गोंडवाना समय

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Sunday, April 19, 2020

ग्रामीणों को संक्रमण से बचाने मुफ्त दे रहे मास्क

ग्रामीणों को संक्रमण से बचाने मुफ्त दे रहे मास्क 

कमलेश गोंड
नैनपुर/पिंडरई। गोंडवाना समय। 
शहरों के साथ-साथ कोरोना वायरस का खौफ गांव के गलियारों में भी गूंज रहा है क्योंकि ग्रामीणों को भी इस गंभीर वायरस की जानकारी हो चुकी है। वही इस बीमारी से निपटने के लिये केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा दी गई सख़्ती के निर्देश लोकडाउन व सोशल डिस्टेंसिंग का नियम में बंधे ग्रामीणों का मेडिकल दुकानों तक पहुंचने मे असमर्थ है।
जहाँ वायरस से बचने के लिये मास्क, सेनेटाइजर जैसे सरल प्राथमिक चीजों को खरीद पाना नामुमकिन सा दिख रहा है। सीमित व्यवस्थायों में गुजर करने वाले ग्रामीण दिहाड़ी मजदूर और कामगारों के आगे रोजी रोटी का संकट आ गया है। जिसका आज व्यपक असर देखने को मिल रहा है। मास्क और सेनेटाइजर की कीमतों पर खरीदने की क्रय शक्ति ग्रामीणों के वश की बात नहीं है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीणजनों के सामने सरकार के नियमों का पालन और स्वयं के स्वास्थ्य सुरक्षा के लिये महामारी के संकट से बचाव के लिये मास्क लगाना आवश्यक है।
ऐसे समय में जो ग्रामीणजन मास्क नहीं खरीद पा रहे हैं, उन्हें संकट की इस घड़ी में गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन हरसभव मददगार के रूप में आगे आकर मास्क तैयार कर नि:शुल्क प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ में देश के बड़े शहरों में रोजी रोजगार के लिये गये हुये ग्रामीणों के वापस आने पर यदि वे कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण से संबंधित स्थिति नजर आती है तो तत्काल स्वास्थ्य विभाग को सूचना देने एवं उनका उपचार कराने की सलाह देने को लेकर जागरूक भी कर रहे है। अपने घरों पर ही रहने की जानकारी भी दे रहे है। इसी उद्देश्य को लेकर संगठन के कार्यकर्ता लगातार गांव-गांव पहुंचकर ग्रामीणों को जागरूक कर रहे है। 

वंदन टेकाम का सराहनीय प्रयास 

जनकल्याणकारी कार्य में सहयोग करते हुए जी एस यू मध्यप्रदेश की शिक्षा प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष और आदिवासी सेवा मंडल की प्रदेश सचिव सुश्री वंदना टेकाम ने बताया कि वह निर्धन वर्गोंं की मदद के लिए हमेशा प्रयासरत है। वह लगातार नैनपुर ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्रों मं ग्राम मक्के की महिला स्वसहायता समूह से मास्क लेकर गांव-गांव में पहुंचकर मास्क ग्रामीणों को उपलब्ध करा रही है। कोरोना वायरस से बचाव के लिए मास्क अहम और आवश्यक है, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की महंगे मास्क खरीद कर न पहनने की मजबूरी देखते हुए उन्होंने खुद मास्क तैयार करने का फैसला लिया है और साथ में अपने परिवार-परिचितों को मास्क बनाने के लिये प्रेरित कर रही है ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्रामीणजनों को मास्क उपलब्ध करवाया जा सके। 

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