Wednesday, July 10, 2019

शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही : आदिवासी विद्यार्थियों से कोसो दूर विज्ञान प्रोत्साहन राशि

शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही : आदिवासी विद्यार्थियों से कोसो दूर विज्ञान प्रोत्साहन राशि 

शासन की योजना से कक्षा 11 वीं और महाविद्यालय के आदिवासी विद्यार्थी हो रहे वंचित 

सिवनी। गोंडवाना समय। 
विज्ञान एवं सामयिक विषयों में आदिवासी विद्यार्थियों को प्रोत्साहन देने के लिये मध्य प्रदेश शासन आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2012 को ही प्रथम दौर में विज्ञान एवं सामयिक विषयों में आकर्षित करने के लिये विज्ञान प्रोत्साहन योजना स्वीकृत की गई थी जो वर्तमान में भी लागू है । जिसमें 11 कक्षा के विद्यार्थी को छात्रवृत्ति के अतिरिक्त एक बार वर्ष में एक बार 2,000/- रूपये एवं स्नातक प्रथम वर्ष में छात्रवृत्ति के अतिरिक्त एक बार वर्ष में 3,000/- रूपये दिये जाने का प्रावधान है । शासन द्वारा जनजाति वर्ग विद्यार्थियों के लिये बनी कल्याणकारी योजना को क्रियान्यन करने में यह बात तो स्पष्ट रूप से उजागर होती हुई दिखाई देते है कि शिक्षा विभाग एवं महाविद्यालय स्तर पर लापरवाही की जाती रही है या जानबूझकर जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को लाभ दिये जाने से वंचित किया जाता रहा है और यह सिलसिला वर्तमान में भी चालू ही है आखिर इसके पीछे क्या कारण है। विशेषकर इसमें जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के अंतर्गत आने वाले स्कूलों या महाविद्यालयों के द्वारा जानबूझकर कहें या जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को वंचित कर उनके हक अधिकार से वंचित करने का षडयंत्र किया जाता रहा है।

11 वीं में 2,000/- तो स्नातक प्रथम वर्ष में मिलते है 3,000 

हायर सेकेण्ड्री स्तर पर विज्ञान प्रोत्साहन के लिये विज्ञान क्लब, अध्ययन यात्रायें, विज्ञान हेतु आवश्यक पुस्तके एवं उपकरण के लिये प्रत्येक आदिवासी वर्ग के विद्यार्थी को 2,000/- हजार कक्षा 11 वीं में विज्ञान प्रोत्साहन सहायता राशि उपलब्ध कराये जाने का प्रावधान किया गया था वहीं यह सहायता राशि स्कूल शिक्षा विभाग के ऐसे चिहिन्त हायर सेकेण्ड्री/हाईस्कूल को भी दिया जाना था जहां पर आदिवासी विद्यार्थी अध्ययनरत है । स्नानक प्रथम वर्ष में 3000/-रूपये की है ये योजना कक्षा 12 वीं उत्तीर्ण आदिवासी विद्यार्थी को महाविद्यालय में स्नातक विज्ञान (फिजिक्स, केमेस्ट्री, मेथ्स, वाटनी, जूलॉली) पाठ्यक्रमोें में प्रवेश लेने के आकर्षण के लिये पाठ्यक्रम के प्रवेश पर प्रथम वर्ष 3000/- रूपये विज्ञान स्नातक प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराये जाने का प्रावधान कर नियम बनाया गया था जो आज भी लागू है । इसका उद्देश्य यह था कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के विज्ञान संकाय के उत्तीर्ण विद्यार्थियों को स्नातक स्तर पर विज्ञान संकाय में अध्ययन निरंतर जारी रखना है। इसके लिये शासन ने प्राथमिकता के आधार पर उक्त योजना के क्रियान्वयन के दिशा निर्देश जारी किये गये थे।

संविदा शिक्षक, अध्यापकों के लिये पीरियड के अनुसार मानदेय

उक्त योजना को सफल रूप से क्रियान्वित करने के लिये शासन ने प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला में पदस्थ एम एस सी योग्यताधारी संविदा शिक्षक/अध्यापक/शिक्षकों को अपनी शला के अतिरिक्त हायर सेकेण्ड्री विद्यालय में विज्ञान एवं अन्य सामयिक विषयों जिसमें अंग्रेजी विषय भी शामिल है का अतिरिक्त अध्ययन कराने पर प्रत्येक कालखण्ड-पीरियड के मान से निर्धारित मानदेय दिये जाने का प्रावधान किया गया था ।

