Monday, December 16, 2019

मासूम के बलात्कारी को फांसी देने गूंज उठी आवाज

मासूम के बलात्कारी को फांसी देने गूंज उठी आवाज 

सर्वसमाज ने सौंपा ज्ञापन

बंडोल थाना के अंतर्गत नेशनल हाइवे सेवन पर फोरलेन सड़क से लगे हुए गांव की छह साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले बलात्कारी को फांसी देने की गूंज उठने लगी है। सोमवार को सर्वसमाज द्वारा शहर के कचहरी चौक में एकत्रित होकर बलात्कारी को फांसी देने की आवाज बुलंद हुई। हाथों में तख्ती और नारे में एक ही गूंज थी कि मासूम के साथ दुष्कर्म को किसी भी तरह से बक्शा न जाए और उसे फांसी दी जाए ताकि लोगों को सबक मिल सके। कचहरी चौक में धरना-प्रदर्शन के बाद सभी सर्वसमाज के एकत्रित लोगों द्वारा रैली के माध्यम से कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर महामहिम राष्ट्रपति, महामहिम राज्यपाल, माननीय न्यायाधीश, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश के नाम जिला प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। 
सिवनी। गोंडवाना समय।
आदिवासी बाहुल्य जिला सिवनी के बण्डोल थाना अंतर्गत ग्राम में आदिवासी नाबालिग बालिका 6 वर्ष की मासूम के साथ घटी शर्मशार कर देने वाली घटना से आदिवासी समाज ही नहीं सर्वसमाज भी दु:खी व चिंतित है और ऐसे घिनौने कृत्य करने वाले आरोपी को फांसी की सजा दिये जाने एवं अन्य मांगों को लेकर सर्वसमाज सिवनी के द्वारा दिनांक 16 दिसंबर 2019 दिन सोमवार को उपस्थित नागरिकों द्वारा त्वरित व न्यायोचित कार्यवाही को लेकर ज्ञापन सौंपा गया।

किसी भी वर्ग की बच्ची के साथ न हो ऐसा कृत्य

सर्वसमाज के बैनर तले सोमवार को सौंपे गये ज्ञापन में उपस्थित समस्त समाजिक पदाधिकारियों, नागरिकों व महिलाओं ने बुलंद आवाज में यह कहा कि यह सिर्फ आदिवासी समाज की ही बात नहीं है किसी भी समाज की बेटी या महिला हो ऐसा घिनौना कृत्य करने वालों को फांसी की सजा दिया जाना चाहिये। सोमवार को सौंपे गये ज्ञापन के दौरान सरकार को इसके लिये कड़े कानून बनाने की आवश्यकता है वहीं नाबालिग के मामले में फांसी दिये जाने का कानून बनाने की मांग किया। 

10 लाख रूपये आर्थिक सहायता की मांग

सर्वसमाज के बैनर तले एकत्र हुये नागरिकों ने ज्ञापन में प्रमुख रूप से बताया कि 13 दिसंबर 2019 दिन शुक्रवार को आदिवासी बाहुल्य जिला सिवनी के बण्डोल थाना अंतर्गत एक ग्राम में 6 वर्ष की नाबालिग आदिवासी मासूम बच्ची के साथ में गांव के ही नाबालिग आरोपी के द्वारा जबरदस्ती आदिवासी मासूम नाबालिग बच्ची को अपनी गोद में उठाकर ले जाकर नाबालिक बच्ची के साथ घिनौना कृत्य, दरिंगदगी पूर्ण यौन शोषण, व्याभिचार, अन्याय-अत्याचार किया गया है, जिससे मासूम बच्ची को शारीरिक रूप से अत्याधिक तकलीफ हुई है और उसके साथ भयानक अमानवीयता के साथ अनैतिक कृत्य किया गया है, ऐसे कृत्य करने वाले आरोपी को फांसी की सजा दिये जाने की मांग किया है। वहीं आदिवासी पीड़ित परिवार को तत्काल 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान किये जाने की मांग किया है।

