Tuesday, April 28, 2020

हम नदी को माँ और वृक्षों को पूजनीय मानते हैं-मुख्यमंत्री

हम नदी को माँ और वृक्षों को पूजनीय मानते हैं-मुख्यमंत्री

आध्यात्मिक गुरुओं ने मध्यप्रदेश के आयुर्वेदिक काढ़े को बताया लाभकारी

कोरोना ने दिया है नवीन जीवन पद्धति अपनाने का संदेश 
धर्म और दर्शन भी इस संकट से निपटने में राह दिखा रहा हैं

भोपाल। गोंडवाना समय।
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को प्रमुख आध्यात्मिक गुरुओं और आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के सदस्यों के साथ 'कोविड-19 की चुनौतियाँ और एकात्म बोध' विषय पर विस्तार से चर्चा की। श्री चौहान ने कहा कि आज आचार्य शंकर एवं रामानुज की जयंती है।
           मध्यप्रदेश में ओंकारेश्वर में शंकराचार्य जी की प्रतिमा स्थापित करने और अन्य कार्यों से सभी न्यासी अवगत हैं। उन्होंने कहा है कि कोरोना ने एक चुनौती उत्पन्न की है। हम धैर्य, साहस और संयम से इसका मुकाबला कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में सभी जरूरी कार्रवाई की गई। धर्म और दर्शन भी इस संकट से निपटने में राह दिखा रहा हैं।

पशु-पक्षी, जीव-जंतु सब में एक ही आत्मा का दर्शन किया जा सकता है

मुख्यमंत्री ने कहा कोरोना संकट ने यह संदेश भी दे रहा कि हमें नई जीवन पद्धति अपनानी पड़ेगी। नए ढंग से जीना पड़ेगा। यह प्रश्न उत्पन्न हो रहा है कि हमारा विकास किस तरह हो ? अर्थ-व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए स्वदेशी अपनाते हुए पारंपरिक ज्ञान का उपयोग कर कुटीर ग्रामीण उद्योगों को विकसित करना होगा। श्री चौहान ने कहा कि प्रकृति की आराधना की परंपरा सशक्त हो।
          हम नदी को माँ और वृक्षों को पूजनीय मानते हैं। सभी नदियां हमारे लिए पूजनीय हैं। पशु-पक्षी, जीव-जंतु सब में एक ही आत्मा का दर्शन किया जा सकता है। उन्होंने आध्यात्मिक गुरुओं से कहा कि मैं आपके चरणों में प्रणाम करता हूँ। एकात्म बोध कैसे जागे और हम अंधेरे से उजाले की तरफ कैसे बढ़े। आप सभी का दर्शन इस संबंध में उपयोगी होगा।
        मुख्यमंत्री ने कहा कि शीघ्र ही आचार्य शंकर सांस्कृतिक व्यास की बैठक भी आयोजित की जाएगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में आध्यात्मिक गुरुओं ने मुख्यमंत्री द्वारा मध्यप्रदेश में कोरोना पर नियंत्रण और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में आयुर्वेदिक काढ़े के उपयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों के लिए भी यह आयुर्वेदिक काढ़ा अनुकरणीय होगा। स्वामी अवधेशानंद जी गिरि, स्वामी स्वरूपानंद जी सरस्वती और स्वामी संवित सोम गिरि ने मध्यप्रदेश के इस नवाचार की प्रशंसा की।

