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गरीबों की सुरक्षा हेतु विश्व बैंक से 1 अरब डॉलर

गरीबों की सुरक्षा हेतु विश्व बैंक से 1 अरब डॉलर


नई दिल्ली। गोंडवाना समय।
भारत सरकार और विश्व बैंक ने कोविड-19 महामारी से गंभीर रूप से प्रभावित गरीबों और कमजोर परिवारों को सामाजिक सहायता प्रदान करने के भारत के प्रयासों में मदद हेतु'भारत के कोविड-19 सामाजिक संरक्षण प्रतिक्रिया कार्यक्रम को प्रोत्साहन देने के लिए प्रस्तावित 1 बिलियन डॉलर के 750 मिलियन डॉलर पर हस्ताक्षर किए है।
इसके साथ ही विश्व बैंक ने कोविड-19 महामारी का मुकाबला करने के लिए भारत को अब तक कुल दो अरब डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई है। पिछले महीने भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र की मदद के लिए एक अरब अमरीकी डालर की सहायता देने की घोषणा की गई थी।
इस नवीनसहायता को दो चरणों में वित्त पोषित किया जाएगा- वित्त वर्ष 2020 के लिए 750 मिलियन डॉलर का तत्काल आवंटन और 250 मिलियन डॉलर की दूसरा किश्त को वित्त वर्ष 2021 के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
इस समझौते पर भारत सरकार की ओर से वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामले विभाग के अपर सचिव, श्री समीर कुमार खरे और विश्व बैंक की ओर से भारत के निदेशक श्री जुनैद अहमद ने हस्ताक्षर किए।
श्री खरे ने कहा कि मौजूदा और भविष्य के संकटों को देखते हुएगरीब परिवारोंके लिए एक सुदृढ़ और वहनीय सामाजिक सुरक्षा प्रणाली महत्वपूर्ण है। यह कार्यक्रम कमजोर सामाजिक समूहों को सीधे और पूरे देश में अधिक सामाजिक लाभों तक पहुँचने में मदद के माध्यम से भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के प्रभावों और दायरे का विस्तार करेगा।
इस अभियान के पहले चरण को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) के माध्यम से देश भर में लागू किया जाएगा। यह व्यापक स्तर पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) जैसे पूर्व-मौजूदा राष्ट्रीय मंचों और कार्यक्रमों की मूल व्यवस्थाओं का उपयोग करके शीघ्र ही नकद हस्तांतरण और खाद्य लाभों में मदद प्रदान करने के साथ-साथकोविड-19 राहत प्रयासों में शामिल आवश्यक श्रमिकों के लिए मजबूत सामाजिक सुरक्षा प्रदान करते हुएपीएमजीकेवाई के अंतर्गत कमजोर समूहों, विशेष रूप से प्रवासियों और अनौपचारिक श्रमिकों को लाभान्वित भी करेगा। दूसरे चरण में, यह कार्यक्रम सामाजिक सुरक्षा पैकेज को और सुदृढ़ करेगा, जिससे राज्य सरकारों और पोर्टेबल सामाजिक सुरक्षा वितरण प्रणाली के माध्यम से स्थानीय जरूरतों के आधार पर अतिरिक्त नकदी और तरह के लाभों को बढ़ाया जाएगा।
सामाजिक सुरक्षा एक महत्वपूर्ण निवेश है, क्योंकि भारत की आधी आबादी एक दिन में 3डॉलर से कम कमाती है और अनिश्चित रूप से गरीबी रेखा के करीब है। भारत का90 प्रतिशत से अधिक श्रमबल अनौपचारिक क्षेत्र में नियोजित है, जिनके पास महत्वपूर्ण बचत या कार्यस्थल आधारित सामाजिक सुरक्षा लाभ जैसे कि वैतनिक रोग अवकाश या सामाजिक बीमा की सुविधा नहीं है। 9 मिलियन से अधिक प्रवासी, जो हर वर्ष काम करने के लिए राज्य की सीमाओं को पार करते हैं, वे भी अधिक जोखिम में हैं क्योंकि, भारत में व्यापक स्तर पर सामाजिक सहायता कार्यक्रम राज्यों के भीतर के निवासियों को लाभ प्रदान करते हैं। महत्वपूर्ण रूप से, भारत के शहरों और कस्बों को लक्षित समर्थन की भी आवश्यकता होगी क्योंकि भारत के सर्वाधिक व्यापक सामाजिक संरक्षण कार्यक्रम ग्रामीण आबादी पर केंद्रित हैं।
