Saturday, July 6, 2019

शहडोल, रतलाम और विदिशा मेडिकल कॉलेज भवन का निर्माण कार्य पूर्ण

शहडोल, रतलाम और विदिशा मेडिकल कॉलेज भवन का निर्माण कार्य पूर्ण

मेडिकल काउंसिल आॅफ इण्डिया द्वारा सत्रों की दी अनुमति 

भोपाल। गोंडवाना समय।
मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम ने पिछले 6 माह में शहडोल, रतलाम और विदिशा मेडिकल कॉलेज भवन निर्माण कार्य को पूरा किया है। इन कॉलेजों में मेडिकल काउंसिल आॅफ इण्डिया द्वारा सत्रों की भी अनुमति दे दी गई है। लोक निर्माण मंत्री श्री सज्जन सिंह वर्मा ने प्रदेश में चल रहे निगम के अन्य सभी कार्यों को तय समय-सीमा में पूरा किये जाने के निर्देश दिये हैं। निगम ने शहडोल मेडिकल कॉलेज में 100 सीट एवं 500 बिस्तरों की क्षमता विकसित करने पर 303 करोड़ रुपये खर्च कर कार्य पूरा किया है। शहडोल मेडिकल कॉलेज को मेडिकल काउंसिल आॅफ इण्डिया द्वारा प्रथम सत्र की अनुमति भी प्राप्त हो गई है।
रतलाम मेडिकल कॉलेज में 150 सीट एवं 750 बिस्तरों की क्षमता विकसित की गई है। निगम ने इस पर 295 करोड़ रुपये खर्च किये हैं। मेडिकल कॉलेज को मेडिकल काउंसिल आॅफ इण्डिया से द्वितीय सत्र की अनुमति प्राप्त हो गई है। विदिशा मेडिकल कॉलेज में 150 सीट और 750 बिस्तरों की क्षमता विकसित करने पर 356 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं। कॉलेज भवन का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। इस कॉलेज को भी द्वितीय सत्र की अनुमति प्राप्त हुई है।

सौर उर्जा संयंत्रों से मेडिकल कॉलेजों को जगमाने का प्रयास

मध्यप्रदेश के आठ मेडिकल कॉलेजों में सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिये करार पर हस्ताक्षर किये गये। इन सभी मेडिकल कॉलेज में संयंत्र स्थापना से पहले साल में ही 12 करोड़ रुपये की बचत होगी। प्रदेश की चिकित्सा
शिक्षा मंत्री डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री हर्ष यादव की उपस्थिति में फरवरी माह 2019 में यह करार किया गया था। इसके तहत प्रदेश के 8 मेडिकल कॉलेज छिन्दवाड़ा, इंदौर, भोपाल, विदिशा, शिवपुरी, रतलाम, शहडोल और जबलपुर में सौर संयंत्रों की स्थापना होने से लाभ मिलेगा। नवी और नवीकरणीय ऊर्जा विभाग ने रूफटॉप सौर संयंत्र लगाने की परियोजना को रेस्को पद्धति के माध्यम से लोकप्रिय बनाने की पहल की है। इस पद्धत्ति में भवनों पर बिना पूंजीगत निवेश के सस्ती बिजली उपलब्ध करवाने के लिये संयंत्र स्थापित किया जाता है। डॉ. साधौ ने करार होने के पश्चात कहा था कि नदियों में जल की उपलब्धता में कमी और बिजली की महंगी दरों को देखते हुए सौर ऊर्जा की उपयोगिता बढ़ रही है। परियोजना को दो चरण में क्रियान्वित की जाने की योजना बताया था। वहीं करार होने के पश्चात प्रथम चरण में सागर, ग्वालियर और रीवा का चयन किया गया था उनका कहना था कि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और हैदराबाद के टेपसोल सोलर पॉवर वेंचर लिमिटेड द्वारा मात्र एक रुपए 63 पैसे यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध करवाने का अनुबंध हुआ है। करार होने के पश्चात मध्य प्रदेश के नवी एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री हर्ष यादव का कहा था कि क्लीन और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में मध्यप्रदेश मॉडल बनकर उभर रहा है। मेडिकल कॉलेजों में सस्ती सुलभ बिजली उपलब्ध करवाने की पहल से अगले 25 वर्ष में लगभग 300 करोड़ रुपए की बचत संभव होगी। करार होने के पश्चात नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव मनु श्रीवास्तव ने बताया था कि विश्व बैंक और इंटरनेशल सोलर अलायंस के सहयोग से मध्यप्रदेश में लागू परियोजना का अन्य राज्य अनुसरण करना चाहते हैं। सभी मेडिकल कॉलेज में संयंत्र स्थापना से पहले साल में ही 12 करोड़ की बचत हो सकेगी।

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