Monday, November 11, 2019

शराबबंदी के लिए जीवन पर्यंत तक जनजाति आयोग नंदकुमार साय ने खाना छोड़ दिया नमक

शराबबंदी के लिए जीवन पर्यंत तक जनजाति आयोग नंदकुमार साय ने खाना छोड़ दिया नमक 

जनगणना में आदिवासियों की जनंसख्या अपने आप कम होना चिंता का विषय 

नवाखाई भेटघाट का विराट आयोजन झाड़सुगुड़ा उड़ीसा में संम्पन्न

उड़ीसा/झाड़सुगुड़ा। गोंडवाना समय। 
गोंडवाना गोंड महासभा उड़ीसा एवं सम्मिलित आदिवासी समाज झाड़सुगुड़ा के तत्वाधान में नवाखाई भेटघाट कार्यक्रम का विराट आयोजन झाड़सुगुड़ा उड़ीसा में हजारों की तादाद में आदिवासी समाज के उपस्थिति में मुख्य अतिथि के रूप में अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नंदकुमार साय जी, श्री हेमानंद विश्वाल जी पूर्व मुख्यमंत्री उड़ीसा की अध्यक्षता एवं अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष आर. एन. ध्रुव, उड़ीसा सुंदरगढ़ के विधायक श्रीमती कुसुम टेटे, विधायक सुंदरगढ़, रविंद्र नायक पूर्व विधायक, कुचिन्दरा, गुरु चरण नायक पूर्व विधायक झारखंड, पूर्व विधायक वृंदावन मांझी लाईकेरा, महेंद्र नायक प्रदेश अध्यक्ष गोंडवाना गोंड महासभा उड़ीसा, सच्चिदानंद गोंड़ महासचिव पश्चिम बंगाल, बूंदे धुर्वा अध्यक्ष, प्रभाकर उरांव महासचिव, फकीरा नायक के विशेष उपस्थिति में संपन्न हुआ।

समाज को नशामुक्ति की ओर देना होगा ध्यान 

इस अवसर पर उड़ीसावासियों को नवाखाई भेंटघाट की बधाई देते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री नंदकुमार साय जी ने कहा कि समाज को नशा मुक्ति की ओर ध्यान देना होगा। आगे उन्होंने उपस्थित सगा समाज को संबोधित करते हुये कहा कि जसपुर क्षेत्र के गांव में 1970 के दशक में ऐसे ही सभा में शराब बंदी पर लोगों से अपील कर रहा था एक सज्जन ने सभा में उठकर मुझे कहा की हम सब शराब छोड़ सकते हैं लेकिन क्या आप नमक खाना छोड़ सकते हैं। मैंने कहा कि  यदि मेरे नमक नहीं खाने से समाज  नशा मुक्त हो सकता है तो मैं उसी दिन संकल्प लिया कि आज से मैं जीवनपर्यन्त नमक का सेवन नहीं करूंगा और आज तक कभी नमक नहीं किया।

पर्यावरण सुरक्षा के लिए आदिवासी समाज कर रही अनुकरणीय कार्य 

उन्होंने कहा कि दिल्ली सहित देश के कई हिस्से पर्यावरण प्रदूषण से जूझ रहे है। आज देश में पर्यावरण सुरक्षा के लिए आदिवासी समाज अनुकरणीय कार्य कर रही है इसे सतत जारी रखने की जरूरत है। पूर्व मुख्यमंत्री श्री हेमानंद बिश्वाल जी ने कहा कि आदिवासी समाज को पूर्वजों द्वारा बनाए गए प्रचलित प्राचीन परंपराओं को बचा कर रखना होगा।

सुंदरगढ़, मंडला, बल्लारशाह सहित अन्य गढ़ों में हमाने पूर्वजों ने किया शासन 

इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुये श्री आर एन ध्रुव ने कहा कि देश में ना कोई महामारी, ना कोई अकाल, ना कोई प्रलय और ना कोई भारी  दुर्घटना हुई है। इसके बावजूद भी 2011 की जनगणना के अनुसार देश के विभिन्न हिस्सों में आदिवासियों की जनसंख्या कम हो रही है जो अत्यंत चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज उड़ीसा के सुंदरगढ़, कोलाबीरा, मध्य प्रदेश के गढ़ मंडला, महाराष्ट्र के बल्लारशाह सहित पूरे देश में अपने बाजुओं के बल पर शासन किए। समय के साथ आज भी समाज वर्तमान में शिक्षा रूपी अस्त्र को अपनाकर, संगठित होकर सत्ता में भागीदार हो सकता है। कार्यक्रम में धमतरी जिला के सांस्कृतिक कार्यक्रम राष्ट्रीय रंग तरंग केकराखोली, सुंदरगढ़ नृत्य की प्रस्तुति मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। उक्त कार्यक्रम में वनमाली नेटी, भुनेश्वर सिदार, श्रीमती गीता नेताम, श्रीमती रुकमणी ध्रुव, श्रीमती सरस्वती ठाकुर, गोंडवाना स्वदेश के संपादक रमेश ठाकुर छत्तीसगढ़, नंद कुमार मंडावी पश्चिम बंगाल सहित उड़ीसा के समाज प्रमुखों के उपस्थिति में संपन्न हुआ।

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