Tuesday, December 29, 2020

8 वर्ष पहले गोंडी भाषा में वन्या रेडियो की घोषणा को भूल गये मंत्री कुंवर विजय शाह

8 वर्ष पहले गोंडी भाषा में वन्या रेडियो की घोषणा को भूल गये मंत्री कुंवर विजय शाह 

कुरई ब्लॉक में गोंडी भाषा में वन्या रेडिया प्रारंभ करने के लिये किया था घोषणा 

गोंडी भाषा को मान्यता दिये जाने की मांग करोड़ों गोंडियनजनों के द्वारा कई वर्षों से की जाते रही है हालांकि अभी संविधान की आठवी अनुसूचि में आजादी के इतने वर्ष बीते जाने के बाद आज भी गोंडी भाषा को मान्यता नहीं मिल पाई है। गोंडी भाषा को पढ़ने-लिखने-बोलने वाले असंख्य गोंडियन समुदाय समय समय पर इसे स्कूलों के प्राथमिक पाठ्यक्रमों में शामिल करने की मांग भी करते रहे है लेकिन इनकी मांग को हमेशा अनसुना कर दिया जाता था। हां आदिवासी समाज के होने वाले कार्यक्रमों या जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में होने वाले कार्यक्रमों में गोंडी भाषा को लेकर कई बार घोषणा जरूर मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री, सासंद-विधायकों द्वारा जरूर की जाती रही है परंतु मंच में बोलकर उसके सभी लोग मानों भूल जाते है कि उन्होंने गोंडी भाषा को लेकर कोई बयान या घोषणा किया था। 




सिवनी। गोंडवाना समय।

जिले के जंगल सत्याग्रह में शहीद हुये लोगों के ऐतिहासिक स्थल टुरिया जहां पर वर्ष में एक बार शहीद दिवस मेला के रूप में शासन प्रशासन द्वारा कार्यक्रम किया जाता है। कार्यक्रम में स्थानीय, जिला व प्रदेश स्तर के जनप्रनिधि भी शामिल होकर हर बार नई घोषणा करके चले जाते है। इसी तरह वर्ष 2012 में लगभग 8 साल पहले भारतीय जनता पार्टी की सरकार में आदिम जाति कल्याण मंत्री कुंवर विजय शाह भी शहीद दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कुरई ब्लॉक के टुरिया में शामिल हुये थे।
        जहां पर कुंवर विजय मंत्री ने कुरई ब्लॉक में गोंडी भाषा में वन्या रेडियों प्रारंभ करने की घोषणा क्षेत्रिय विधायक श्री कमल मर्सकोले की उपस्थिति व हजारों आदिवासियों की मौजूदगी में घोषणा किया था। कुंवर विजय शाह उसके बाद लगातार मध्य प्रदेश शासन के मंत्री रहे भले ही उनका विभाग बदला हो लेकिन सत्ता में उनकी सहभागिता रहने के बाद भी गोंडी भाषा में वन्या रेडिया को कुरई ब्लॉक में प्रारंभ करवा नहीं पाये और अब तो शायद वे अपने ही द्वारा की गई घोषणा को भी भूल चुके होंगे।  

शहीद स्थल टुरिया में की थी घोषणा 

भारतीय जनता पार्टी की सरकार में मध्य प्रदेश में जब कुंवर विजय शाह आदिम जाति कल्याण मंत्री थे तो उन्होंने सिवनी जिले के बरघाट विधानसभा क्षेत्र के जनजाति बाहुल्य ब्लॉक कुरई में जंगल सत्याग्रह के टुरिया में वर्ष 2012 में शहीद स्मारक स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में बरघाट विधायक कमल मर्सकोले एवं हजारों की संख्या में उपस्थित आदिवासी जनसमुदाय के बीच में गोंडी भाषा में वन्या रेडियों प्रांरभ किया जायेगा और कुरई क्षेत्र में मध्य प्रदेश में सरकार नि:शुल्क रेडिया भी प्रदान करेगी परंतु वर्षों के बीत जाने के बाद भी मंत्री कुंवर विजय शाह के द्वारा की गई घोषणा भी झूठी ही साबित हुई। वहीं हम यह भी कह सकते है मंच में घोषणा करने के बाद अब तक तो वह भूल भी चुके होंगे। वहीं कार्यक्रम में मौजूद जनजाति समाज के लोगों को आज भी याद है कि कुंवर विजय शाह ने गोंडी भाषा में वन्या रेडिया प्रारंभ करने के लिये घोषणा किया था। 

मैँ भी हंू गोंडवाना का लाल कहने वाले मुख्यमंत्री भी कर चुके है गोंडी भाषा को लेकर कई घोषणाएं 


हम आपको बता दे कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के चौथे कार्यकाल के पहले मध्य प्रदेश में तीन पंचवर्षीय कार्यकाल तक मुख्यमंत्री रहे और इसी दोरान उन्हें आदिवासी सामाजिक संगठनों के द्वारा हमेशा ज्ञापन सौंपा जाता रहा है कि गोंडी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिये प्रयास करे या फिर कम से कम मध्य प्रदेश में ही इस प्राथमिक पाठयक्रम में ही शामिल कर लिया जाये अथवा इसे राज्यभाषा का ही दर्जा दिया जाये। वहीं जब कभी भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जनजाति बाहुल्य जिलों में या उनके सामाजिक संगठनों के कार्यक्रमों में जाते थे तो हमेशा गोंडी भाषा को लेकर भी अपनी बात जरूर रखते थे।
        वहीं हम आपको यह भी याद दिला दे कि छिंदवाड़ा जिले के हर्रई में अखिल भारतीय गोंडवाना गोंड समाज महासभा का वार्षिक अधिवेशन हुआ तो वहां पर भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि मैं भी हू गोंडवाना का लाल और गोंडी भाषा को राज्य भाषा का दर्जा मैं दिलाऊंगा लेकिन मुख्यमंत्री रहते हुये भी उन्होंने कोई निर्णय नहीं लिया था और न ही वे गोंडी भाषा को राज्य भाषा का दर्जा दिला पाये थे। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ सरकार में जरूर प्राथमिक स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल कराने की पहल की गई थी इस संबंध में प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई थी। वहीं मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बदल जाने के बाद गोंडी भाषा को प्राथमिक पाठ्यक्रम में शामिल किये जाने का मामला भी दबता हुआ ही  दिखाई दे रहा है। 

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