Monday, December 27, 2021

वर्ष 1951 के बाद षड़यंत्रपूर्वक तरीके से आदिवासियों को अलग-अलग करने के उद्देश्य से धर्मकोड कॉलम हटा दिया गया

वर्ष 1951 के बाद षड़यंत्रपूर्वक तरीके से आदिवासियों को अलग-अलग करने के उद्देश्य से धर्मकोड कॉलम हटा दिया गया 

जाति जनगणना कॉलम में आदिवासी धर्म कॉलम होना जरुरी 


बालाघाट। गोंडवाना समय।

वर्ष 1951 के बाद से ही लगातार षड़यंत्रपूर्वक तरीके से आदिवासियों को अलग-अलग करने के उद्देश्य से धर्मकोड कॉलम हटा दिया गया है। जिसका परिणाम ये रहा कि वर्तमान समय में आदिवासी समाज एक कबीले के रुप में न होकर अलग-अलग धर्म में बंट कर रह गया है और अपने मूल अस्तित्व को खोता जा रहा है।


जिसके कारण ही आदिवासी समाज को अपने हक और अधिकार से भी वंचित होना पड़ रहा है। उक्त बाते 25 दिसंबर 2021 को नूतन कला निकेतन में आयोजित हुए अखिल भारतीय आदिवासी धर्म परिषद भारत के प्रांतीय अधिवेशन में राष्ट्रीय अध्यक्ष विश्वनाथ वाकड़े ने कहीं।

उन्होंने कहा कि समस्त आदिवासियों को एक कबीले के रुप में एकजुट करने के उद्देश्य से ही प्रांतीय अधिवेशन का आयोजन कर प्रांतीय कार्यकारणी का गठन किया है।

संगठित होने के लिये धर्म कॉलम जरुरी


अधिवेशन में राष्ट्रीय अध्यक्ष वश्वनाथ वाकड़े ने कहा कि आदिवासियों को संगठित करना है तो उसके लिए जरुरी है कि जाति जनगणना कॉलम में आदिवासी धर्म कॉलम होना जरुरी है लेकिन इसे आजादी के बाद षडयंत्र पूर्वक तरीके से हटा दिया गया है और इस कॉलम को लिखने के लिए जमीनी स्तर से प्रयास करना होगा तब ही कुछ किया जा सकता हैं।

गोंडी भाषा को आठवी अनुसूची में किया जाये शामिल


अधिवेशन में राष्ट्रीय सचिव मेघलाल मुंडा ने कहा कि गोंडी भाषा को आठवीं अनुसूची में सम्मिलत किया जाना चाहिए, जिससे की सबसे प्राचीन भाषा को सहेजा जा सके। इसके साथ ही उन्होंने वन अधिकार अधिनियम, वनग्राम विस्थापन नीति भू राजस्व संहिता, पेसा एक्ट, गौण खनिज अधिनियम, एक्ट्रोसिटी एक्ट, संवैधानिक अधिकार के प्रति भी आदिवासी समाज को एकजुट करने के उद्देश्य से प्रांतीय अधिवेशन का आयोजन किया गया हैं।

भुवन सिंह कुर्राम बने प्रदेश अध्यक्ष 


प्रांतीय अधिवेशन के कार्यक्रम अध्यक्ष की मौजूदगी में राष्ट्रीय महासचिव प्रेमशाही मुंडा ने प्रांतीय कार्यकारणी की घोषणा की है। इस दौरान भुवन सिंह कुर्राम को अखिल भारतीय आदिवासी धर्म परिषद भारत का प्रांतध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वहीं धन सिंह भलावी व द्रोपकिशोर मड़ाबी को कार्यवाहक प्रदेशध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया गया है। प्रांतीय सम्मलने की शुरूआत आदिवासी पारंपरिक नृत्य, संस्कृति, मांदर समेत अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति को देकर की गई। इस प्रांतीय अधिवेशन में बालाघाट, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, नागालेंड, तेलंगाना, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल,राजस्थान, मेघालय समेत 18 राज्यों के पदाधिकारी शामिल हुए।

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