Monday, November 1, 2021

सरकारी स्कूल में बच्चों के साथ शिक्षिका तिलोत्तमा कटरे ने मनाया दीपोत्सव

सरकारी स्कूल में बच्चों के साथ शिक्षिका तिलोत्तमा कटरे ने मनाया दीपोत्सव

बच्चों को मिठाई, गिफ्ट, फुलझड़ियां देकर उनके साथ दीप जलाये और दीपोत्सव का पर्व मनाया

तिलोत्तमा कटरे, एक जुनुन की तरह बच्चों को शिक्षा माहौल देने का काम कर रही है 

अंकुश चौहान, ब्यूरो चीफ
मो.नं.-8458970870
बालाघाट। गोंडवाना समय। 

कोरोना महामारी के दो साल बाद इस वर्ष बच्चे स्कूल पहुंच है बल्कि आगामी दिनों में आने वाले दीपोत्सव को भी वह उत्साहपूर्वक मना पायेंगे। हालांकि हर उम्र और हर वर्ग के लिए दीपोत्सव का पर्व खुशियों से भरा होता है लेकिन इसमें कपड़े से लेकर मिठाई और पटाखों को फोड़ने की ललक बच्चों में ज्यादा दिखाई देती है।
      


 चूंकि बीते दो वर्षो से कोरोना के कारण आर्थिक मंदी के कारण लोगों किसी तरह अभी खड़े हो सके है लेकिन ग्रामीण अंचलो में आज भी ग्रामीण परिवारो में आर्थिक मंदी का असर देखा जा सकता है, ऐसे में गरीब परिवारों से आने वाले बच्चे भी खुशियों के साथ दीपावली मनाये, इसके लिए स्कूल शिक्षिका तिलोत्तमा कटरे ने एक नई पहल करते हुए दीपोत्सव के पूर्व ग्रामीण परिवेश से आने वाले बच्चों के साथ दीपोत्सव की खुशियां मनाई और उनके चेहरे पर मुस्कान लाने का काम किया।

बच्चों के चेहरे में भी मिठाई, बिकिस्ट और पटाखे पाकर खुशी की मुस्कान देखी गई।

उनके कार्यो की खुशबु ही उनकी पहचान है


जिले के सीमा क्षेत्र से लगे रजेगांव के समीप ग्राम पंचायत बगड़मारा की शिक्षिका तिलोत्तमा कटरे, आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है, उनके कार्यो की खुशबु ही उनकी पहचान है। बच्चों को खेल-खेल में शिक्षित करने और खासकर ग्रामीण परिवेश के बच्चों को प्रायवेट स्कूलों के समकक्ष खड़ा करने की मंशा से शिक्षिका तिलोत्तमा कटरे, एक जुनुन की तरह बच्चों को शिक्षा माहौल देने का काम कर रही है, उनके स्कूल में आने वाले बच्चों की पढ़ाई के प्रति जुनुन और एक शासकीय स्कूल को प्रायवेट स्कूल की टक्कर में खड़ा करने की लगन से अब क्षेत्र के अभिभावक भी अपने बच्चों को शासकीय स्कूल भेजने में रूचि दिखा रहे है, जिसका परिणाम है कि स्कूल में बच्चों की दर्ज संख्या पहले की अपेक्षा बड़ी है। एक जानकारी के अनुसार वर्तमान में स्कूल में पहली और दूसरी में बच्चों की दर्ज संख्या 56 है जो अन्य किसी शासकीय स्कूल से कहीं ज्यादा है।

बगड़मारा सरकारी स्कुल, अन्य शासकीय स्कूलों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत है


आज जहां सरकारी स्कुलों की अव्यवस्था के चलते अधिकतर अभिभावक अपने बच्चो को प्रायवेट स्कूल में पढ़ाना चाहते है। वहां जिले की सीमा में स्थित रजेगांव के समीप ग्राम पंचायत बगड़मारा सरकारी स्कुल, अन्य शासकीय स्कूलों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत है।
            यहां पदस्थ शिक्षिका तिलोत्तमा कटरे के अथक प्रयासों से खंडहरनुमा भवन भी बोलने लगा है। शिक्षा एवं बच्चों के प्रति उनका जुनुन ऐसा है कि वह सरकारी स्कुल को भी प्राईवेट स्कुल से बेहतर बनाकर सालभर सकारात्मक गतिविधि करते रहती हैं, ताकि बच्चों में शिक्षा के प्रति लगन पैदा हो और वह खुद स्कूल आने के लिए प्रेरित हो। 

स्कूल परिसर को दीपोत्सव पर्व जैसे सजाया 


चूंकि आगामी दिनो में दीपोत्सव का बड़ा पर्व दीपावली है जो खुशियों का त्यौहार है, जिसे देखते हुए शिक्षिका तिलोत्तमा कटरे ने ग्रामीण परिवेश से आने वाले बच्चों के साथ दीपोत्सव का पर्व मनाने के भाव से पूरे स्कूल परिसर को ऐसे सजा दिया गया जैसे दीपोत्सव पर हम अपने घर को सजाते हैं। वही उन्होंने बच्चों के साथ दीपोत्सव पर्व मनाते हुए बच्चों को मिठाई, गिफ्ट, फुलझड़ियां देकर उनके साथ दीप जलाये और दीपोत्सव का पर्व मनाया।

स्कूल की दीवारों पर पहाड़ा सहित पाठ्यक्रम को उतारा है

गौरतलब हो कि शिक्षिका तिलोत्तमा कटरे के अथक प्रयास और निजी खर्च से आज बगड़मारा का यह शासकीय स्कूल किसी प्रायवेट स्कूल से कम नजर नहीं आता है। जहां शिक्षिका द्वारा पूरे स्कूल भवन का रंगरोगन के साथ ही संवारा गया है, वहीं स्कूली बच्चे, आसानी से गिनती, पहाड़ा और अंग्रेजी के शब्दों को पढ़ और समझ सके, इसके लिए उन्होंने दीवारों पर पहाड़ा सहित पाठ्यक्रम को उतारा है, यही नहीं बल्कि स्कूल में बच्चों के बैठने के लिए टेबल, कुर्सियां सहित पठन पाठन से जुड़ी सामग्री शिक्षिका तिलोत्तमा कटरे सालों से अपने निजी खर्च से उपलब्ध कराती आ रही है, जो जिले के शासकीय स्कूलों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत है।

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