गैर आदिवासी जिलो के लिये भी है योजना

यह योजना सिर्फ आदिवासी बाहुल्य जिलों के लिये ही नहीं थी वरन यह गैर आदिवासी जिलों में हाईस्कूल तथा हायर सेकेण्ड्री विद्यालयों को दी जाने वाली वार्षिक सहायता राशि के लिये हाईस्कूल/हायर सेकेण्ड्री स्कूल को चिन्हित किया जाकर जिनमें 10 एवं कक्षा 11 वीं की कक्षाओं में कुल दर्ज संख्या में अनुसूचित जनजाति वर्ग के न्यूनतम 33 प्रतिशत विद्यार्थी अध्ययनरत हो आगामी शैक्षणिक सत्र प्रांरभ होने के पूर्व जानकारी का प्रचार प्रसार कर योजना का क्रियान्वयन किया जाने का प्रावधान किया गया था।

प्रोत्साहन के बाद भी महाविद्यालय में कम होती गई संख्या 

शासन द्वारा जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को स्नातक प्रथम वर्ष में विज्ञान प्रोत्साहन के लिये 3000 रूपये दिये जाने का प्रावधान किये जाने के बाद भी पता नहीं क्यों विज्ञान प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत महाविद्यालय में स्नातक प्रथम वर्ष में वर्ष 2016-17 में कुल 291 को 3,000/- रूपये प्रोत्साहन राशि के रूप में कुल 8,73,000/- रूपये प्रदान की गई थी वहीं वर्ष 2017-18 में स्नातक प्रथम वर्ष में कुल 223 विद्यार्थियों को कुल 6,69,000/- रूपये प्रदान किया गया था इसके साथ वर्ष 2018-19 में 116 विद्यार्थियों के ही प्रस्ताव आये है 3,48,000/- रूपये विद्यार्थियों को प्रदान किया जायेगा। अब यदि हम आंकड़ों को देखे तो जहां वर्ष 2016 में 291 विद्यार्थियों की संख्या थी वह घटकर वर्ष 2017-18 में 223 हो गई थी वहीं वर्ष 2018-19 में वह 116 हो गई है। अब प्रश्न यह उठता है कि आखिर महाविद्यालय स्तर पर जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों की संख्या विज्ञान (फिजिक्स, केमेस्ट्री, मेथ्स, वाटनी, जूलॉली) घट गई है या जानबूझकर घटाई जा रही है या समझ से परे है क्योंकि इन विषयों में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों की संख्या जनजाति बाहुल्य जिला होने के अनुसार अत्याधिक ही होगी लेकिन उसके बाद भी इन विषयों में विद्यार्थियों की संख्या कम होना चिंताजनक स्थिति है । अब यह तो जांच का विषय है कि इसमें जिम्मेदार कौन है ।

शिक्षा विभाग में तो स्थिति बेहद खराब, कौन देगा जवाब 

विज्ञान प्रोत्साहन योजना कक्षा 11 वी में दिये जाने का शासन का प्रावधान है और इसमें यदि हम बात करें सिवनी जिले की तो शिक्षा विभाग में वर्गबार विद्यार्थियों का तो कोई रिकार्ड ही मौजूद नहीं है लेकिन कुल जीव विज्ञान के बच्चों की संख्या है उस आधार पर यदि हम बात करें तो वर्ष 2016-17 में जिले भर में लगभग 89 स्कूलों में सभी वर्ग के विद्यार्थियों की संख्या लगभग 2718 थी लेकिन यदि हम विज्ञान प्रोत्साहन के लिये प्रदान की गई राशि के आंकड़े को देखे तो वर्ष 2016-17 में मात्र 58 विद्यार्थियों को ही कक्षा 11 वीं में 1,16,000/- रूपये प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है । अब सवाल यह उठता है कि यदि जनजाति वर्ग के आंकड़े उपलब्ध नहीं भी है तो अनुमानत: की ही बात करें तो क्या कुल 2718 में मात्र 58 विद्यार्थी ही कक्षा 11 वीं विज्ञान संकाय में रहे होंगे यह भी जांच का विषय है । वहीं वर्ष 2017-18 में भी मात्र 138 विद्यार्थियों को ही 2,76,000/- रूपये विज्ञान प्रोत्साहन योजना का लाभ दिया गया है । इसी तरह यदि हम बात करें वर्ष 2018-19 में जिले भर के कुल 93 स्कूलों में कक्षा 11 वीं जीव विज्ञान में अध्ययनरत विद्यार्थियों की कुल 2870 विद्यार्थी है जिनमें से वर्ष 2018-19 के लिये मात्र 280 विद्यार्थियों का ही प्रस्ताव आदिम जाति कल्याण विभाग में आया है। कुल मिलाकर सरकार शासन की योजना जनजाति वर्ग के लिये बनाई तो जाती है लेकिन उसका लाभ देने में या क्रियान्वयन करने में संबंधित विभागों के जिम्मेदार जानबूझकर लापरवाही बरतते है।