स्वामी अवधेशानंद गिरि, हरिद्वार

भारत माता मंदिर के प्रमुख जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि ने कहा सांस्कृतिक न्यास आपके संकल्प से बना है। न्यास के न्यासी गण और सभी संत-वृंद सभी की ओर से आपको बधाई। स्वामी जी ने कहा कि चुनौती के इस समय में भय, अभाव, अवसाद तो आए ही हैं, समाधान का अवसर भी उपलब्ध है। जीवन अंतहीन संभावनाओं का नाम है।
          मनुष्य की चेतना शताब्दियों से इस तरह के कष्ट देख रही है। स्वामी जी ने कहा आचार्य शंकर का एकात्म का संदेश भी एक बड़े समाधान के रूप में उपलब्ध है। इस सिद्धांत से विश्व एकीकृत है। वैसे भी भारत की विधियाँ संसार में स्वीकृत हुई हैं । प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भारत का योग एक महत्वपूर्ण माध्यम है।                  इसी तरह, अन्य सांस्कृतिक परंपराएँ और आयुर्वेद का उपयोग इस संकट को कम करने और समाप्त करने में सहयोगी है। स्वामी अवधेशानंद जी ने मुख्यमंत्री श्री चौहान के आयुर्वेदिक काढ़े के उपयोग को बढ़ाने और मध्यप्रदेश की करीब एक करोड़ जनता तक इसे पहुंचाने के कदम की सराहना की।
           स्वामी जी ने कहा कि नर्मदा परिक्रमा के समय लगभग 25 करोड़ वृक्षारोपण, सिंहस्थ के सफल आयोजन और उसमें स्वयं निरंतर एक माह उपस्थित रहने के श्री चौहान के कदम उन्हें एक शासक, एक समर्थ प्रशासक और सच्चे उपासक की पहचान देते हैं।

स्वामी स्वरूपानंद जी सरस्वती, मुम्बई

स्वामी स्वरूपानंद जी सरस्वती ने कहा कि समय में बहुत बदलाव आने वाला है लेकिन आपत्ति की स्थिति में भी ईश्वर की कृपा होती है। आयुर्वेद का प्रचार हो रहा है यह इम्यून सिस्टम को बढ़ाने में उपयोगी है। इसी तरह मनुष्य की मनोदशा ठीक रहती है, तो यह इम्यून सिस्टम और अच्छा रहता है। स्वामी जी ने कहा कि इस समय भक्ति, श्रद्धा, विश्वास बदलाव लाने का कार्य कर रहे हैं।
             लोगों का उत्साह बढ़ रहा है। सभी प्रार्थना और पाठ में सक्रिय हैं निश्चित ही पूजा, आराधना का सकारात्मक प्रभाव होता है। हम सभी भारतीय पूरी दुनिया के लिए प्रार्थना करते हैं। अपनी ओर से हम सेवा करते हैं और व्यवहार परिवर्तन का प्रयत्न करते हैं, तो यह संपूर्ण समाज के लिए उपयोगी होता है। वेदांत ज्ञान और भगवान शंकराचार्य के सिद्धांतों पर विचार और क्रियान्वयन आज की आवश्यकता है।

स्वामी संवित सोम गिरि-बीकानेर

स्वामी संवित सोम गिरि जी ने कहा कि विश्व को शंकराचार्य जी का संदेश देना आवश्यक है। आज सारा विज्ञान, धर्म और अध्यात्म की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहा है। भारत में गभार्धान से लेकर अंत्येष्टि तक भिन्न-भिन्न संस्कार हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में वर्णित है कि मानव-मानव में भेद नहीं होना चाहिए। आत्मबोध को प्रत्येक व्यक्ति समझे, यह आवश्यक है।
                आज मनुष्य के लिए संदेश है कि हम अपने अपराध के लिए प्रकृति से, पर्यावरण से क्षमा भी मांगें। स्वामी जी ने कहा कि कोविड-19 एक चुनौती है लेकिन इसका समाधान भी आसान है। हम सभी को एक आत्मबोध को लेकर संपन्न होना होगा धरती हमारी माता है, इस बोध से जुड़कर हम अपनी शक्ति पहचाने। स्वामी जी ने मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा आयुर्वेदिक काढ़े की व्यवस्था लागू करने की प्रशंसा की। साथ ही यह भी कहा कि पूरे विश्व तक यह पहुँचना चाहिए।