पाक्सों जैसे मामले में बण्डोल पुलिस ने बरती लापरवाही 

सर्वसमाज द्वारा सौंपे गये ज्ञापन में उन्होंने उक्त प्रकरण में बण्डोल थाना अंतर्गत आदिवासी मासूम बालिका के साथ हुये घिनौने कृत्य पर बण्डोल पुलिस थाना द्वारा भी गंभीर लापरवाही बरती गई है, हालांकि पुलिस प्रशासन ने प्रकरण दर्ज कर कानूनी कार्यवाही किया है जो कि संतुष्टीपूर्वक कार्यवाही भी है लेकिन बण्डोल पुलिस थाना द्वारा गंभीर व संवेदनशील मामले में घोर लापरवाही भी बरती गई, बण्डोल पुलिस के द्वारा आरोपी को घटना के दूसरे दिन गिरफतार किया गया है जबकि बण्डोल पुलिस को घटना के दिन ही आरोपी की जानकारी दी गई थी लेकिन बण्डोल ने आरोपी की गिरफतारी में देर किया वहीं 13 दिसंबर 2019 दिन शुक्रवार को घटना के दिन 100 डायल में आदिवासी मासूम बालिका व उसके परिजनों के साथ लाकर इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय में भर्ती करवा दिया था और प्राथमिक उपचार के बाद बण्डोल पुलिस ने पीड़िता व परिजनों को बिना किसी सुरक्षा के वहीं छोड़ कर चले गये थे और दूसरे दिन फोन पर बण्डोल पुलिस द्वारा नाबालिग पीड़िता के परिजनों को सूचित किया था कि हम शनिवार 14 दिसंबर 2019 को सुबह 8 बजे तक चिकित्सालय पहुंच जायेंगे आप वहीं पर मिलना इसके बाद भी बण्डोल पुलिस 14 दिसंबर 2019 को दोपहर में लगभग 2 बजे तक चिकित्सालय नहीं पहुंची थी जो कि बण्डोल पुलिस थाना की ऐसे संवेदनशील घटनाओं में लापरवाही स्पष्ट रूप से उजागर होती है
यदि इस बीच में नाबालिग पीड़ित बच्ची के साथ कोई अनहोनी घटना घट जाती तो फिर इसका जिम्मेदार कौन रहता अर्थात बण्डोल पुलिस की लापरवाही और गंभीर प्रकरण पर गैर जिम्मेदारी पूर्वक कार्य के लिये बण्डोल पुलिस थाना प्रभारी व संबंधित कर्मचारियों पर निलंबन की कार्यवाही की जावे एवं भविष्य में ऐसी घटनाओं पर संवेदनशीलता के साथ गंभीरता के साथ पुलिस अपना कर्तव्य निभाये इस संबंध दिशा निर्देश जारी किये जाने की मांग किया है।

आगंनबाड़ी कार्यकर्ता को बर्खास्त कर कानूनी कार्यवाही की मांग 

बण्डोल थाना अंतर्गत नाबालिग आदिवासी बालिका के साथ हुये घिनौने कृत्य को दबाने एवं पुलिस में रिपोर्ट शिकायत न दर्ज करने के लिये रूपया पैसा लेकर समझौता करने के लिये दबाव बनाने वाली आरोपी की नानी जो महिला बाल विकास विभाग के अंतर्गत आगंनबाड़ी कार्यकर्ता है उसके द्वारा 6 वर्ष की मासूम के साथ हुये अत्याचार, यौन शोषण को छिपाने व दबाने के लिये रूपया पैसा दिये जाने की पेशकश करते हुये दबाव बनाया गया है जो कि महिला बाल विभाग के अंतर्गत चल रही योजनाओं के विपरीत कार्यप्रणाली है और महिला बाल विभाग के साथ साथ सरकार, शासन-प्रशासन की छबी धूमिल करने वाला कृत्य की श्रेणी में आता है अत: नाबालिग मासूम के साथ हुये यौन शोषण को लेकर रूपया पैसा देने का प्रलोभन देकर दबाव डालने वाली आगंनबाड़ी कार्यकर्ता को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने की कार्यवाही की जावे और कानूनी कार्यवाही करते हुये प्रकरण दर्ज किया जावे। 

