Tuesday, December 21, 2021

मुख्यमंत्री शिवराज जी और कमल नाथ जी, छिंदवाड़ा मुख्यालय पर ठण्ड में ठिठुर रहे बच्चे, जहां सोते है वहीं पढ़ने को है मजबूर

मुख्यमंत्री शिवराज जी और कमल नाथ जी, छिंदवाड़ा मुख्यालय पर ठण्ड में ठिठुर रहे बच्चे, जहां सोते है वहीं पढ़ने को है मजबूर

आदिवासी बालक आश्रम का भवन जर्जर, सीट की संख्या में नहीं हो रही बढ़ोत्तरी 

बिना स्वेटर के हाड़ कंपाने वाली ठंड में कुकड़ रहे आदिवासी बालक आश्रम के बच्चे 

आदिवासी बालक आश्रम छिंदवाड़ा का अवलोकन करने पहुंची जीएसयू टीम तो हुआ खुलासा 

छिंदवाड़ा। गोंडवाना समय।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अक्सर अपने भांजों को कहते नजर आते है कि मामा के रहते हुये आपको किसी भी प्रकार की चिंता करने की जरूरत नहीं है सरकार आपको शैक्षणिक अध्ययन के लिये पूरी सुविधा उपलब्ध करवायेगी।


विशेषकर आदिवासी समुदाय के लिये तो मुख्यमंत्री यह कहते है कि सबसे पहला हक सरकार के खजाने में आदिवासियों का पहला हक है लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पोल छिंदवाड़ा शहर के अंदर बस स्टेंड के पीछे आदिवासी बालक आश्रम में ही खुल रही है जहां पर हाड़ कंपाने वाली ठण्ड में आदिवासी बालक बिना स्वेटर के ही पढ़ने को मजबूर है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री  कमल नाथ के गृह जिले और उनकी विधानसभा क्षेत्र छिंदवाड़ा मुख्यालय में उनके विकास और आदिवासी हितेषी होने की हकीकत आदिवासी बालक आश्रम में दिखाई दे रही है। बिना स्वेटर पहने ही बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे है। 

आप कैसे है तो बच्चों ने ठण्ड में ठिठुरते हुये कहा कि हम अच्छे है


गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन छिंदवाड़ा की टीम में शामिल देवरावेन भलावी, तुलसी धुर्वे, सुशील गुर्गा, शिवरावण तिरकाम भोई, संजय उईके, आकाश रावेन ने 20 दिसंबर 2021 को जब आदिवासी बालक आश्रम छिंदवाड़ा के निरीक्षण के बाद जानकारी देते हुये बताया कि आदिवासी बाहुल्य जिला छिंदवाड़ा के मुख्यालय में मानसरोवर कॉम्पलेक्स बस स्टेण्ड के पीछे बने आदिवासी बालक आश्रम का निरीक्षण करने जब गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन की टीम पहुंची तो वहां पर आदिवासी बच्चों से जब पूछा गया कि आप कैसे है तो बच्चों ने ठण्ड में ठिठुरते हुये कहा कि हम अच्छे है। हम आपको बता दे कि आदिवासी बालक आश्रम जो कि 120 सीटर है, जहां पर आदिवासी बच्चे पहली से लेकर आठवीं तक के यहां पर रहकर शिक्षा अध्ययन प्राप्त कर रहे है। 

70 से 80 वर्ष पुराना है भवन 


हम आपको बता दे कि आदिवासी बालक आश्रम का भवन जो कि 70 से 80 वर्ष पुराना है जो कि अपनी जर्जर अवस्था को प्रमाणित कर रहा है। आदिवासी बालकों की संख्या भी ज्यादा है जहां पर बालक जहां पर सोते है वहीं पर शिक्षक क्लास लगाकर पढ़ाते भी है। छिंदवाड़ा जिले के दूरदराज ग्रामीण अंचलों से यहां बच्चे पढ़ने आते हैं। अभी कोरोना की समस्या की वजह से 50% बच्चे ही यहां पर पढ़ पा रहे हैं नए बच्चों को अभी यहां पर एडमिशन नहीं दिया गया।

औसतन प्रतिवर्ष 300 फार्म भरते है जिसमें 120 बालक का होता है चयन 


वहीं छिंदवाड़ा जिला आदिवासी बाहुल्य जिला है जहां पर आदिवासियों की संख्या अधिक होने के कारण औसतन प्रतिवर्ष 300 से ज्यादा फॉर्म हर साल एडमिशन के लिए बच्चे भरते हैं जिनमें सिर्फ 120 बच्चों का सिलेक्शन होता है। ऐसी स्थिति में आदिवासी बालक आश्रम का पक्का भवन के साथ साथ सीट की संख्या भी बढ़ाये जाने की आवश्यकता है। ऐसी स्थिति में उन बच्चों का भविष्य खतरे में है जिन्हें अच्छा एजुकेशन के लिए छिंदवाड़ा के छात्रावास और आश्रम में रहकर पढ़ना जरूरी है लेकिन सीट संख्या सीमित होने के कारण उन्हें अपने गांव में ही पढ़ना पढ़ रहा है। जहां घर द्वार के कामकाज खेती-बाड़ी के साथ साथ अपनी पढ़ाई को करना पड़ता है।

