Tuesday, June 2, 2020

आॅनलाइन जूम चर्चा/ मध्यप्रदेश हैं बौद्ध धम्म का पुरोधा

आॅनलाइन जूम चर्चा/ मध्यप्रदेश हैं बौद्ध धम्म का पुरोधा

827 दानदाताओं ने मिलकर किया था मध्यप्रदेश के सांची का निर्माण 
सम्राट अशोक के राजगुरु मोग्गलीपुत्त तिस्स की मिली थीं अस्थियां
सांची स्तूप के संरक्षण में भोपाल बेगमों का हैं महत्वपूर्ण योगदान
सांची सहित म.प्र के 19 जिले बया कर रहे बौद्ध विरासत का स्वर्णिम इतिहास 
बुध्द के महापरिनिर्वाण का प्रतीक हैं यह स्तूप

रजनी गजभिये की विशेष रिपोर्ट
भोपाल। गोंडवाना समय। 
जन प्रवर्तन संघ पुणे के नेतृत्व में भोपाल की मैत्री सामाजिक एवं शैक्षणिक समिति की अध्यक्षा रजनी गजभिये द्वारा जूम पर पीपीटी के माध्यम से भारत में बौद्ध विरासतों की खोज सांची से संपूर्ण मध्यप्रदेश तक विषय पर आॅनलाइन कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई।
जिसमें 77 लोगों ने भाग लिया। मध्यप्रदेश के खंडित-विखंडित अवस्था में पुरातात्विक अवशेष आज भी अपनी कहानी स्वयं बयां करते हैं। आदिमानव काल की भीमबैठका में बोझ ढोती महिलाएं दिखाई देती हैं और बौद्ध धम्म का उद्भव ईसा पूर्व में भारत की कोयतूर सभ्यता से ही हुआ हैं।

अशोकनगर के ईसागढ़ तहसील के कदवाया में विशाल बौद्ध विरासत हैं

नागदा जिले के नामकरण के इतिहास में मालवा के परमार नरेशों  के अभिलेखों में नागह्रद का वर्णन मिलता हैं, वहीं नागों का दहन हुआ, इसलिए इसका नाम नागदा पड़ा। अशोकनगर के ईसागढ़ तहसील के कदवाया में विशाल बौद्ध विरासत हैं, वहीं अवंति से लेकर उज्जयनी का सफर और उसमें सम्राट अशोक द्वारा बनाए गए कानीपुरा कि वैश्य टेकड़ी पर विस्तृत चर्चा हुई। 

कटनी सम्राट अशोक के लिए क्यों खास हैं पर हुई चर्चा हुई

उमरिया का मानपुर से 10 किमी दूर कुठुलियां का बेलनाकार स्तूप अपना विशेष इतिहास संजोये रखता हैं। कटनी सम्राट अशोक के लिए क्यों खास हैं पर चर्चा हुई वहीं खरगोन के कसरावद, खंडवा, सिंगरौली के नगवां पर विशेष चर्चा की गई।
मध्यप्रदेश के अजंता-एलोरा के साथ दतिया, बालाघाट सहित मंडला, डिंडौरी, सतना के भरहुत स्तूप, रीवा के देवकोठार, विदिशा के सांची, सतधारा, सुनारी, अंधेर, तालपुरा, ढेंगीनाथ, उदयगिरी, मुरैलखुर्द सहित पचमढ़ी व सीहोर जिले के सारूमारु के पुरातात्विक   साक्ष्यों पर विशेष चर्चा हुई। सागर जिले सहित होलियाडोरस के स्तंभ पर विशेष जानकारी प्रदान की गई।

50 बौद्ध मोनेस्ट्री की महत्वपूर्ण जानकारी दी गई

मीटिंग की अध्यक्षता विक्रम विश्वविद्यालय के भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष डॉ आर.के. अहिरवार ने की। सांची के तोरणद्वार, स्तूप-1, स्तूप-2, स्तूप -3 सहित द ग्रेट बाउल सहित 50 बौद्ध मोनेस्ट्री की महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। 

विशेष उपस्थिति इनकी रही 

जन प्रवर्तन संघ पुणे के नेतृत्व में जूम पर पीपीटी के माध्यम से भारत में बौद्ध विरासतों की खोज सांची से संपूर्ण मध्यप्रदेश तक विषय पर आॅनलाइन कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। जिसमें 77 लोगों ने भाग लिया उनमें से प्रमुख रूप से पीपुल्स मेडिकल कॉलेज भोपाल के डीन डॉ एस. के.सदावर्ते, डॉ मीनाक्षी रावल धार, डॉ सतीश दीपांकर पटना, शैला सोमकुंवर भोपाल, डॉ एस. पी.बामने इतिहास विभाग धार, डॉ जामरा धार, हर्षा सोनटक्के पांढुर्ना, डॉ एम. डी.भारती सहित, अविनाश बंसोड भोपाल, सुमेध थोरात पुणे, महेंद्र गौरखेड़े भोपाल, आशीष हिरकने कोल्हापुर, डॉ मोनिका जैन भोपाल ने विशेष उपस्थिति प्रदान की।

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