Tuesday, May 12, 2020

आदिवासी क्षेत्र में विस्थापन में दी जाने वाली मुआवजा राशि बढ़ाने की जरूरत

आदिवासी क्षेत्र में विस्थापन में दी जाने वाली मुआवजा राशि बढ़ाने की जरूरत

आदिवासी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिये और अधिक मिले आर्थिक मदद 

आदिम जाति कल्याण मंत्री वीडियों कांन्फ्रेंस में हुई शामिल

भोपाल। गोेंडवाना समय।
आदिम जाति कल्याण मंत्री सुश्री मीना सिंह ने केन्द्रीय जनजातीय मंत्रालय द्वारा बुलाई गयी वीडियो कांन्फ्रेंस में कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण के दौर में आदिवासी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। इन क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिये केन्द्र की ओर से मिलने वाली आर्थिक मदद को बढ़ाये जाने की जरूरत है।                     उन्होने बंधन योजना में 15 से 20 महिलाओं के समूह को मिलने वाली डेढ़ लाख रुपए की राशि को बढ़ाकर ढाई लाख रुपए करने की बात कहीं। वीडियो कांफ्रेंस के प्रारंभ में केन्द्रीय जनजाति कार्य मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण आदिवासी क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती देने की आवश्यकता महसूस की गई है। इसी परिप्रेक्ष्य में राज्यों के मुख्यमंत्रियों और राज्यों के आदिम जाति कल्याण मंत्रियों से चर्चा की जा रही है।

प्रदेश में आदिवासी क्षेत्रों में प्रवासी मजदूरों की वापसी हुई 

आदिम जाति कल्याण मंत्री ने बताया कि कोरोना संकंट के कारण प्रदेश में आदिवासी क्षेत्रों में प्रवासी मजदूरों की वापसी हुई है। ऐसे में इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में रोजगार आधारित कार्य शुरू किये जाने की आवश्यकता है। मंत्री सुश्री मीना सिंह ने आदिवासी समेत अन्य परिवार के विस्थापन में दी जाने वाली 10 लाख रुपए की मुआवजा राशि को कम बताते हुए कहा कि विस्थापन के कारण उनका रोजगार भी प्रभावित होता है ऐसे में मुआवजा की राशि बढ़ाये जाने की आवश्यकता है। मंत्री सुश्री मीना सिंह ने बतायाकि प्रदेश में महुआ की खरीदी 35 रुपये किलो की दर पर की जा रही है। इसके साथ ही वनवासियों से तेन्दूपत्ता 2500 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर खरीदा जा रहा है।

बंधन केन्द्रों के विकास के लिये प्रदेश को 7 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई

बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 15 जिलों के आदिवासी बहुल क्षेत्र में 86 बंधन केन्द्र मंजूर हुए हैं। प्रत्येक बंधन केन्द्र में 300 सदस्य जोड़े गए हैं जो वनोपज संग्रहण का कार्य कर रहे हैं। बंधन से जुड़े सदस्यों को लघु वनोपज प्र-संस्करण के प्रशिक्षण और उपकरण देने का कार्य किया जा रहा है। केन्द्र सरकार से बंधन केन्द्रों के विकास के लिये प्रदेश को 7 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई है। 

हाट-बाजार में अपनी दुकान की गई विकसित 

प्रदेश में वनोपज की बिक्री के लिये हाट-बाजार में अपनी दुकान विकसित की गई है। इन दुकानों के माध्यम से वनवासियों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं। प्रदेश में लघु वनोपज के 12 किस्मों के समर्थन मूल्य राज्य शासन द्वारा घोषित किये गये हैं। बैठक में प्रमुख सचिव वन श्री अशोक वर्णवाल, प्रमुख सचिव आदिम जाति कल्याण श्रीमती पल्लवी जैन गोविल और आयुक्त आदिवासी विकास श्री बी. चन्द्रशेखर भी मौजूद थे।

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