Tuesday, September 14, 2021

पेंच नहर में ठेकेदार व विभागीय अधिकारियों ने किया करोड़ों का भ्रष्टाचार व घटिया निर्माण से किसान हो रहे परेशान

पेंच नहर में ठेकेदार व विभागीय अधिकारियों ने किया करोड़ों का भ्रष्टाचार व घटिया निर्माण से किसान हो रहे परेशान 




सिवनी। गोंडवाना समय।

पेंच नहर का श्रेय लेने के लिये सिवनी जिले के जनप्रतिनिधियों ने जिस तरह से ढिंढौरा पीटा था उनमें से अधिकांश जनप्रतिनिधियों व नेताओं को मजबूरी में मौन व्रत रखना पड़ रहा है।


पेंच नहर में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल के दौरान व कमल नाथ सरकार के दौरान निर्माण कार्य घटिया करने के साथ ही ठेकेदार को भुगतान करने में विभागीय अधिकारियों ने ज्यादा दिलचस्पी दिखाया है। पेंच नहर निर्माण को भ्रष्टाचार व आर्थिक अनियमितता में तब्दील करने वाले विभागीय तकनीकि अधिकारी व ठेकेदार ने तो अपना जेब और तिजोरी सरकारी धन दौलत को लूटकर भर लिया है।
             

वहीं किसानों को पेंच नहर का इंतजार करने के साथ ही पेंच नहर का घटिया निर्माण कार्य करते हुये परेशान होने के लिये किसानों को मजबूर कर दिया है। सिवनी जिले में सांसद ढाल सिंह बिसेन ने इस संबंध में आज तक कोई सवाल जवाब तलब नहीं किया है। सांसद डॉ ढाल सिंह बिसेन की चुप्पी से ऐसा लगता है कि पेंच नहर के ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों के द्वारा किये गये भ्रष्टाचार का वे खुला समर्थन कर रहे है। वहीं सिवनी विधायक ने जरूर पेंच नहर के भ्रष्टाचार व घटिया निर्माण को लेकर अपनी ही सत्ता सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश किया है परंतु विधायक के द्वारा की गई शिकायत पर भी कोई ठोस कार्यवाही होती दिखाई नहीं दे रही है।
          

 
इसके साथ ही केवलारी, बरघाट व लखनादौन विधानसभा क्षेत्र के विधायक तो इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। वहीं यदि हम बात करें छिंदवाड़ा जिले के पूर्व मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ की तो उनके कार्यकाल में ही पेंच नहर का घटिया निर्माण व भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा है। इसलिये उनसे उम्मीद करना भी उचित नहीं है।
            इसके साथ ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सरकार में भी पेंच नहर का कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता ही जा रहा है इसलिये शिवराज सरकार भी किसानों व सिवनी जिले की जनता को उम्मीद ही नहीं करना चाहिये कि पेंच नहर के भ्रष्टाचारियों पर कोई कार्यवाही होगी और किसानों को समय पर पानी मिल पायेगा। 

बिना किसी नापजोख के ही कर दिया भुगतान 


जल संसाधन विभाग पेंच व्यपवर्तन परियोजना के नहर संभाग में सिवनी ब्रांच केनाल (नहर) का 156 करोड़ रुपए का ठेका मेन्टाना को दिया गया। मेन्टाना कंपनी ने अधिकारियों पर राजनैतिक दबाव डालकर ठेका की पूरी राशि लेकर नहर का घटिया और अधूरा काम छोड़कर चली गई है। इस नहर की सबसे बड़ी विशेषता यह कि अधिकारियों ने बिना किसी नापजोख के ही भुगतान कर दिया है उन्होने देखा ही नहीं काम कितना हुआ है, यदि उनका ध्यान घटिया एवं अधूरे निर्माण पर जाता तो ठेकेदार को शायद भुगतान नहीं होता।

नहर के अपूर्ण व घटिया बनने से सबसे ज्यादा प्रभावित सिवनी के विधानसभा क्षेत्र के किसान


बताया जाता है कि तत्कालीन कार्यपालन यंत्री सरदार मनमोहन सिंह ने लगभग 90 करोड़, राजीव फिरके ने लगभग 55 करोड़, टेकाम ने भी लगभग 10-12 करोड़ एवं अजय वर्मा ने लगभग 3 करोड़ कर भुगतान कर सब चलते बने है वहीं नहर का काम अधूरा पड़े रहने के साथ ही एवं घटिया स्तर का हुआ है। इसकी कोई जांच नहीं हो रही है। नहर के अपूर्ण व घटिया बनने से सबसे ज्यादा प्रभावित सिवनी के विधानसभा क्षेत्र के किसान है। जहां किसानों को नहरों से पानी सिंचाई के लिये नहीं मिल पा रहा है। वहीं सिवनी विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री दिनेश राय (मुनमुन) ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री सहित वरिष्ठ अधिकारियों को भी किया यहां तक इस संबंध में उन्होंने विधानसभा में प्रश्न उठाया है किन्तु अभी तक प्रभावी कार्यवाही नहीं हुई है। हालांकि सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार विभाग ने मेन्टाना की सिक्यूरिटी डिपाजिट जब्त कर ली है। 

