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Sunday, September 27, 2020

रेंजर के अश्लील व्यवहार से परेशान, जनजाति महिला को अजाक थाना प्रभारी व जांच समिति सदस्य भी कर रहे प्रताड़ित

रेंजर के अश्लील व्यवहार से परेशान, जनजाति महिला को अजाक थाना प्रभारी व जांच समिति सदस्य भी कर रहे प्रताड़ित

छिंदवाड़ा का अजाक थाना महिलाओं के लिये बना प्रताड़ना केंद्र 


छिंदवाड़ा। गोंडवाना समय।

पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ के राज में और महिलाओं व बेटियों के प्रताड़नाओं के मामले को पुलिस थाना में संवेदनशीलता के साथ कार्यवाही का निर्देश देने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के राज में विशेष संरक्षित जनजाति की महिला कर्मचारी ममता भारती, सहायक ग्रेड-3, वनपरिक्षेत्र अधिकारी कार्यालय पूर्व वनमंडल  छिंदवाड़ाअपने विभाग के रेंजर की प्रताड़ना से तंग आकर हिम्मत जुटाकर अजाक थाना तक शिकायत करने के बाद अब जांच व कार्यवाही करने वालों की ही प्रताड़ना का शिकार हो रही है। छिंदवाड़ा जिले में भारिया जनजाति की महिला कर्मचारी को पहले विभागीय रेंजर ने प्रताड़ित किया अब उसके बाद अजाक थाना से लेकर जांच व कार्यवाही में शामिल संबंधित व्यक्ति भी प्रताड़ना में शामिल हो गये है। 

प्रताड़ना की शिकायत पर समझौता का बना रहे दबाव

पूर्व वन मंडल छिंदवाड़ा के वन परिक्षेत्र अधिकारी सुरेंद्र सिंह राजपूत द्वारा पूर्व में विभागीय महिला कर्मचारी के साथ की गई अशोभनीय हरकतों से तंग आकर और रेंजर के अश्लील व्यवहार एवं छेड़छाड़ की शिकायत उच्च अधिकारियों,  पुलिस अधीक्षक, कलेक्टर को किए जाने के बाद गठित की गई परिवाद जाँच समिति के समक्ष उपस्थित होने पर पीड़ित महिला से लगभग 3:30 घंटे अनावश्यक बातें पूछी गई और उन्होंने यह भी बताया कि जांच समिति की दो महिला सदस्यों और एक पुरुष सदस्य द्वारा यह दबाव बनाया गया कि प्रकरण में समझौता कर लो और हम आपका 3 माह का अवकाश स्वीकृत करा देते हैं। 

बयान लेने के नाम पर ही कर रहे प्रताड़ित 

इस मामले में प्रताड़ित महिला कर्मचारी द्वारा समिति के सदस्यों से यह निवेदन किया गया कि मुझे न्याय चाहिए और आरोपी रेंजर के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज होना चाहिए परंतु समिति के 3 सदस्य पीड़ित महिला कर्मचारी से बार-बार इस प्रकरण में समझौता करने की बात कर रहे है। वहीं इस मामले में पीड़ित महिला कर्मचारी ने कहा कि मेरे द्वारा प्रकरण में समझौता करने से इनकार करने पर दिनांक 26 सितंबर 2020 को समिति की महिला सदस्य द्वारा मोबाइल पर सूचना दी गई कि आपके बयान लेना है। वहीं पीड़ित महिला का कहना है कि उसके बयान 21 सितंबर 2020 को सादे कागज पर समिति के सदस्यों ने लिए थे। जबकि पीड़ित महिला द्वारा बयान लेते समय कहा गया था कि नोट शीट पर बयान लिए जाये परंतु समिति के पुरुष सदस्य विनोद तिवारी द्वारा मुझ पर यह दबाव बनाया गया कि सादे कागज पर बयान दो उसके बाद नोट शीट पर लेंगे, मुझसे विनोद तिवारी द्वारा सादे कागज पर बयान लिए गए। 

प्रताड़ित करने वाले के मोबाईल पर ले रहे बयान 

पीड़ित महिला कर्मचारी का कहना है कि समिति की एक महिला सदस्य द्वारा बहुत ज्यादा प्रताड़ित किया गया है। बार बार फोन कर समिति के समक्ष उपस्थित होने के लिए मानसिक रूप से दबाव बनाया गया। जबकि सुरेंद्र सिंह राजपूत से जाँच समिति ने मोबाईल पर बयान लिए है, जबकि पीड़ित महिला को बार बार जाँच समिति के समक्ष बुलाया जाकर प्रताड़ित किया जा रहा है। 

अजाक थाना प्रभारी कर रही मानसिक रूप से परेशान 

पीड़ित महिला का कहना है कि वह वैसे भी बहुत ज्यादा परेशान हो चुकी है क्योंकि अनुसूचित जाति जनजाति थाना प्रभारी रश्मि जैन द्वारा उन्हें मानसिक रूप से वैसे भी बहुत ज्यादा प्रताड़ित किया गया है। अनुसूचित जाति, जनजाति थाना छिंदवाड़ा में पीड़िता के द्वारा दिए गए बयान की प्रति फाड़ कर फेंक दी गई है, जिसकी पुष्टि स्वयं रश्मि जैन ने की है और रश्मि जैन द्वारा पर मानसिक दबाव बनाकर दोबारा बयान लिए हैं। इन बयानों में प्रकरण से संबंधित जानकारी ना होकर मेरी व्यक्तिगत जानकारी लिखी गई है, इस पर मेरी सहमति नहीं है। पीड़िता का कहना है कि इन लोगों के द्वारा इतना अधिक प्रताड़ित किया जा रहा है कि मैं अत्यधिक परेशान हो गई हूं। 

जांच समिति की कार्यप्रणाली से पीड़िता भयभीत 

परिवाद जाँच समिति के 3 सदस्यों और अनुसूचित जाति जनजाति थाना की प्रभारी रश्मि जैन की कार्यप्रणाली से मैं भयभीत हो गई हूं और यह लोग मुझे मानसिक दबाव बनाकर आत्महत्या करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं ताकि मैं आत्महत्या कर लूं यदि मेरे साथ कोई घटना घटित होती है तो इसकी जवाबदारी परिवाद जांच समिति के 3 सदस्यो, अनुसूचित जाति जनजाति थाना प्रभारी रश्मि जैन एवं जिला प्रशासनिक अधिकारियों एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों डीएफओ अखिल बंसल और  मुख्य वन संरक्षक आर एस कोरी की होगी। इसकी शिकायत पीड़िता के द्वारा द्वारा मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति, प्रधान मुख्य वनसंरक्षक, मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग, राजयपाल को भी की गयी है।

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