Wednesday, June 24, 2020

सिर्फ कोरोना योद्धा ही नहीं, संकट के समय निर्धनों व श्रमिकों की मदद कैसे करें इसका प्रमाण बनीं रेखा नायक

सिर्फ कोरोना योद्धा ही नहीं, संकट के समय निर्धनों व श्रमिकों की मदद कैसे करें इसका प्रमाण बनीं रेखा नायक

रेखा नायक को मददगार के नाम से जानने लगे है गांव-गांव में लोग  

विवेक डेहरिया संपादक 
झारखंड। गोंडवाना समय। 
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस संक्रमण की आहट के बाद से ही भारत में लगाये गये लॉकडाउन से जहां निर्धन व मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए।
चाहे शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण अंचल के ग्रामीणजन अधिकांश लोगों के सामने अपने व अपने परिवार के सदस्यों को भोजन की व्यवस्था करने की समस्या का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे समय में पश्चिमी सिंहभूम की रेखा नायक ने झारखंड के गांव-गांव पहुंचकर निर्धनों व मजदूरों की हाथ बढ़ाकर मददगार बनकर कोराना यौद्धा की भूमिका नायिका बनकर निभाया।

600 लोगों को प्रतिदिन भोजन कराया 

किचन क्वीन बनकर रेखा नायक ने प्रतिदिन 600 लोगों को भोजन खिलाया रेखा नायक लगातार मिशन बदलाव किचन का संचालन कर निर्धनों के घरों तक भोजन पहुंचाने में अग्रणी भूमिका निभाने महत्वपूर्ण रही हैं। पश्चिमी सिंहभूम की कोरोना योद्धा रेखा नायक ने कई गांवों में कैंप लगाकर भोजन का वितरण किया। इतना ही नहीं, दूसरे प्रदेशों से आने वाले श्रमिको को भी रेखा ने भरपूर मदद की। 

स्वास्थ्य के प्रति किया जागरूक 

      कोरोना यौद्धा रेखा नायक ने सिर्फ निर्धन व श्रमिकों को भोजन ही नहीं कराया बल्कि जो श्रमिक झारखंड प्रदेश से लौट रहे थे। उनका उपचार के अलावा होम कोरेंटिन में रहने के लिए जागरूक भी किया गया। उन्हें भी भोजन बनाने हेतु किराना सामग्री के साथ राशन दिया गया है।
       कोरोना यौद्धा रेखा नायक की टीम में मोतीलाल नायक, परखित नायक, अक्षय नायक, रुद्रप्रताप गोंड, मिथिलेश नायक, जगबंधु नायक, चेतन नायक, राजीव नायक, करण नायक, अजय गोंड इन सभी ने मिलकर हजारों निर्धनों को भोजन कराया है।

पिता की तरह समाजसेवा करने आशीर्वाद लेकर निकलती थी 

24 साल की रेखा नायक अब पुरूषों के लिये किसी प्रेरणा से कम नहीं है। झारखंड राज्य में तो अब स्थिति यह है कि सूदूर वनांचल क्षेत्रों में मददगार के रूप में लोग रेखा नायक का नाम याद करते है।
झारखंड राज्य के मनोहरपुर, गोईलकेरा, आनंदपुर क्षेत्र के लगभग 25 से अधिक गांव में रेखा नायक ने मिशन बदलाव अभियान के माध्यम से कोरोना वायरस संक्रमण के दौरान भारत में लगे लॉकडाउन के समय में निर्धनों व श्रमिकों की मदद करते हुये सहयोग करने के लिये वह सुबह 5 बजे ही अपने पिता श्री मोतीलाल नायक की ही तरह समाजसेवा के कार्य करने में आगे रहने वाले पिता जी मूलमंत्र के साथ आशीर्वाद लेकर वन क्षेत्रों में बसे गांवों के लिये निकल जाती थी।

मेहनत व कला के अनुसार श्रमिकों मिले काम 

मिशन बदलाव की रेखा नायक बताती है कि आज भी दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों व जंगल पहाड़ों में हमारे निर्धन परिवार निवास करते हैं, जहां सरकारी योजना का लाभ लॉकडाउन के दौरान नहीं पहुंच पा रही थी। इनमें से दर्जनों गांवों में लॉकडाउन की अवधि में पका हुआ भोजन पहुंचाने का काम किया गया है। रेखा नायक कहती है कि सरकार को अन्य राज्यों से लौटे सभी मजदूरों को उनके कला व मेहनत के अनुसार काम दें। 

