Thursday, February 17, 2022

प्रसूता और गर्भ में पल रहे बच्चे की जान के साथ ट्रामा सेंटर में किया जा रहा खिलवाड़ ?

प्रसूता और गर्भ में पल रहे बच्चे की जान के साथ ट्रामा सेंटर में किया जा रहा खिलवाड़ ?

इधर दर्द से तड़पती रही महिला, उधर डिलीवरी के लिए चिकित्सक की राह तकते रहे परिजन

मैडम बोली-जब तक ड्राइवर लेने नहीं आएगा तब तक वह ट्रामा सेंटर नहीं आएंगी

कलेक्टर से शिकायत के बाद जागा प्रशासन, दूसरे दिन कराई गई डिलीवरी

अकुंश चौहान, संवाददाता
बालाघाट। गोंडवाना समय।

एक ओर शासन प्रशासन द्वारा जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दिए जाने का दावा किया जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं को लेकर आए दिन हंगामे हो रहे हैं। जहां मरीजों के परिजन और चिकित्सक स्टाफ के बीच आए दिन विवाद देखने को मिल रहा है। ट्रामा सेंटर कि आए दिनों मिल रही इन शिकायतों के बावजूद भी यहां की अव्यवस्थाएं सुधारने का नाम ही नहीं ले रही है।
          


 इसी बीच मंगलवार शाम करीब 7 बजे जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में उस वक्त हंगामा मच गया जब कई घंटे बीत जाने के बाद भी गर्भवती महिला की डिलीवरी के लिए महिला चिकित्सक ट्रामा सेंटर नहीं पहुंची। इसी बात से नाराज प्रसूता के परिजनों ने ट्रामा सेंटर परिसर में जमकर हंगामा मचाया और मामले की शिकायत सीधे कलेक्टर से कर दी, जहां मामले का संज्ञान लेते हुए कलेक्टर डॉ गिरीश मिश्रा ने जिला अस्पताल प्रबंधन को फोन कर मामले की सूचना दी जहां मामले की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रबंधन तुरंत अव्यवस्थाओं को संभालते हुए नजर आया। जहां महिला चिकित्सक को तुरंत ट्रामा सेंटर में बुलवाकर प्रसूता का तुरंत आॅपरेशन कराया गया। वर्तमान समय में जच्चा और बच्चा दोनों खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं।

कार का ड्राइवर लेने नही गया घर, तो अस्पताल नही आई महिला चिकित्सक

 


प्राप्त जानकारी के अनुसार सोनेगांव पिपरिया के ग्राम नांदी निवासी 25 वर्षीय गर्भवती महिला श्रीमती ज्योति मान्द्रे को प्रसव पीड़ा होने पर उनके परिजनों ने डिलीवरी के लिए सोमवार की रात ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया था ।जहां चिकित्सकों ने सोनोग्राफी कर  उनके परिजनों को बताया था कि गर्भवती महिला के पेट में पल रहे बच्चे पेट में पोटी( लैट्रिन) कर दिया है।
        उसके बाद चिकित्सक टीम द्वारा तमाम तरह की फॉर्मेलिटी पूरी कर, पहले तो नॉर्मल डिलीवरी की राह देखने को कहा गया, लेकिन महिला को दर्द ना मिलने के कारण नॉर्मल डिलीवरी नहीं हो सकी। इसकी अगली सुबह मंगलवार को उक्त महिला को आॅपरेशन के लिए आॅपरेशन कक्ष में ले जाया गया लेकिन उसका आॅपरेशन करने के लिए ट्रामा सेंटर में महिला चिकित्सक ही नहीं थी।
            सुबह से लेकर दोपहर तक महिला के परिजन महिला का आॅपरेशन करने की गुहार लगाते रहे लेकिन उनके परिजनों की कोई सुनवाई नहीं हुई ।इसी बीच एक महिला चिकित्सक ने आकर प्रसूता को चेक किया लेकिन उन्होंने भी प्रसूता का आॅपरेशन नहीं किया इसके उपरांत परिजन ड्यूटी डॉक्टर डॉ रश्मि वाघमारे को फोन लगाते रहे लेकिन महिला चिकित्सक ने फोन रिसीव नहीं किया।
            जब अटेंडर नर्स ने महिला डॉक्टर को फोन लगाया तो महिला चिकित्सक ने साफ कह दिया कि उनका ड्राइवर उन्हें लेने के लिए घर नहीं आया है वे स्वयं कार चलाते हुए अस्पताल नहीं आ सकती। इसलिए जब तक ड्राइवर उन्हें लेने घर नहीं आएगा तब तक वह अस्पताल नहीं आ सकती। काफी देर बाद भी महिला चिकित्सक के अस्पताल ना पहुंचने पर प्रसूता के परिजन आक्रोशित हो गए जन्होंने ट्रामा सेंटर में जमकर हंगामा मचाते हुए व्यवस्थाओं में सुधार किए जाने की मांग की।

फिर कई सवालों को जन्म दे गई घटना

इस पूरे मामले पर यदि गौर किया जाए तो अब जहन में कई सवाल उठने लगे हैं सवाल यह है कि यदि प्रसूता के परिजन कलेक्टर को फोन नहीं करते तो आॅपरेशन थिएटर में घंटों से बिस्तर पर पड़ी प्रसूता महिला और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे का क्या होता?, सवाल यह भी है कि इसी बीच यदि प्रसूता या उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को कुछ हो जाता तो इसका जिम्मेदार कौन होता ?, सवाल यह भी है कि क्या कार्य में लापरवाही बरतने वाली महिला चिकित्सक पर कोई वैधानिक कार्यवाही की जाएगी?, और सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ट्रामा सेंटर की व्यवस्था में सुधार कब आएगा? यही सभी सवाल जिला अस्पताल प्रबंधन और ट्रामा सेंटर के जिम्मेदार अधिकारियों कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्न चिन्ह लगाते हैं