जनप्रतिनिधि नहीं लेते संज्ञान, समाजिक संगठन भी नहीं देते ध्यान

जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिये शासन की महत्वपूर्ण योजना जो कि उनके शैक्षणिक विकास में मील का पत्थर साबित हो सकती है या मददगार हो सकती है क्योंकि कई बार आर्थिक परिस्थिति के कारण विद्यार्थी विज्ञान जैसे विषय नहीं लेता है लेकिन जब शासन ही प्रोत्साहन के लिये योजना चला रही है तो फिर क्यों जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को लाभ नहीं मिल पाता है। इसके लिये क्या सिर्फ संबंधित विभाग ही जिम्मेदार है । इसके लिये सर्वप्रथम जनजाति वर्ग के वे जनप्रतिनिधि जवाबदार है जो जनजाति वर्गों का वोट या मताधिकार लेकर कुर्सी में बैठते है और फिर सरकार व शासन से जनप्रतिनिधियों को मिलने वाली समस्त सुख सुविधाओं का लाभ उठाते है । कहने को सिवनी जिला आदिवासी बाहुल्य जिला है यहां पर जिला, जनपद, सरपंच, पंच, पार्षद से लेकर दो-दो विधायक भी जनता का प्रतिनिधित्व कर रहे है लेकिन उसके बाद भी अपने ही समाज वर्ग के विद्यार्थियों को लाभ नहीं दिला पा रहे है या इनकी गैर जिम्मेदारी के चलते विद्यार्थी वंचित हो रहे है। दूसरे वर्ग के जनप्रतिनिधियों की बात इसलिये नहीं कर सकते क्योंकि जब आदिवासी समाज के ही जनप्रतिनिधि अपने ही समाज को लेकर सचेत नहीं है तो दूसरे वर्ग के जनप्रतिनिधियों से उम्मीद करना उचित नहीं है । वहीं यदि हम बात करें सिवनी जिले में आदिवासी समाजिक संगठनों की बात करें तो लगभग 25 से भी अधिक समाजिक संगठन समाज के उत्थान, प्रगति, विकास के लिये शहर-शहर- गांव-गांव में काम कर रहे है कोई समस्त समाज के लिये तो कोई युवाओं के लिये तो कोई महिलाओं के लिये तो कोई छात्रों के लिये संगठन बनाकर काम कर रहा है । समाजिक संगठनों के बड़े-बड़े मंचीय कार्यक्रम जो बड़े बडेÞ मैदान में आयोजित होते है, हजारों की संख्या में जनजाति वर्ग के सगा समाज एकत्र होते है, जनजागरूकता के लिये रैली निकालते है। वहीं सामाजिक संगठन के अधिकांश पदाधिकारियों को तो संविधान की धारायें विशेषकर जनजातियों के लिये संविधान में जो प्रावधान किया गया है वह और कानून की किताबों व नियम कानूनों की जानकारी फर्राटेदार रटी हुई क्योंकि मंचों में जब ये भाषण देते है और उनकी फोटो और व्डीयो जब सोशल मीडिया में वायरल करते है तो देखकर व सुनकर समझ आता है कि इन्हें हरेक जानकारी है लेकिन कक्षा 11 वी में विज्ञान प्रोत्साहन योजना में आदिवासी समाज का विद्यार्थी वंचित न हो पाये इसके लिये धरातल में समाजिक संगठन की जिम्मेदारी निभाने में कहीं न कहीं कमी कर रहा है यह भी उजागर हो रहा है ।

योजना का लाभ दिलाने लिखेंगे पत्र 

इस संबंध में जब जनजाति विकास विभाग सिवनी के सहायक आयुक्त श्री एस एस मरकाम से गोंडवाना समय द्वारा चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में हमारे द्वारा विभाग प्रमुखों को पत्र लिखा जायेगा वहीं जो प्राचार्य स्कूल व महाविद्यालय विद्यार्थियों के प्रस्ताव नहीं देंगे उन्हें कारण बताआें नोटिस जारी किया जायेगा ।

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