Wednesday, September 16, 2020

नक्सली मुठभेड़ मामले में झाम सिंह धुर्वे की मृत्यू की उच्च स्तरीय जांच कराने राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

नक्सली मुठभेड़ मामले में झाम सिंह धुर्वे की मृत्यू की उच्च स्तरीय जांच कराने राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र 

राज्यपाल ने कवर्धा जिले की घटना को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखा पत्र 


रायपुर। गोंडवाना समय। 

राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड अंतर्गत ग्राम बालसमुंद निवासी श्री झामसिंह धुर्वे के मृत्यु की घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने एवं पीड़ित परिवार को मुआवजा दिलाने के लिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है।

इस घटना को मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा नक्सली मुठभेड़ बताया गया है

राज्यपाल ने अपने पत्र में लिखा है कि श्री मोहम्मद अकबर, मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन, वन, परिवहन, आवास एवं पर्यावरण, विधि एवं विधायी विभाग ने दूरभाष पर चर्चा में घटना के संबंध में अवगत कराया है। साथ ही उन्होंने इसकी विस्तार से जानकारी एवं रिपोर्ट भेजी है, जो इस पत्र के साथ संलग्न है। उन्होंने कहा है कि मंत्री के अनुसार पत्र में उल्लेखित तथ्यों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार से है कि 06 सितम्बर 2020 को म.प्र. पुलिस द्वारा म.प्र. के बालाघाट एवं छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिला कबीरधाम माराडबरा जंगल क्षेत्र में छत्तीसगढवासी श्री झामसिंह धुर्वे निवासी ग्राम बालसमुन्द जिला कबीरधाम की गोली मारकर हत्या कर दी गई है एवं एक अन्य व्यक्ति श्री नेमसिंह धुर्वे की हत्या का प्रयास किया गया है। इस घटना को मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा नक्सली मुठभेड़ बताया गया है। 

दोनों व्यक्तियों की नक्सली गतिविधियों में कभी भी संलिप्तता नहीं रही

राज्यपाल ने पत्र में लिखा है कि उक्त घटना की जॉंच छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कलेक्टर एवं अनुविभागीय अधिकारी से कराई गई है, जिसका प्रतिवेदन संलग्न है। जिसके अनुसार दोनों व्यक्तियों की नक्सली गतिविधियों में कभी भी संलिप्तता नहीं रही है। वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर ने आपको 12 एवं 14 सितम्बर 2020 को एवं गृहमंत्री से उच्च स्तरीय जॉंच हेतु लिखित अनुरोध किया है। उल्लेखनीय है कि यह मुठभेड़ का मामला जनजातीय क्षेत्र में एवं जनजाति समाज से जुड़ा है। परिस्थितियों को देखते हुए जनभावना के अनुरूप यदि घटना की जॉंच उच्च स्तरीय कमेटी से कराई जाती है, तो वस्तुस्थिति स्पष्ट होगी और पीड़ितों को उचित मुआवजा दिया जाता है, तो उन्हें न्याय भी मिलेगा।


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