स्वामी परमात्मानंद सरस्वती, राजकोट

स्वामी परमात्मानंद सरस्वती जी ने कहा कि अति आत्म-विश्वास हितकारी नहीं होता बल्कि कष्टकारी होता है। यह अज्ञान से उत्पन्न होता है। शरीर के सभी अंग किस तरह परस्पर सहयोग करते हैं, यह बात हमें एकात्म दर्शन से सीखने को मिलती है। कोरोना एक मनोवैज्ञानिक कष्ट है। मानसिक स्वास्थ्य ठीक न होने से यह बढ़ता है। आज ईश्वर इस संकट के बहाने संभवत: यह शिक्षा देना चाह रहा हैं। कि व्यक्ति जितना अधिक उपभोग करेगा, वह कल्याणकारी नहीं बल्कि कष्ट का कारण बनेगा।
                  व्यक्ति को कंज्यूमर से कंट्रीब्यूटर बनना है। स्वामी जी ने बढ़ते उपभोक्तावाद पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह तय है कि कोरोना वायरस से एकात्म भाव ही मनुष्य को बचाएगा। स्वामी जी ने कहा कि समाज के लिए त्याग की भावना सामाजिकता से और एकात्म भाव से हम सोने की चिड़िया के रूप में जाने गए है। सिर्फ अर्थ संपन्न होने से ही भारत सोने की चिड़िया नहीं बना था। स्वामी जी ने व्यक्ति को उऋण होने के लिए प्रयासरत रहने की आवश्यकता बताई और इसे सृष्टि की रक्षा के लिए भी आवश्यक बताया।

सुश्री निवेदिता भिड़े, कन्याकुमारी

सुश्री निवेदिता ने कहा कि मनुष्य एकात्मकता को भूलकर उपभोग में जीने लगा था। काम, क्रोध और भय बढ़ने से रोग आते हैं। ईश्वर ने कोरोना संकट से आत्मबोध का महत्व बता दिया है। सुश्री निवेदिता ने कहा कि शरीर के अपने नियम होना चाहिए। आज व्यक्ति कभी भी सोता, जागता है, जो उसकी इम्यूनिटी को प्रभावित करता है।
            सृष्टि की सेवा में आत्मीय भाव से संलग्न होना और रोग से सभी की रक्षा के लिए प्रयासरत रहना अति आवश्यक है। सुश्री निवेदिता ने शंकराचार्य जयंती की शुभकामनाएँ देते हुए मुख्यमंत्री श्री चौहान के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।

श्री मुकुल कानितकर, नागपुर

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मुकुल जी ने भागीदारी करते हुए कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल निरंतर यह प्रयास कर रहा है कि परंपराएँ अक्षुण्ण रहें। शंकराचार्य जी के दर्शन को पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भी आवश्यक बताया है। आज मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री चौहान इस दिशा में सक्रिय हैं। वर्ष 2007 में प्रारंभ किए गए सामूहिक सूर्य नमस्कार का महत्व लोग समझने लगे हैं।
              मुकुल जी ने आशा व्यक्त करते कहा कि आचार्य शंकर न्यास आत्मा की शक्ति को जागृत करने की दिशा में कार्य करेगा। हमारी परंपराओं में प्रथम रोटी गाय को खिलाने, तुलसी को जल चढ़ाने जैसी छोटी-छोटी परंपराएँ संस्कृति का महत्वपूर्ण भाग हैं। गुरुकुल शिक्षा केंद्र पूरे विश्व को संदेश देते हैं । इस लॉक डाउन को हमने घर वास का नाम दिया है, जो मनोबल बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
             प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जिस लक्ष्मण रेखा के पालन की बात की है, वह राष्ट्र धर्म का निर्वाह ही है। मुकुल जी ने कहा कि आदर्श शासन व्यवस्था का एक मॉडल इस एकात्मता के आधार पर तैयार हो सकता है। इस संबंध में शोध हो और विश्वविद्यालय स्तर पर अध्ययन, अनुसंधान के माध्यम से मॉडल तैयार किया जाना चाहिए।

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