Saturday, November 2, 2019

मुख्यमंत्री-मंत्री जी आपके अफसर ऐसी शर्त रखेंगे तो कैसे बढ़ेंगे दलित आदिवासी ?

मुख्यमंत्री-मंत्री जी आपके अफसर ऐसी शर्त रखेंगे तो कैसे बढ़ेंगे दलित आदिवासी ?

आपके अफसरों की शर्तें तो पूंजीपति व्यापारियों को दे रही बढ़ावा, भर रही तिजोरी

मुख्यमंत्री कमल नाथ जहां एक ओर आदिवासी दलित हितेषी होने का दावा ठोंकते है वहीं उनके अफसर सरकारी विभागों के तहत निकलने वाले टेंडरों में ऐसी शर्तें बना रहे है कि आदिवासी दलित वर्ग का व्यक्ति उसमें भाग लेने के पहले ही प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाने के लिये मजबूर है। मध्य प्रदेश के वातानुकूलित कमरों में बैठने वाले अफसर आदिम जाति कल्याण विभाग के तहत ऐसे नियम शर्तें बना रहे है कि आदिवासी दलित वंचित हो जाये। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ जी व आदिम जाति कल्याण मंत्री श्री ओमकार मरकाम पूजिपंति व्यापारियों को बढ़ावा देने वाली ऐसी शर्तों पर संज्ञान लेंगे। 
लेखिका 
श्याम कुमारी धुर्वे 
समाजसेविका डिंडौरी मध्य प्रदेश  
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ कहते हैं कि वह आदिवासी, दलित के हितैषी हैं। वहीं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ आदिवासी बाहुल्य ग्रामों के लिए आदिम जाति कल्याण मंत्रालय व विभाग के माध्यम से मुख्यमंत्री मदद योजना के तहत आदिवासियों को जन्म व मृत्यू संस्कार के लिये बर्तन व अन्य सामग्री उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिये शासन प्रशासन व आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्तों के द्वारा सामग्री की खरीदी किया जाना है। आदिवासी विकास विभाग के तहत संचालित इस योजना को क्रियान्वयन करने के लिये मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ व विभागीय आदिम जाति कल्याण मंत्री श्री ओमकार मरकाम आपकी सरकार में ऊंचे पदों पर वातानुकूलित कमरों में बैठकर आदिवासी के कल्याण के लिये योजना को क्रियान्वित कराने के लिये मुख्यमंत्री मदद योजना केतहत बर्तन क्रय करने के लिये जो नियम बनाये है उससे यह स्पष्ट हो रहा है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार में पूंजीपति व्यापारियों को बढ़ावा दिया जा रहा है वहीं छोटे व्यापारियों को या छोटे-छोटे धंधा व्यापार-व्यावसाय चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण करने वाले दुकानदारों का शोषण किया जाकर उनकी रोजी रोटी छीनने का काम बेधड़क बेखौफ होकर शासन प्रशासन के अधिकारियों के द्वारा किया जा रहा है। इससे मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ जी आपकी मंशा भी स्पष्ट हो रही है कि आप युवाओं के स्वरोजगार प्रति कितने संवेदनशील है।

अब ऐसी स्थिति में कैसे आदिवासी दलित अपना आर्थिक विकास कर पायेंगे

शासन प्रशासन के अधिकारियों पूंजीपति व्यापारियों की कठपुतली बनकर उनके ईशारों पर काम करते हुये विभाग में सामग्री की खरीदी होने वाले या अन्य कार्यों के लिये नियमों को बना रहे है अब ऐसी स्थिति में कैसे आदिवासी दलित अपना आर्थिक विकास कर पायेंगे । मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ आप आदिवासी दलितों के विकास के साथ साथ उन्हें स्वरोजगार के माध्यम से उनका आर्थिक विकास करने की बात तो कर रहे है लेकिन आपकी सरकार में वातानुकूलित कमरों में बैठकर योजना चलाने वाले अफसर सिर्फ पूंजीपति व्यापारियों को ही बढ़ाने का काम कर रहे है । जिस तरह से आपके सरकारी अफसर टेंडर के लिये नियम थोप रहे है उस स्थिति में तो आदिवासी दलितों का आर्थिक विकास हो पाना नामुंकिन है वहीं सरकारी अफसरों की नीति नियम के चलते आदिवासी दलित वर्ग का व्यक्ति व्यापारिक हो या अन्य क्षेत्रों में शासकीय विभागों में टेंडर प्रक्रिया में प्रतिर्स्पधा करने लायक स्थिति में नियमों के बंधन के चलते सिरे से खारिज कर दिये जा रहे है। ऐसी परिस्थिति में आदिवासी दलित वर्ग का व्यक्ति कैसे काम कर पायेगा व कैसे आगे बढ़ पायेगा । मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ जी यदि आपकी सरकार भी आदिवासी दलितों को गरीबी के दलदल से बाहर निकलने के लिये अवसर प्रदान नहीं करेगी तो आपकी हितेषी होने की बातें झूठी है।