कलेक्टर ने किया फोन तो हरकत में आया अस्पताल प्रबंधन

बताया जा रहा है कि जिस महिला को प्रसव पीड़ा होने पर ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया था वह महिला कलेक्टर बंगले में काम करने वाली नौकरानी की रिश्तेदार थी जिस पर हंगामा मचा रहे लोगों ने तुरंत मामले की सूचना कलेक्टर को दी। जहां कलेक्टर डॉ गिरीश मिश्रा ने सीएचएमओ डॉ पांडेय और आरएमओ डॉ अरुण लांजेवार को फोन कर मामले से अवगत कराया।उधर  कलेक्टर का फोन आते ही अस्पताल प्रबंधन तुरंत हरकत में आ गया और मामले का संज्ञान लेते ही आरएमओ लांजेवार तुरंत ट्रामा पहुंचे जिन्होंने वस्तुस्थिति का संज्ञान लिया। जिसके तुरंत बाद उन्होंने ड्राइवर का इंतजाम किया उधर महिला चिकित्सक ने ट्रामा सेंटर आकर रात्रि करीब 8बजे महिला चिकित्सक ने डिलीवरी कराई।

 परिजनों ने सीएम हेल्पलाइन में भी की शिकायत

 उधर प्रसूता के परिजनों ने ट्रामा सेंटर में महिला चिकित्सक पर कार्य में लापरवाही बरतने, जिम्मेदारी पूर्वक काम ना करने और ट्रामा सेंटर में की व्यवस्थाओं में सुधार लाने की मांग करते हुए इस पूरे मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन क्रमांक 181 में की है।जहां उन्होंने कार्य में लापरवाही बरतने वाली महिला चिकित्सक पर वैधानिक कार्यवाही किए जाने की मांग की है।

 समय-समय पर जिम्मेदार अस्पताल का कर रहे निरीक्षण फिर भी व्यवस्थाओं में नहीं आ रहा सुधार

 आपको बताएं कि जिला अस्पताल में आए दिनों विधायक से लेकर सांसद ,मंत्री सहित कलेक्टर और अन्य प्रशासनिक अधिकारी समय-समय पर जिला अस्पताल का दौरा करते रहते हैं। वही बाहर से आने वाले मंत्री भी समय-समय पर जिला अस्पताल पहुंचकर यहां की सुविधाओं और व्यवस्थाओं का बेहतर होने का डंका पीटते हैं। बावजूद इसके भी जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं आ रहा है जहां आए दिन और अव्यवस्थाओ को लेकर मरीजों के परिजन हंगामा मचाते रहते हैं।

व्यवस्था में सुधार होना चाहिए एवं लापरवाह चिकित्सको पर होनी चाहिए कार्यवाही


मामले को लेकर की गई चर्चा के दौरान प्रसूता के रिस्तेदार संजय मेश्राम ने बताया कि ज्योति को डिलीवरी के लिए लाए थे डॉक्टर ने कहा था कि बच्चे ने पेट के भीतर लेटिंग कर दिया है मैडम बोली कि नॉर्मल डिलीवरी कराएंगे यदि नॉर्मल डिलीवरी नहीं हुई तो फिर आॅपरेशन कर देंगे। मैडम उसके बाद घर चली गई हम फोन लगाते रहे लेकिन मैडम नहीं आई बोली कि मेरा ड्राइवर घर लेने आएगा तब मैं कार में बैठकर ट्रामा सेंटर आऊंगी। यहां काफी लापरवाही बरती जा रही है इस व्यवस्था में सुधार होना चाहिए।

वहीं मामले को लेकर की गई चर्चा के दौरान प्रसूता के रिश्तेदार सूर्य प्रकाश माहुले ने बताया कि सोमवार की रात ज्योति को प्रसव पीड़ा होने पर ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया था पेट में बच्चे ने लेटरिंग कर दी थी बावजूद इसके भी प्रसूता की डिलीवरी नहीं कराई गई और ना ही किसी चिकित्सकों ने उसे चेक किया। मंगलवार का पूरा दिन हम मैडम के आने का इंतजार करते रहे लेकिन मैडम नहीं आई। जिस पर हम लोगों ने कलेक्टर को सूचना दी थी। तब जाकर मैडम अस्पताल पहुंची और मंगलवार रात करीब 8 बजे डिलीवरी हो पाई। हमने इसकी शिकायत 181 सीएम हेल्पलाइन में की है हमारी मांग है कि लापरवाह चिकित्सको पर कार्यवाही की जानी चाहिए।

वरिष्ठ अधिकारियों को मामले से अवगत कराया गया है-डॉ लांजेवार

वही इस पूरे मामले को लेकर की गई चर्चा के दौरान जिला अस्पताल आरएमओ डॉ अरुण लांजेवर ने बताया कि कलेक्टर महोदय का फोन आते ही वे तुरंत ट्रामा सेंटर गए थे। महिला चिकित्सक को तुरंत ट्रामा सेंटर बुलाकर महिला की डिलीवरी करा दी गई थी महिला के परिजनों ने कलेक्टर से मामले की शिकायत की है। वहीं हमने भी सिविल सर्जन को मामले से अवगत करा दिया है इस मामले में जो भी कार्यवाही होगी वह वरिष्ठ स्तर से होगी।

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