नवोदय और एकलव्य विद्यालय में सिलेक्शन लायक पढ़ाई तक नहीं हो पाती है


गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन की टीम ने जब आदिवासी बालक आश्रम में अध्ययनरत बच्चों का एजुकेशन लेवल चेक किया तो चौथी, पांचवी क्लास में पहुंचने पर भी वह अनार, आम और गिनती लिखना सीख रहे हैं। शैक्षणिक गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिये जाने एवं पास कर दिये जाने के कारण आदिवासी समुदाय के गरीब बच्चे बचपन से ही पढ़ाई में कमजोर होते हैं। शासन प्रशासन का आदिवासी बच्चों को लेकर शैक्षणिक गुणवत्ता को लेकर गंभीरता के साथ व्यवस्था बनाये जाने की आवश्यकता है। वहीं जब जीएसयू की टीम ने आदिवासी बालक आश्रम से एकलव्य विद्यालय या नवोदय विद्यालय में चयन की जानकारी लिया तो जानकारी मिली कि आदिवासी बालक आश्रम से बहुत ही कम संख्या में बच्चों को चयन हो पाता है इससे साफ जाहिर होता है कि यहां उन बच्चों की नवोदय और एकलव्य विद्यालय में सिलेक्शन लायक पढ़ाई तक नहीं हो पाती है। 

5 से 10 पुराने गद्दे और कंबल में सोने मजबूर तो पर्दा लगाकर एक ही कमरा में लग रही कक्षायें 

जीएसयू की टीम ने जब सभी बच्चों के सोने वाले विस्तर के संबंध में जानकारी लिया तो पता चला कि लगभग 5 से 10 साल पुराने गद्दे और कंबल मिले थे उन्हीं से काम चला रहे है। ठण्ड से बचने के लिये गर्म कंबल की व्यवस्था भी सरकार नहीं दे पाई है। वहीं छठवीं, सातवीं और आठवीं वाले बच्चों को एक ही कमरे में बीच में पर्दा लगाकर अलग-अलग क्लास बनाकर पढ़ाया जा रहा था। आदिवासी बालक आश्रम में बच्चो को कक्षाबार पढ़ाई के लिये व्यवस्थित कमरे भी नहीं है। वही पहली से चौथी, पांचवी वाले बच्चों को उनके ही कमरे पर जहां पर वह सोते हैं वहीं उनकी क्लास लग रही है

जनजाति कार्य विभाग के साथ समस्याओं के समाधान के लिये करेंगे चर्चा नहीं माने बात करेंगे धरना प्रदर्शन  

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ व विधायक के साथ साथ मध्यप्रदेश जनजाति कार्य विभाग सिर्फ दिखावे के नाम पर आदिवासियों का शैक्षणिक लेवल बढ़ाने की बात करता है जमीनी स्तर पर जाएंगे तो आप पाएंगे कि आदिवासियों की बच्चों की जिंदगी की नींव इतनी कमजोर की जा रही है कितना बड़ा महल बना दिया जाए वह भी ढह जाएगा। गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन के माध्यम से हम पूरे छिंदवाड़ा जिले और मध्य प्रदेश के कोने-कोने में बने सभी आश्रम छात्रावास हॉस्टल में जाकर जायजा लेंगे कि आखिर बच्चों के साथ क्या चल रहा है और कैसे इस समस्या का समाधान होगा। गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन छिंदवाड़ा की टीम में शामिल देवरावेन भलावी, तुलसी धुर्वे, सुशील गुर्गा, शिवरावण तिरकाम भोई, संजय उईके, आकाश रावेन ने आदिवासी बालक आश्रम छिंदवाड़ा के निरीक्षण के बाद जानकारी देते हुये बताया कि इस समस्याओं को लेकर जनजाति कार्य विभाग छिंदवाड़ा से बहुत जल्दी हम बैठक करेंगे और इन सभी समस्याओं का समाधान तत्काल हो इस हेतु बात रखेंगे। अगर हमारी बातों को नहीं माना जाएगा तो उचित समय आने पर हम छिंदवाड़ा में छोटे छोटे और बड़े बड़े बच्चों के साथ धरना प्रदर्शन और आंदोलन करेंगे।


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