आपके अफसर तो पूंजीपतियों की तिजोरी भरने में हो जायेंगे सफल

आदिवासी और दलित जो स्वरोजगार में लगे हुये छोटे-छोटे व्यापार-व्यावसाय सेवा का काम कर रहे है वहीं जो बेरोजगार है वे बैंक से या सरकार की योजना के तहत लोन लेकर कुछ व्यापार-व्यावसाय कुछ करना चाहते हैं। उनके लिये बहुत सारे नियम कानून कायदे सरकार और सरकारी अफसरों ने बनाया है। वहीं आपको बता दे कि मुख्यमंत्री मदद योजना के तहत जो नियम कानून कायदे कांग्रेस सरकार के अफसरों ने बनाये है उसमें जो शर्तें रखी हैं उसमें 3 साल का जीएसटी पात्रताधारी होना चाहिए वहीं उसके साथ ही उसका टर्न ओवर लगभग 30 से 40 लाख रूपये तक होना चाहिए। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ और आदिम जाति कल्याण मंत्री श्री ओमकार सिंह मरकाम जी स्वयं आप भी जानते है कि पूंजीपति व्यापारियों को बढ़ावा देने वाली इन शर्तों का पालन आदिवासी दलित समाज वर्ग व्यक्ति किसी भी कीमत पर नहीं कर पायेंगे। वहीं इन शर्तों में कहीं भी अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति वर्ग को 30 प्रतिशत अनिवार्य या केंद्र सरकार की 5 प्रतिशत की अनिवार्य शर्त को कहीं नहीं जोड़ा जा रहा है। अब यदि मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ जी और आदिम जाति कल्याण मंत्री श्री ओमकार मरकाम जी आप अगर वाकई आदिवासी और दलितों की हितैषी हैं ऐसी शर्तों को तत्काल हटाया जाना चाहिये नहीं तो आपकी सरकार के अफसर तो पूंजीपतियों की तिजोरी भरने सफल हो जायेंगे ।

व्यापारिक क्षेत्र में कैसे बढ़ेंगे आदिवासी दलित

जिस तरह सरकारी अफसर नियम कानून कायदे बना रहे है वह पूजिपति व्यापारियों को फायदा पहुंचाने वाला है वहीं जो कम लागत में या बैंकों से सहायता से लेकर व्यापारिक क्षेत्र में मेहनत करके आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे है उन्हें अवसर नहीं मिल पायेगा क्योंकि मध्य प्रदेश में दलित आदिवासी आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है लेकिन व्यापार करना चाहते है लेकिन सरकार और सरकारी अफसर जो नियम बना रहे है वह व्यापारिक क्षेत्र में आदिवासी दलितों को आगे बढ़ने में अड़ंगा लगा रहे है । अब आप ही विचार करें कि कैसे बिजनेस सेक्टर में यह आगे बढ़ेंगे यह अपने आप में एक सवाल पैदा करता है।

एकलव्य विद्यालय व छात्रावासों के मेस टेंडर में भी यही शर्त अफसरों की भर रही जेब

आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत एकलव्य विद्यालय व अन्य प्रमुख छात्रावासों में आउटसोर्स से मेस संचालन के लिये निकाले जा रहे टेंडर में भी मध्य प्रदेश सरकार के अफसर ऐसी नीति नियम कानून कायदे कहें या शर्तें बना रहे है जिससे पूंजीपति हॉटल संचालक कहें या बड़े व्यापारियों को टेंडर मिल रहा है लेकिन वही आदिवासी दलित वर्ग के व्यक्ति जो इस रोजगार से जुड़े हुये या व्यापार कर रहे है उन्हें मेस के टेंडर में लिखी शर्तों को पढ़कर ही बाहर होना पड़ रहा है। जिससे एकलव्य विद्यालय या छात्रावासों में भी आदिवासी दलित वर्ग को टेंडर नहीं मिल पा रहा है। मंडला एकलव्य विद्यालय में लगभग 50 लाख का टर्न ओवर मांगा गया है वहीं अन्य स्थानों पर भी 30-40 लाख रूपये तक टर्न ओवर मांगा रहा है और साथ में 5 वर्ष तक का अनुभव भी मांगा जा रहा है ऐसी शर्तों के आधार पर तो मध्य प्रदेश में दलित आदिवासी को शायद ही कभी अवसर मिलेगा। वहीं सरकार हमेशा महिलाओं की सशक्तिकरण की बात भी करती है लेकिन ऐसे स्थानों पर स्वसहायता समूह या महिलाओं की समितियों को भी कार्य नहीं दिया जा रहा है।
लेखिका 
श्याम कुमारी धुर्वे 
समाजसेविका डिंडौरी मध्य प्रदेश  

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