छत्तीसगढ़ सरकार के साथ कर रही कार्य 

हम आपको बता दे कि कोरोना यौद्धा के नाम से झारखंड में अपनी अलग पहचान बनाने वाली रेखा नायक ने रांची के जेवियर्स इंस्टिट्यूट आॅफ सोशल सर्विस से मैनेजमेंट में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त किया है। अभी वह एनजीओ के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार के साथ जुड़ कर कार्य कर रही है।
           प्रारंभ से ही रेखा नायक जमीन से जुड़कर, जमीनी समस्या का समाधान में कार्य करने के बारे में विचार करती थी जिसे रेखा नायक ने धरातल में वास्तव में पूरा करने का प्रयास करने में कभी कमी नहीं किया। रेखा नायक निरंतर जनसेवा में लगी रहती है।
           वहीं मानव सेवा के रूप में जनसेवा करने का अवसर उन्होंने कोरोना वायरस संक्रमण की वैश्विक महामारी के दौरान लगाये लॉकडाउन के मिला जिसे उन्होंने पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाया भी है जो कि प्रमाण के रूप में निरंतर निर्धनों व श्रमिकों को सहयोग कर सेवा करते हुये दिखाई दी।

मदद के लिये निकली तो मददगारों ने भी बंटाया हाथ 

रेखा नायक ने जब मदद के लिये हाथ बढ़ाया तो उन्हें भी मदद करने के लिये मददगार आगे आने लगे। रेखा नायक क्राऊड फंडिंग के तहत सोशल एप्सीमेंट फॉर रूरलएन अर्बन सोसायटी, जन सहारा संस्था सहित विभिन्न संस्थाओं ने भी निर्धनों व श्रमिकों को सहयोग करने के लिये आर्थिक सहयोग लेकर कार्य कर रही है। सहयोग के रूप में सामग्री का भुगतान भी उन्होंने आॅनलाईन भुगतान कर हिसाब किताब बराबर रखा है। 

किराना, राशन किट प्रदान करने के साथ, आॅनलॉइन राशि पहुंचाकर भी की मदद 

कोरोना संकट के दौरान सेवा कार्यो से विशिष्ट पहचान बना चुकी मिशन बदलाव की टीम ने गोईलकेरा व सोनुवा प्रखंड के सात गांव में लोगों के बीच भोजन सामग्री किट का वितरण किया। इस दौरान झीलरूवां, चांदीपोस, वृंदावन, बिनका, बालजोड़ी, चमकपुर और विक्रमपुर गांव में 120 परिवारों तक राशन के किट पहुंचाए गए।
           
           लॉकडाउन में भी दूसरे प्रदेशों में फंसे होने के दौरान इन श्रमिकों को डिजिटल माध्यम से राशि का भुगतान कर राशन व खाद्य सामग्री मुहैया कराई गई थी। राशन वितरण के दौरान गांव में शारीरिक दूरी का विशेष ध्यान रखा गया और इसके महत्व के बारे में लोगों को बताया गया।
           मौके पर मोतीलाल नायक, हीना नायक, परीक्षित नायक, मिथिलेश नायक, जगबंधु नायक, चैतन्य नायक, राजीव नायक, करण नायक, अजय, पंकज, सुरसेन, दुर्गाचरण पूर्ती, राजू नायक, प्रीति, नीलांबर, निर्मल, राजू और दारोगा नायक आदि उपस्थित थे।
इसमें 25 किलो चावल के अलावा दाल, नमक, हल्दी, मसाले, सरसो तेल, आलू और साबुन आदि जरूरतमंद परिवारों को मुहैया कराया गया। मिशन बदलाव की जिला समन्वयक रेखा नायक ने बताया कि अधिकांशत: प्रवासी श्रमिकों के परिवार तक मदद पहुंचाई जा रही है।

मिशन बदलाव के नाम से करती है जरूरतमंदों की जनसेवा

     
          वे 19 मार्च को घर वापस आने के बाद जब रेखा नायक ने अपने क्षेत्र की स्थिति देखा तो वह मदद करने के लिये निकल पड़ी। अन्य राज्यों में गये प्रवासी श्रमिकों की सूची निकालकर उनके परिवारों तक पहुंची। उन्हें जहां पर थे वहां पर आॅनलॉइन राशि पहुंचाकर राशन सामग्री भी उपलब्ध करवाई।  
रेखा नायक मिशन बदलाव नामक अभियान के माध्यम से वन क्षेत्रों में निर्धनों व जरूरतमंदों की मदद करने के लिये जनसेवा करने के लिये अभियान चला रही है। रेखा नायक छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री पोषण मिशन के तहत कोडिनेटर भी है।

No comments:

Post a Comment

Translate