Thursday, September 17, 2020

382 डॉक्टरों की कोरोना से मृत्यू, सरकार पर भड़का भारतीय चिकित्सा संघ

382 डॉक्टरों की कोरोना से मृत्यू, सरकार पर भड़का भारतीय चिकित्सा संघ


नई दिल्ली। गोंडवाना समय।

कोरोना वायरस महामारी के दौरान मृत हुये डॉक्टरों के बारे में कोई जानकारी न होने के केंद्र सरकार के जबाव पर भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) भड़क गया है। मामले पर बयान जारी करते हुए उसने कहा है कि ये सरकार की उदासीनता को दिखाता है और लोगों के लिए खड़े हुए राष्ट्रीय नायकों को त्यागने के बराबर है। आईएमए ने अपने जबाव में बताया कि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में अब तक 382 डॉक्टर अपनी जान गंवी चुके हैं।

सरकार ने क्या कहा था ?

दरअसल, संसद में कोरोना वायरस से प्रभावित हुए डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने कहा था कि केंद्र सरकार के पास इसके आंकड़े नहीं हैं क्योंकि स्वास्थ्य का मामला राज्यों के अंतर्गत आता है और केंद्रीय स्तर पर ये आंकड़े नहीं जुटाए जाते। इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने भी कोरोना वायरस पर संसद में अपने बयान में जान गंवाने वालों डॉक्टरों का कोई जिक्र नहीं किया था। 

नैतिक अधिकार खो देती है

डॉक्टरों के प्रति केंद्र सरकार की इसी उदासीनता पर भड़के आईएमए ने अपने बयान में कहा कि अगर सरकार कोरोना वायरस से संक्रमित हुए और जान गंवाने वाले डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के आंकड़े नहीं रखती तो वह महामारी अधिनियम, 1897 और आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू करने का नैतिक अधिकार खो देती है। बयान में आगे कहा गया है, ये सोचना कि ये जानकारी देश के ध्यान के लायक नहीं है, घृणित है। ऐसा लगता है कि वे (डॉक्टर) तुच्छ हैं।

सरकार का बयान राष्ट्रीय नायकों को त्यागने के बराबर-आईएमए

संसद में दिए गए स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे के बयान का जिक्र करते हुए आईएमए ने अपने बयान में कहा, ये कर्तव्य का त्याग और हमारे लोगों के लिए खड़े रहे राष्ट्रीय नायकों का परित्याग है। आईएमए ने कहा है कि इससे एक तरफ डॉक्टरों को कोरोना वॉरियर्स कहने और दूसरी उनके और उनके परिवार को शहीद का दर्जा और इसका लाभ देने से इनकार करने का पाखंड भी उजागर होता है।

कोई सैनिक गोली घर नहीं लाता, डॉक्टर कोरोना घर ले जाते हैं

कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में अग्रिम मोर्चे पर खड़े डॉक्टरों की तुलना सैनिकों से करते हुए आईएमए ने कहा, सीमा पर लड़ने वाले हमारे बहादुर सैनिक अपनी जान खतरे में डालकर दुश्मन से लड़ते हैं, लेकिन कोई भी गोली अपने घर नहीं लाता और अपने परिवार के साथ साझा नहीं करत लेकिन डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी राष्ट्रीय कर्तव्य का पालन करते हुए न सिर्फ खुद संक्रमित होते हैं, बल्कि अपने घर लाकर परिवार और बच्चों को देते हैं।'

आईएमए ने सरकार के सामने रखी ये मांगें

अपने बयान में आईएमए ने केंद्र सरकार के सामने कुछ मांगे भी रखी हैं। इनमें कोरोना वायरस महामारी के दौरान जान गंवाने वाले डॉक्टरों को शहीद का दर्जा देने और उनके परिवार को मुआवजा देने की मांग सबसे अहम है। इसके अलावा अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के प्रतिनिधियों से भी आंकड़े इकट्ठा करने की मांग भी की गई है। आईएमए ने ये भी कहा है कि अगर प्रधानमंत्री चाहें तो उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष को बुलाकर डॉक्टरों की चिंताओं को समझ सकते है।

स्वास्थ्य मंत्री खुद एक डॉक्टर

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने एक राष्ट्रीय चैनल से बातचीत में कहा कि बड़े दुखी मन से केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखी गई। विडंबना है कि डॉक्टर समेत तमाम स्वास्थ्यकर्मी देश सेवा में लगे हैं लेकिन डॉक्टरों के मुद्दे को इस तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे बड़ी विडंबना हो नहीं सकती है।आईएमए ने लगातार सरकार से डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की ड्यूटी के दौरान मौतों का मुद्दा उठाया है और कहा कि इन बातों की ओर ध्यान दें।
         संसद में भी डॉक्टरों के मुद्दे पर बात नहीं की जा रही ऐसा होना दुर्भाग्यपूर्ण है। एक तरफ सरकार कोरोनावायरस से जंग लड़ने वाले डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को फ्रंटलाइन वॉरियर्स या कोरोना वॉरियर्स कह रही है, तो वहीं दूसरी ओर सरकार ने संसद में कहा है कि उनके पास कोरोना के चलते जान गंवाने वालों या इस वायरस से संक्रमित होने वाले डॉक्टरों व अन्य मेडिकल स्टाफ का डेटा नहीं है।
            इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने केंद्र सरकार के इस बयान पर नाराजगी जताई है। आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर राजन शर्मा ने 'बड़े दुखी मन से यह चिट्ठी लिखी गई है कि विडंबना है कि मेरे डॉक्टर साथी, नर्स, हेल्थ केयर वर्कर्स सारे देश की सेवा में जुटे हुए हैं और अगर हमको स्टेट सब्जेक्ट की तरह बांट दिया जाए तो इससे बड़ी विडंबना मेडिकल सिस्टम में हो नहीं सकती। इसके साथ ही विडंबना यह भी है कि स्वास्थ्य मंत्री खुद एक डॉक्टर हैं। 

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