Friday, November 29, 2019

आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी को बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध-कमल नाथ

आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी को बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध-कमल नाथ 

कलेक्टर भी नहीं दे सकते इसकी अनुमति 


कैबीनेट का निर्णय बताकर मध्य प्रदेश में बीते दिनों से समाचार पत्रों की सुर्खियां बने आदिवासी की जमीनों की अनुमति के समाचारों के बाद मध्य प्रदेश व देश भर के आदिवासी समाज के विरोध स्वरूप ज्ञापन सौंपा जाकर मांग की जा रही थी और आदिवासी समाज में आक्रोश भी बढ़ रहा था इस मामले में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी को बेचने की अनुमति देने संबंधी जो भ्रम और अफवाह फैलाया जा रहा हे वह सरारत गलत है। जबकि मध्य प्रदेश सरकार ने जो सामान्य सा बदलाव किया है वह यह है कि अनुसूचित क्षेत्रों में गैर आदिवासी द्वारा गैर आदिवासी की जमीन खरीदने के बाद डायवर्सन के लिए जो समय-सीमा थी, उसे समाप्त किया गया है।

भोपाल। गोंडवाना समय।
मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा है कि अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को बेचने की अनुमति देने संबंधी जो भ्रम और अफवाह फैलायी जा रही है, वह सरासर गलत है। राज्य शासन ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है। मध्य प्रदेश में आज भी आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी को बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध है। आदिवासियों के सभी हितों का संरक्षण करने के लिए सरकार कटिबद्ध है। मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा कि यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि मध्यप्रदेश सरकार ने अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को बेचने की अनुमति दे दी है। यह अफवाह निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा फैलायी जा रही है, जो न केवल असत्य है बल्कि आधारहीन भी है। मध्यप्रदेश में आदिवासियों की जमीन किसी गैर आदिवासी को बेचने की अनुमति नहीं हैं और न ही इस प्रावधान में कोई बदलाव किया गया है।

मध्यप्रदेश सरकार आदिवासियों के समस्त हितों का संरक्षण करने के लिए है कटिबद्ध 

मध्य प्रदेश के अनुसूचित आदिवासी क्षेत्रों में भू-राजस्व की संहिता की धारा 165 के अनुसार किसी आदिवासी की जमीन किसी गैर आदिवासी को बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध है और‍ जिले के कलेक्टर भी इसकी अनुमति नहीं दे सकते। मध्यप्रदेश सरकार आदिवासियों के समस्त हितों का संरक्षण करने के लिए कटिबद्ध है और ऐसा कोई कदम कभी नहीं उठायेगी, जो प्रदेश के आदिवासियों के हित में न हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने जो सामान्य सा बदलाव किया है और जिसको लेकर भ्रम और अफवाह फैलायी जा रही है वह सिर्फ यह है कि अनुसूचित क्षेत्रों में गैर आदिवासी द्वारा गैर आदिवासी की जमीन खरीदने के बाद डायवर्सन के लिए जो समय-सीमा थी, उसे समाप्त किया गया है।

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