गांव के पटेल पर भी कार्यवाही व सुरक्षा की मांग

बण्डोल थाना अंतर्गत आदिवासी नाबालिग मासूम बालिका के साथ हुये घिनौना कृत्य के मामले को रफा दफा करवाने, दबाने और समझौता करने के लिये गांव के ही पटेल के द्वारा पीड़ित परिजनों पर दबाव बनाया जा रहा था जो कि उचित नहीं है इसलिये ऐसे व्यक्तियों पर पुलिस कार्यवाही करें और पीड़ित परिजनों को पूर्णतय: सुरक्षा प्रदान करने की मांग की गई है।

अस्पताल की कार्यप्रणाली पर भी उठाये सवाल

बण्डोल थाना अंतर्गत आदिवासी मासूम नाबालिग बालिका के साथ हुये घिनौना कृत्य के बाद जब उपचार हेतु पीड़ित मासूम जिसे शारीरिक रूप से अत्याधिक तकलीफ हो रही थी उसे जिला चिकित्सालय में 100 डायल में पहुंचे बण्डोल पुलिस द्वारा भर्ती कराया गया तब प्राथमिक रूप से सही उपचार नहीं किया गया है, ऐसा पीड़िता के परिजनों का कहना है वहीं सबसे बड़ी लापरवाही यह भी है ऐसी संवेदनशील घटना की जानकारी जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन को नहीं दी गई थी । जबकि घटना के दूसरे दिन 14 दिसंबर 2019 को संभाग आयुक्त स्वंय जिला चिकित्सालय के निरीक्षण पर पहुंचे थे लेकिन उन्होंने भी पीड़िता से मिलना उचित नहीं समझा या ऐसी गंभीर घटना की वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी नहीं दी गई थी या फिर वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी होने के बाद गंभीर प्रकरण पर संज्ञान नहीं लिया गया यह जांच का विषय है। वहीं जिला चिकित्सालय में घटना के दूसरे दिन 14 दिसंबर 2019 को दिन शनिवार को जब यह मामला जनचर्चा का विषय बना उसके बाद जिला चिकित्सालय में पीड़ित बच्ची का घटना के दूसरे दिन दोपहर के बाद सही तरीके से उपचार करवाया गया है। यह जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन एवं अन्य चिकित्सकों की लापरवाही को उजागर करता है ऐसे मामलों में अस्पताल प्रशासन को गंभीरता बरतना चाहिये इस संबंध में जांच करवाकर विभागीय कार्यवाही की जाने की मांग किया है। 

विशेषज्ञों से उपचार की मांग 

पीड़ित मासूम बच्ची को वर्तमान व भविष्य में कहीं कोई तकलीफ दुख दर्द न हो इसको ध्यान में रखते हुये विशेषज्ञ महिला चिकित्सकों के द्वारा अच्छा उपचार करवाया जाये एवं इसका खर्च शासन द्वारा वहन किया जाये आदिवासी नाबालिग मासूम बालिका के साथ हुये घिनौना कृत्य के बाद परिवारजन अत्याधिक मानसिक रूप से प्रताड़ित हुये है ऐसी स्थिति में पीड़िता मासूम के परिजन में किसी एक सदस्य को शासकीय सेवा में दैनिक वेतन भोगी के रूप में सरकार द्वारा प्रदान किया जावे। ज्ञापन सौंपने के दौरान सैकड़ों की संख्या में नागरिकगण मौजूद रहे।

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