कोविड-19 महामारी का मुकाबला करने के लिए दुनिया भर में सरकारों को अभूतपूर्व तरीके से लॉकडाउन और सामाजिक दूरी को लागू करना पड़ा है। हालांकि, वायरस के प्रसार को रोकने के लिए किए गए इन उपायों से अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हुई है और खासतौर से अनौपचारिक क्षेत्र में नौकरियां प्रभावित हुई हैं। उन्होंने कहा कि भारत इसका अपवाद नहीं है। इस संदर्भ में, ऐसे समय में नकद हस्तांतरण और खाद्य लाभ गरीबों और कमजोर लोगों को एक ऐसे 'सुरक्षा सेतु' तक पहुंचने में मदद करेंगे, जब अर्थव्यवस्था फिर से सजीव रूप से विकासोन्मुख होगी।
यह कार्यक्रम एक व्यवस्था कानिर्माणकरेगा जो भारत के सुरक्षा निर्धारण कार्यक्रम के वितरण को सुदृढ़बनाएगा। यह इस प्रकार होगा:
  • भारत में 460 से अधिक अलग-अलग सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को एक एकीकृत प्रणाली में स्थानांतरित करने के अलावासंपूर्ण राज्यों में जरूरतों की विविधता को स्वीकार करने के साथ-साथ इसे त्वरित और अधिक लचीला बनाएगा;
  • प्रवासियों और शहरी गरीबों सहित सभी के लिए भोजन, सामाजिक बीमा और नकद सहायता सुनिश्चित करने के साथ-साथदेश में सामाजिक सुरक्षा लाभों को कहीं से भी प्राप्त की जा सकने वालीभौगोलिक स्थिति को सुवाह्य बनाएगा; तथा
· भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के केन्द्र बिंदुको ग्रामीण क्षेत्र से राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने में सक्षम बनाएगा जो शहरी गरीबों की जरूरतों को भी समझती हो।
श्री अहमद ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने मौजूदा सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों को भी प्रभावित किया है। यह कार्यक्रम भारत सरकार के अधिक समेकित वितरण प्रयासों को सहायता प्रदान करेगा और राज्य की सीमाओं से परे जाकर ग्रामीण और शहरी दोनों जनसंख्याओं के लिए सुलभ होगा। यह मंच देश की मौजूदासामाजिक सुरक्षा प्रणाली-जैसे पीडीएस, डिजिटल, बैंकिंग अवसंरचनाऔर आधार को समाहित करते हुए21वीं सदी के भारत की जरूरतों के लिए समग्र सामाजिक सुरक्षा प्रणाली की स्थिति का प्रारूप तैयार करता है। महत्वपूर्ण रूप से, इस तरह की प्रणाली के माध्यम से भारत के संघवाद और राज्यों को उनके संदर्भ में शीघ्र और प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिय देने के लिए सक्षम बनाने की आवश्यकता होगी।
1 बिलियन डॉलर की प्रतिबद्धता में से,  वित्तीय वर्ष 2020 के लिए 750 मिलियन डॉलर का तत्काल आवंटन, जिसमें से  550 मिलियन डॉलर को विश्व बैंक की रियायती ऋण शाखा, अंतर्राष्ट्रीय विकास संघ (आईडीए) के एक ऋण द्वारा वित्तपोषित किया जाएगा और 200 मिलियन डॉलर का ऋण इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमैंट (आईबीआरडी) से दिया जाएगाजिसमें 18.5 की अंतिम परिपक्वता के साथ पांच वर्ष की अनुग्रह अवधि शामिल है। शेष 250 मिलियन डॉलर 30 जून, 2020 के बाद उपलब्ध कराए जाएंगे और यह मानक आईबीआरडीशर्तों के तहत होगा। इस कार्यक्रम कोभारत सरकार के वित्त मंत्रालयद्वारा कार्यान्वित किया जाएगा।

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