Saturday, September 14, 2019

शिक्षक की पहल से पढ़ेंगी बेटियां-बढ़ेंगी बेटियां, स्कूल में मिला प्रवेश

शिक्षक की पहल से पढ़ेंगी बेटियां-बढ़ेंगी बेटियां, स्कूल में मिला प्रवेश 

बेटी बचाव-बेटी बढ़ाओं अभियान मेें निभाया शिक्षक ने अपना कर्तव्य 

शिक्षा के अधिकार से वंचित दो बेटियां, स्कूल में अब पढ़ सकेंगी 

सिवनी। गोंडवाना समय।
इतिहास इस बात का साक्षी है कि दुनिया के महान शिक्षाविदों के संदेशों के अनुसार शिक्षा की क्या महत्वता है, मानव जीवन में शिक्षा क्यों अनिवार्य है और शिक्षित नागरिक कैसे अपना, परिवार, समाज, देश का नाम गौरवांवित कर सकता है । ऐसी अनेक शिक्षाप्रद-प्रेरणादायक बातों का उल्लेख हमें दुनिया के महान शिक्षाविदों के इतिहास के पढ़कर संदेश मिलता है। इसलिये शिक्षा प्राप्त करने को अनिवार्य बताया गया है। वहीं देश में सरकार, शासन-प्रशासन द्वारा भी पूर्णतय: यह प्रयास किया जा रहा है कि कोई भी शिक्षा के अधिकार से वंचित न हो पावे इसके लिये शिक्षा का अधिकार अधिनियम भी बनाया गया है ताकि शिक्षा प्राप्त करने में निर्धनता, गरीबी शिक्षा प्राप्त करने में कहीं भी आड़े न आ पाये।

हालांकि यह तो हुई सरकार, शासन-प्रशासन की बात क्योंकि योजना बनाना, लागू कराना और उसे क्रियान्वयन कराने में अपनी भूमिका निभाते है लेकिन कई बार ऐसी परिस्थिति आ जाती है कि सामाजिक दायित्व या कर्तव्य निभाने में नागरिकों को आगे आने की विशेष आवश्यकता होती है क्योंकि सरकार की कल्याणकारी योनजाओं के बाद भी कुछ बच्चे पारिवारिक परिस्थिति या नियमों के चलते सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ प्राप्त करने से वंचित रह जाते है और यही कारण होता है कि वह विकास से पिछड़ जाते है । ऐसे समय में शिक्षित नागरिकों की जिन्होंने स्वयं तो शिक्षा प्राप्त कर लिया है उनकी कर्तव्यपूर्ण जिम्मेदारी व जवाबदारी बन जाती है वे ऐसे बच्चों को लाभ दिलाने के लिये आगे आकर उन्हें शिक्षित करने में नि:स्वार्थ भावना से अपनी भूमिका निभाये। क्योंकि शिक्षा के अधिकार सें वंचित एक बच्चे को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ देना किसी युग निर्माण से कम नही है। ऐसा ही अनुकरणीय प्रयास अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिकारी/कर्मचारी संघ (अजाक्स ) बरघाट तहसील अध्यक्ष व शिक्षक श्री कोमल गढ़पाल द्वारा, डीईओ, बीआरसी और स्कूल के स्टॉफ के सहयोग से दो छात्राओं को शाला में प्रवेश दिलाकर किया है।

पिता की मृत्यू के बाद मां के साथ आना पड़ा ननिहाल   

हम आपको बता दे कि शिक्षक श्री कोमल गढ़पाल की जानकारी में यह बात सामने आई कि सिवनी मुख्यालय में स्थित कबीर वार्ड डूण्डासिवनी में निवास करने वाले एक ही परिवार की दो छात्राएं स्कूल नहीं जा रही है और बेटी बचाव-बेटी बढ़ाओं अभियान के बाद भी वह स्कूल में पढ़ने जाने से वंचित थी तो फिर शिक्षक श्री कोमल
गढ़पाल ने दोनो बेटियों के परिजनों से संपर्क किया और बच्चों के शैक्षणिक अध्यापन में आने वाली कठिनाइयों के बारे में जानकारी लिया तो पता चला कि पिता के आसामयिक मूत्य उपरांत 3 बेटियो के पालन पोषण व उनकी सुरक्षा के चलते माता को बच्चों सहित अपने मायके सिवनी में पलायन करना पड़ा।

मां को किया प्रेरित कितनी महत्वपूर्ण व अनिवार्य है शिक्षा प्राप्त करना        

स्कूल में प्रवेश हेतु आवश्यक दस्तावेजों व संसाधनों के अभाव में आगे बच्चों को ना पढ़ाने का मन बना चुकी मां को बच्चों के शैक्षणिक अध्यापन के महत्व को समझाते हुए आगे बच्चों को पढ़ाने के लिये शिक्षक श्री कोमल गढ़पाल द्वारा प्रेरित किया गया। इस कार्य के लिये शिक्षक श्री कोमल गढ़पाल द्वारा सिवनी जिला शिक्षा अधिकारी श्री जी.एस. बघेल से उक्त समस्या को लेकर संपर्क किया गया।
विषय की गम्भीरता अनुरूप तत्परता से सिवनी बीआरसी का नंबर उपलब्ध कराते हुये संपर्क करने को कहा गया। वहीं उन्होंने सिवनी बीआरसी श्री राहुल प्रताप सिंह की मदद से शासकीय माध्यमिक शाला डूण्डासिवनी में दोनों छात्राओं जिनमें कु पलक का कक्षा 6 वीं में एवं कु नैना का कक्षा 3 री में दाखिला कराया गया।

शिक्षण सामग्री भी कराया उपलब्ध  

दो छात्रायें जो कि स्कूल जाने से वंचित हो रही थी उन्हें स्कूल में प्रवेश दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शिक्षक श्री कोमल गढ़पाल द्वारा प्रवेश के साथ ही छात्राओं को तत्काल कापियां एवं शैक्षणिक आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई गईं एवं प्रधान पाठिका द्वारा पुस्तकें वितरित की गईं।

डीईओ, बीआरसी व स्कूल प्रबंधन का मिला सहयोग      

शिक्षक एवं अजाक्स तहसील अध्यक्ष श्री कोमल गढ़पाल ने गोंडवाना समय समाचार पत्र से चर्चा करते हुये बताया कि शिक्षा के अधिकार से वंचित दो छात्राआें को स्कूल में प्रवेश दिलाने में मेरा प्रयास मेरा कर्तव्य था
लेकिन इस इस पुनीत कार्य में सहयोग प्रदान करने के लिए जिला शिक्षाधिकारी श्री जी. एस. बघेल, बीआरसी श्री राहुल प्रताप सिंह एवं स्कूल की प्रधानपाठिका श्रीमती शशिकला काकोड़िया व समस्त स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान देकर अपनी जिम्मेदारी व जवाबदारी निभाया।

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