Sunday, January 19, 2020

सिवनी जिले के 3 आदिवासी मजदूरों की नागपुर में रेल ट्रेक पार करते समय हुई मृत्यू

सिवनी जिले के 3 आदिवासी मजदूरों की नागपुर में रेल ट्रेक पार करते समय हुई मृत्यू 

नागपुर में निमार्णाधीन विवि की इमारत में करते थे मजदूरी 

रेल ट्रैक पार करते वक्त मालगाड़ी की चपेट में आ गए

सिवनी। गोंडवाना समय।
सिवनी जिले के आदिवासी ब्लॉक धनौरा के ग्राम मुर्गहाईटोला के 3 आदिवासी की मृत्यू रेल ट्रैक पार करते समय मालगाड़ी के चपेट में आने से हो गई है। नागपुर संभाग के बोतीबुरी-उमरेड रेल लाइन पर बीते शुक्रवार की शाम मालगाड़ी की चपेट में आने से तीन मजदूरों की मौत हो गई। घटना तब हुई, जब तीनों रेलवे ट्रैक पार कर रहे थे। मृतक में तीनों लोग सिवनी जिले के धनौरा विकासखंड के ग्राम मुर्गहाईटोला के रहने वाले थे। ये तीनों सिवनी जिले से मजूदरी करने के लिये नागपूर में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की निमार्णाधीन इमारत में मजदूरी करते थे।

मृतकों में 1 युवती व 2 युवक शामिल

सिवनी जिले के धनौरा विकासखंड के ग्राम मुर्गहाईटोला के रहने वाले नागपुर में मजदूरी करने के लिये गये हुये थे जहां पर उनकी रेल ट्रेक पार करते समय मृत्यू हो गई। घटना के दौरान मृतकों की शिनाख्त में कमलेश पिता गोधनलाल मर्सकोले उम्र लगभग 20, कु. शारदा पिता शेखलाल सैयाम उम्र लगभग 19 और योगेश पिता अतर सिंग उइके उम्र लगभग 30 के रूप में की गई है। वहीं बुटिबोरी पुलिस थाने के निरीक्षक आसिफ शेख ने बताया-तीनों लोग यहां वरंगा गांव में रहते थे। शुक्रवार की शाम को वे साप्ताहिक सब्जी बाजार में जा रहे थे। रेल ट्रैक पार करते समय तीनों मालगाड़ी की चपेट में आने से मृत हो गये और मालगाड़ी की चपेट में आने के बाद उनके शरीर की क्या अवस्था रही होगी यह बताने की आवश्यकता नहीं है। 

तीनों का एक साथ हुआ अंतिम संस्कार, गांव में दु:ख का माहौल

मृतक योगेश उईके के चाचा बलराम उईके ने जो कि स्वयं भी नरसिंहपुर मजदूरी करने गये हुये थे वे भी घटना में मृत होने की खबर मिलने पर अपने गांव पहुंचे थे उन्होंने जानकारी देते हुये बताया कि गांव से लगभग 15-20 लोग मजदूरी पर काम करने के लिये नागुपर एकाध महिने पहले गये हुये थे। जिनमें से 2 युवक और 1 युवती के मालगाड़ी की चपेट में आ जाने से मृत्यू हो गई। गांव में घटना की जानकारी मिलने के बाद दु:ख का माहौल व्याप्त था वहीं तीनों मृतकों का गांव में शनिवार को देर शाम में एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। वहीं मृतक योगेश उईके पिता अतर सिंह उईके के परिवार में वे तीन भाई एक बहन, कमलेश मर्सकोले पिता गोधनलाल मर्सकोले के परिवार में दो भैया व दो बहन तो वहीं शारदा सैयाम पिता शेखलाल सैयाम दो बहने थी जिसमें वह बड़ी बहन थी।  

सभी लोग आ गये वापस

हम आपको बता दे कि सिवनी जिले धनौरा विकासखंड से नागपुर में काम करने गये सभी लोग घटना के बाद वापस आ गये है। घटना के बाद तीनों के शव और अन्य लोगों को निर्माण कार्य ठेकेदार ने गाड़ी करके गांव तक पहुंचाया। 

सरकारी योजनाओं की खुली पोल तो परिजनों को संबल व सहायता की आवश्यकता 

सरकार की अनेकों योजनायें के बाद भी आदिवासी बाहुल्य जिला सिवनी से अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिये आर्थिक समस्या के चलते हजारों की संख्या में मजदूरी करने के लिये नागपूर, नरसिंहपुर, जबलपुर, भोपाल सहित बड़े शहरों में जाते है या जिसे कहा जाये कि पलायन कर रोजी रोटी की व्यवस्था के लिये जाने के मजबूर है। शासन प्रशासन और सरकार के आंकड़ों में भले ही रोजगार दिये जाने का रिकार्ड अपना नंबर बढ़ा रहा हो लेकिन हकीकत यही है कि आदिवासी बाहुल्य जिला सिवनी के प्रत्येक ब्लॉक के अधिकांश ग्रामीण अंचलों से हजारों की संख्या में नौजवान बेटा-बेटी, सयाने भी अपने परिवार के भरण पोषण में आर्थिक सहायता के उद्देश्य से बड़े शहरों में काम करने के लिये जा रहे है। वहीं उन नेताओं के बड़बोलेपन और जनप्रतिनिधियों की पोल भी खोलने के लिये यह घटना काफी है जो वोट लेते समय रोजगार-स्वरोजगार की बड़ी बड़ी बातें करते है लेकिन सिवनी जिले की हालत विकासविहिन बनाने में मुख्य भूमिका निभा रहे है। सिवनी जिले के राजनैतिक विकलांग नेताओं के कारण सिवनी जिला प्रत्येक क्षेत्र में पिछड़ता ही जा रहा है और सुविधायें छिनती जा रही है। सरकार की योजनाओं के साथ साथ मतदाताओं के वोट पाकर जनप्रितनिधि का सुख भोगने वाले नेताओं की कलई खोलने के लिये यह दु:खद घटना काफी है। सिवनी जिले के धनौरा विकासखंड के ग्राम मुर्गहाईटोला से लगभग 15-20 लोग नागपूर मजूदरी करने गये उनमें से 2 युवक व 1 युवती की मालगाड़ी के चपेट में आने से दु:खद मृत्यू हो गई। हालांकि यह घटना एक ही गांव के 3 लोगों के साथ घटी है तो ये तीनों आदिवासी समाज से आते है और प्रशासनिक हलचल कहें, सामाजिक व राजनैतिक रूप से कहें या सोशल मीडिया में असरहीन ही नजर आई मालूम होती है। वहीं दु:खी परिवारजनों को सरकार की संबल कहें, नया सबेरा हो या अन्य सहायता की दरकार है। ऐसे समय में संवेदनशील सरकार के सरकारी मिशनरी प्रयास करें तो दु:खी परिवारजनों को लाभ पहुंचा सकते है यह उनके स्वविवेक पर निर्भर है।

1 comment:

  1. ओ हहहहहह ...😢😢😢काफ़ी दर्दनाक घटना हुई है। हमारे बच्चों को गांव में कोई रोजगार य्या पढ़ाई मुहैया कराई नही जाती हैं। इसीलिए बच्चे बाहर पलायन करते हैं तो उनके साथ लैंगिक शोषण किया जाता हैं।

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