जाते-जाते करोड़ों का भुगतान, मेंटना के कार्यों के लिये बने जांच आयोग 

कार्यपालन यंत्री टेकाम के सेवानिवृत होने के बाद अजय वर्मा को चार्ज दिया गया किन्तु उन्होने देखा कि ठेकेदार द्वारा अधूरा और घटिया कार्य किया जा रहा है। वे जांच में फंस सकते हैं तो वे चलते बने किन्तु उन्होंने जाते-जाते लगभग 3 करोड़ का भुगतान कर दिया। वहीं कार्यपालन यंत्री अजय वर्मा के जाने के बाद कमान एस.एस. मुकासदार को दी है, जो वहां काम नहीं करना चाहते है। मेन्टाना जिसने प्रदेश की कई सिंचाई परियोजनाओं में अधूरे काम कर पूरी राशि निकाल ली, कही अधूरा काम है, कहीं परियोजनाओं की लागत बढ़ा दी एवं एडवान्स ले ली है किन्तु विभाग नाम मात्र की कार्यवाही करता है जबकि जांच आयोग बनाकर प्रदेश की सभी योजनाओं की समीक्षा करनी चाहिये ।

60 करोड़ के नये प्रस्ताव की तैयारी, सिंचाई काम्लेक्स का दे दिया ठेका 

बताया जाता है 10 करोड़ में काम पूरा नहीं होगा तो विभाग ने नये प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है जिससे 60 करोड़ में नहर को पक्की करण का प्रस्ताव भी है। वहीं इस मामले में छिंदवाड़ा के प्रभारी मंत्री कमल पटेल को मेन्टाना के द्वारा पूरे प्रदेश में सिंचाई का कार्य करने के बाद सभी जगह अधूरे-घटिया निर्माण की शिकायतें मिलने के बाद भी कमलनाथ सरकार ने 5000 करोड़ का सिंचाई काम्पलेक्स का ठेका दिया था, जिसमें 500 करोड़ एडवांस लिया और आज तक कुछ भी कार्य नहीं हुआ है। प्रभारी मंत्री कमल पटेल ने कहा कि सरकार ने इस संबंध में लोकायुक्त में शिकायत की। 

पेंच नहर घटिया निर्माण, ठेकेदार व विभागीय तकनीकि अधिकारियों की मिलीभगत उजागर 

सिवनी जिले में पेंच परियोजना की नहर सिवनी ब्रांच केनाल के निर्माण कार्य में बिना स्वीकृति के कार्य कराया गया है। नहर निर्माण त्रुटि पूर्ण है, कार्य का ठेकेदार को एडवांस में करोड़ों रूपए का भुगतान कर दिया गया है। बिना माप दर्ज किए प्रतिशत कार्य के आधार पर भुगतान किया गया है। वहीं अब  तो स्थिति यह है कि विभाग के अधिकारी भी ये बता पाने असमर्थ है कि किस नहर में कितना कार्य होना था, कितना कार्य हुआ है और कितना कार्य शेष है क्योंकि विभाग द्वारा माप दर्ज करने का कोई दस्तावेज तैयार नहीं किया गया है। जिसका लाभ लेकर नहर कार्य में असंतुलित भुगतान किया गया है और कार्य आज भी अधूरा पड़ा है। अब धन के अभाव में नहर का कार्य लगभग बंद है क्योंकि ठेकेदार अब वापस पैसा नहीं खर्च करना चाहता। वहीं इन दिनों विभागीय तौर पर कार्य कराया जाकर लीपा पोती की जा रही है।
            इस वर्ष ठेकेदार के जमा राशि में से 10 करोड़ की राशि निकालकर किए गए कार्य को पुन: करना बताया गया है। विगत वर्षो में गलत भुगतान की जांच एक पूर्व अपर मुख्य सचिव ने बंद करा दी थी, नहर से पानी नहीं मिलने, एडवांस भुगतान एवं घटिया निर्माण की शिकायत पर जांच कराई गई किन्तु जांच रिपोर्ट पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है।
                रिपोर्ट पर विभागीय जांच कराई जाती है तो सत्य सामने आ सकता है। सिवनी ब्रांच केनाल की डी 2, डी 3, डी 4 नहर से पानी मिलने की सम्भावना नहीं है क्योकि लगभग 25 करोड़ का काम बाकी है एवं पुल पुलिया भी गलत बने हैं। इसी स्थिति में नहर पक्की करने का टेंडर लगाने की बात की जा रही है जिससे पुरानी कमियां छुप जाये एवं पानी देना टाला जाये।

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