय के संभव नहीं है लेकिन खुशी इसी बात है कि गोंडवाना समय के लाखों की संख्या में आॅनलाईन पाठक है जो वर्तमान में 28 लाख तक पहुंचने की ओर है। 

ये है संपादक का खाता 0 बैलेंस

             
             
वैसे भी गोंडवाना समय पर तिरछी नजर हमेशा रहती है। वहीं कुछ समाजिक संगठनों के पदाधिकारियों को भारी टेंशन है कि गोंडवाना समय के नाम पर समाज से लाखों करोड़ों कमा लिया है तो उनके लिये मेरा खाता नंबर और उसमें 0 बैलेंस को वह देख सकते है इसके बाद भी संतुष्टी न हो तो वे बैंक से स्टेटमेंट निकाल सकते है जब से खाता खुला है और नहीं बन पाये तो मुझे बता सकते है मैं खाता खुलने से लेकर अभी तक स्टेटमेंट उन्हें उपलब्ध करवा सकता है ताकि उनकी टेंशन कम हो सकें। 
इसे नहीं समझते लेकिन इसके बाद भी शायद ही किसी का समाचार गोंडवाना समय में प्रकाशन होने से रूक पाता है हां कई बार प्रेस एक्ट और कानूनी प्रावधानों को भी देखना जरूरी होता है नहीं कानूनी कार्यवाही के लिये सिर्फ संपादक जिम्मेदार होता है।
गोंडवाना समय समाचार पत्र के संपादक के रूप में कार्य करते करते मैंने इतना रूपया कमाया हूं कि बीते कुछ महिने से मेरा खाता ही 0 बैलेंस बता रहा है। क्योंकि अक्सर यही होता है जो लोग मुझे समाचार भेजते है या बताते है और समय पर नहीं लग पाता है जगह के अभाव या फिर वे बिना समस्या को जाने ही सोशल मीडिया में सार्वजनिक कर देते है और कहते है कि गोंडवाना समय में ज्यादा पैसे देने वालों के समाचार लगते है क्या, पर्सनल में लिखकर भेजते है कि हमारा समाचार क्यों नहीं लगा, क्यों नहीं लगा रहे हो लेकिन वे यह नहीं देखते है कि हमें समाचारों के साथ तथ्यों को भी भेजना है, प्रमाणिक हो, इसके साथ ही समय कब तक देना है क्योंकि मैं अकेला समाचार टाईप करने वाला हूं, सिर्फ समस्या कम शब्दों में लिखकर पहुंचाते है और मुझे उसे समाचार का स्वरूप में बदलना होता है जो कितना कठिन है।

ये है गोंडवाना समय का करेंट एकाऊँट मात्र 158 रूपये 

         
जो लोग सोचते है कि गोंडवान समय के नाम लाखों कमा रहा हंू उन्हें क्या पता कि मुुझे करेंट एकाऊँट खुलवाने में ही कई साल लग गये क्यों कि करेंट एकाऊंट खोलने के लिये 5000 और बड़ी बैंकों में 10000 रूपये लगते है।
जिसे मैंने लगभग डेढ़ साल से पहले ही खुलवा पाया जिसका खाता नंबर का प्रमाणीकरण और उसका वेलेंस देख सकते है और स्टेटमेंट मैं ही निकलवाकर दे सकता हूं ताकि शक और संदेह समाप्त हो जाये।
             वहीं गोंडवाना समय के करेंट एकाउंट में 158 रूपये का बैलेंस हो तो बैंक में गोंडवाना समय की क्या साख होगी यह भी पता चल सकता है कि मैंने कितना कमाया हूं, कितना खोेया हूं और क्या आज तक पाया हूं। 

खूब कमा रहे हो गोंडवाना समय के नाम पर 

गोंडवाना समय समाचार पत्र के कार्यालय में आने वाले कुछ लोग कई बार यह कहते है कि तुमने तो एक कम्पयूटर से तीन कंप्यूटर कर लिये खूब कमा रहे हो गोंडवाना समय के नाम पर, पत्रकारिता के नाम पर इस तरह सम्मान करते है लेकिन उन्हें क्या पता कि यह भी कर्ज लेकर लिया गया सामान है जो दैनिक समाचार पत्र के लिये आवश्यक है। बजाज फाईनेंस लिमिटेड जहां से कर्ज लिया हूं उसका लोन खाता नंबर 5Q3RPL62988211 ये है और वहां पर मेरी सीआर क्या है यह संपर्क करने पर गोंडवाना समय के नाम पर खूब कमा रहा हूं और ज्यादा पैसे लेने वालों के समाचार लगाता हूं वालों को जवाब मिल सकता है। 

न थकेगा, न रूकेगा, जब तक हूं जीवित गोंडवाना समय का संघर्ष 

             कुछ लोग चाहते है कि गोंडवाना समय समाचार पत्र बंद हो जाये, कुछ लोगों ने तो कोशिश भी किया और अपने घर व अपने क्षेत्र से गोंडवाना समय समाचार पत्र को बंद करवाने का प्रयास भी किया लेकिन वह कामयाब नहीं हो पायेंगे।
           गोंडवाना समय के साथ प्रकृति शक्ति का साथ है और कम संख्या भले ही होगी हिम्मत देने वालों की उनके द्वारा मेरा मनोबल निरंतर बढ़ाया जाता है, मेरा उत्साह में कभी कमी नहीं होने देते है ऐसे शुभचिंतकों को रहते हुये गोंडवाना समय का संघर्ष न थकेगा और न ही कभी रूकेगा। इसके साथ ही मैं गोंडवाना आंदोलन की भट्टी में तपकर निकला हूं, गोंडवाना का त्याग, तपस्या, संघर्ष को करीब से देखा हूं, उसका अनुभव मेरे साथ है इतना आसान नहीं है गोंडवाना समय का सफर को रोकना जब तक जीवित हूं।
            अब लोग मेरे यह लेख पढ़ने के बाद यह न सोचने लगे कि कमाई का ये नया तरीका निकाल लिया तो उन्हें बता दूं कि मेरे और गोंडवाना समय के साथ प्रकृति शक्ति का हाथ है साथ है जब विपरीत परिस्थिति में गोंडवाना समय समाचार पत्र का प्रकाशन हो सकता है, अब तो प्रकृति शक्ति की कृपा से साधन की कमी नहीं है मुझे अटूट विश्वास प्रकृति शक्ति पर है।
            आखिर में यही कि गोंडवाना आंदोलन के लिये सिर्फ मैं अकेला ही नहीं हूं, हजारों सिपाही है जिन्होंने तन, मन, धन सब कुछ खो दिया लेकिन हार नहीं माना है, उनकी प्रेरणा मुझे मजबूत करती रहेगी संघर्ष के लिये। 
आपबीती, अनुभव लेख
विवेक डेहरिया
संपादक 
दैनिक गोंडवाना समय

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