Tuesday, June 2, 2020

निजाम के हाथों से जब चढ़ता है रंग तो जनजाति समुदाय की पुरातन कला संस्कृति का दृश्य आने लगता है नजर

निजाम के हाथों से जब चढ़ता है रंग तो जनजाति समुदाय की पुरातन कला संस्कृति का दृश्य आने लगता है नजर 

बैहर/बालाघाट। गोंडवाना समय। 
निजाम वो नाम है जिसके हाथों में जनजाति कलाकारी का रंग अब चाहे वह दीवार पर हो, कागज हो, प्रतिमा हो या पेंटिंग करने का समुचित सुरक्षित स्थान हो जब चढ़ता है तो देखते ही देखते जनजाति समुदाय की पुरातन कला संस्कृति का दृश्य नजर आने लगता है।
जनजाति कला, संस्कृति, धरोहर को पेंटिंग कला के माध्यम से सहेजने का जज्बा लिये निजाम उईके ने जनजाति बाहुल्य क्षेत्र आमगांव, बैहर, कान्हा नेशनल पार्क के अंतर्गत ग्रह ग्राम आमगांव से अपनी पढ़ाई किया है।

जनजातियों की कलाकारी में जिम्मेदारों ने नहीं निभाई जवाबदारी 

हम आपको बता दे कि देश में आजादी के बाद से अब तक जनजाति, गोंड पेंटिंग, म्यूरल पेंटिंग, वर्ली पेंटिंग, जनजाति कला जो सुरक्षित व संरक्षित किये जाने के अभाव के चलते कह सकते है कि लुप्त हो रही थी। हालांकि देश में आज भी अद्भुत, आश्चर्ययुक्त सौंदर्यता से परिपूर्ण, भव्य मनोरम दृश्य के रूप में दिखाई देने वाली जनजाति कला संस्कृति की पहचान चाहे वह महल, गढ़, किले हो या अन्य क्षेत्र हो, भीमबेठका में पत्थरों पर उकेरी गये शैलचित्र आज भी कायम है जिसकी पूरी दुनिया कायल है वैज्ञानिकों के लिये आज भी किसी खोज से कम नहीं है, ऐसी अनेक जनजाति समुदाय की कलाकृति अभी कायम है, जो अपना प्रमाण आज भी बयां कर रही है लेकिन उन्हें संरक्षित व सुरक्षित करने में जिम्मेदारी, जवाबदारों ने ईमानदारी व कर्तव्यता के साथ नहीं निभाया है। 

जनजाति समुदाय के अनेक कलाकार अपनी कला संस्कृति की कर रहे प्रस्तुति 

हां लेकिन जनजाति समुदाय के अनेक ऐसे कलाकार है। जो आज भी जनजाति समुदाय की कला, संस्कृति को हुबहु रूप देने की कोशिश आज भी कर रहे है। उनमें से ही एक नाम बालाघाट जिले के बैहर विकासखंड के आमगांव के गोंड कलाकार निजाम उइके का भी है। जो अपनी कला के माध्यम से बनाई गई पेंटिंग से देश-विदेश भोपाल, नागपुर, मुम्बई इतना ही नहीं हजारों वर्ष संस्कृति कलाकृति आपको देश दुनिया तक पहुंचाना चाहते हैं। 

निजाम की पेंटिंग की हर जगह होती है प्रशंसा 

हम आपको बता दें कि जो कि जनजाति मेला बालाघाट में आयोजित हुआ था। इसमें भी निजाम के धारा कला तैयारी किया गया था। जनजाति के आधार पर पेंटिंग तैयार किया गया था, जनजाति मेला में लोगों ने पेंटिंग की बहुत प्रशंसा किया था। सिर्फ जनजाति मेला ही नहीं जहां पर भी निजाम की पेंटिंग की प्रस्तुति होती है वहां पर प्रशंसा जरूर होती है। इसके साथ ही कान्हा नेशनल पार्क मुक्की में अपनी पेंटिंग को पर्यटक मध्य प्रदेश टूरिज्म भोपाल, एवं मध्य प्रदेश टूरिज्म बालाघाट के अंतर्गत अपनी पेंटिंग गोंड जनजाति कला को रंगों में लगी चमक दिखाई देती है। 

लॉकडाउन में पेंटिंग कर समय का किया सदुपयोग 

कॉरोना महामारी संकट के समय में निजाम उईके ने अपनी पेंटिंग को आगे बढ़ाने की कोशिश किया है, समय का सदुपयोग उन्होंने पेंटिंग के क्षेत्र में पूरी तनम्यता से किया है। निजाम उईके जनजाति पुरातन कला संस्कृति को जैसा की वैसा पुराने अंदाज में कला को आगे बढ़ाना चाहते हैं। जनजाति कला को देश दुनिया तक पहुंचाना है, निजाम का कहना है कि मेरा यह सपना है। वहीं पेंटिंग कलाकारी के माध्यम से ही आज बालाघाट जिले में उनकी एक अपनी अलग पहचान है। 

जीएसयू बढ़ाता है निजाम का उत्साह 

निजाम उईके को गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन के राष्ट्रीय संरक्षक मोहन मरकाम, दीनू गोंड उइके(जिला अध्यक्ष), सिद्धांत धुर्वे, राहुल प्रधान, सुश्री वैशाली धुर्वे, सुश्री वंदना टेकाम (नैनपुर), प्रेमलता सैयाम (जबलपुर), अनामिका पुटे (जबलपुर), शिवानी ठाकुर (जबलपुर), गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन के योगदान सहयोग के कारण वह गोंड जनजाति की कला को संरक्षित व सुरक्षित करने में अपनी भूमिका निभा रहा है। 

अपने संदेश में क्या कहते है निजाम 

अपने संदेश में निजाम उईके कहते विशेष रूप से यह कहते है कि वह चाहते हैं कि हर घर में गोंड कलाकार की कला की झलक दिखाई देना चाहिये। इसके साथ ही वे निजाम उईके कहते है कि गोंड कलाकार अपनी पुरातन कला को संवारने और सुरक्षित करने जी रहा है, इसके लिये उन्होंने नाम तीलीका आर्ट गैलरी भी दिया है। 

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