Tuesday, April 14, 2020

केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण का वक्तव्य

केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण का वक्तव्य


नई दिल्ली। गोंडवाना समय।
केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण, नई दिल्लीऔर देश भर में इसकी शाखाओं के लिए20 मार्च, 2020 के बाद से कार्य करना संभव नहीं था क्योंकि कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन लागू हो गया था।वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी न्यायाधिकरण द्वारा काम करना संभव नहीं था क्योंकि सुविधाओं का अभाव था और सुविधाओं की खरीद करने में भी बाधाएं थी। भारत सरकार द्वारा लिए जाने वाले निर्णय के आधार पर 14 अप्रैल, 2020 के बाद, स्थिति की समीक्षा करने का प्रस्ताव था।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि लॉकडाउन को 3 मई 2020 तक के लिए बढ़ा दिया गया है और हॉटस्पॉट के अलावा अन्य स्थानों के लिए 20 अप्रैल, 2020 को समीक्षा की जाएगी। इस प्रकार वर्तमान स्थिति 20अप्रैल, 2020 तक जारी रहेगी और खंडपीठों द्वारा काम-काज करने सम्बन्धी निर्णय पर 20अप्रैल, 2020 को संभावित घोषणा के बाद विचार किया जायेगा।
न्यायाधिकरण की खंडपीठों के लिए अवकाश की अवधियाँ अलग-अलग है। एर्नकुलम बेंच के लिएयह अवधि मध्य अप्रैल से शुरू होती है जबकि इसके बाद बेंगलुरु बेंच की अवकाश अवधि शुरू होगी। उत्तर क्षेत्र में स्थित खंडपीठोंके अवकाश की अवधियों में इसी प्रकार का अंतर है। प्रधान खंडपीठ के लिएअवकाश-अवधि जून 2020 है। खंडपीठों द्वारा काम-काज शुरू करने के बाद वायरस के कारण हुए कार्यदिवसों की हानि की क्षतिपूर्ति के बारे में सम्बंधित बार एसोसिएशन के परामर्श के आधार पर निर्णय लिया जायेगा।
यदि अधिवक्ताओं की ओर से किसी खंडपीठ को किसी मामले की तत्काल सुनवाई के लिए अनुरोध किया जाता है, तो इसकी सूचना प्रधान रजिस्ट्रार को दी जाएगी, जो इस सम्बन्ध में आवश्यक निर्देश लेंगे औरजरूरत को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्य करेंगे।
प्रधान खंडपीठ और अन्य खंडपीठन्यूनतम कर्मचारियों के साथ काम करेंगे ताकि कर्मचारियों को किसी भी खतरनाक स्थिति का सामना न करना पड़े। खंडपीठों के रजिस्ट्रार कर्मचारियों की पहचान करेंगे और बारी-बारी से उन्हें कार्य सौंपेंगे। प्रशासनिक पक्ष के तत्कालिक मामलों को संबंधितपक्ष के साथ ऑनलाइन या फोन पर बात-चीत के माध्यम से निपटाया जाएगा।

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