Thursday, April 7, 2022

पांचवी अनुसूची, पेसा कानून तथा अन्य विषयों पर राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने प्रधानमंत्री से की चर्चा

 

पांचवी अनुसूची, पेसा कानून तथा अन्य विषयों पर राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने प्रधानमंत्री से की चर्चा

पेसा कानून लागू होने से जनजातियों को उनके संवैधानिक अधिकार होंगे प्राप्त

बस्तर और सरगुजा संभाग के लिए विशेष पैकेज देने के लिए मांग की गई

रायपुर। गोंडवाना समय।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से 7 अप्रैल 2022 दिन गुरूवार को नई दिल्ली में राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने मुलाकात की। राज्यपाल ने प्रधानमंत्री से छत्तीसगढ़ में जनजातियों के साथ ही प्रदेश के विभिन्न 
समस्याओं पर चर्चा करते हुए राज्य की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी। 

पांचवी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले नगरीय क्षेत्रों में पेसा कानून लागू करने का किया अनुरोध


राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान चर्चा करते हुए पांचवी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले नगरीय क्षेत्रों में पेसा कानून लागू करने का अनुरोध किया। इसके  साथ ही कहा कि पेसा कानून लागू होने से जनजातियों को उनके संवैधानिक अधिकार प्राप्त होंगे। इसके अलावा उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पेसा कानून के संबंध में नियम बनाने के संबंध में चर्चा की। चर्चा के दौरान राज्यपाल ने प्रधानमंत्री को जनजातियों की समस्याओं से अवगत कराया। 

आदिवासी बाहुल्य जिलों में स्थित विश्वविद्यालयों को केंद्रीय जनजाति विश्वविद्यालय के रूप में उन्नत किया जाये


राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को जनजातियों के जाति नाम में मात्रात्मक त्रुटियों से अवगत कराते हुए कहा कि इससे पात्र व्यक्तियों को जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है। राज्यपाल ने इस विषय पर जल्द निर्णय लेने का भी अनुरोध किया। राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने कहा कि उन्होंने राज्य के विभिन्न जिलों के प्रवास के दौरान वहां के जनजातियों के साथ संवाद किया , उनकी समस्याआें को देखा और समझा है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से चर्चा की और राज्य के आदिवासियों के विकास के संबंध में कई निर्णय लेने की आवश्यकता बताई। राज्यपाल ने अनुरोध किया कि आदिवासी बाहुल्य जिलों में स्थित विश्वविद्यालयों को केंद्रीय जनजाति विश्वविद्यालय के रूप में उन्नत किया जाये जिससे यहां के जनजातीय समुदायों को लाभ मिल सके। 

शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं का होगा विस्तार

चर्चा के दौरान राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने बताया कि इन क्षेत्रों की जनजातियों की कला संस्कृति को भी संरक्षित करने की आवश्यकता है। इसके लिए उन्होंने अनुरोध किया कि इन जनजातियों पर शोध कर उनका दस्तावेजीकरण किया जाये जिससे इनकी संस्कृति की पहचान पूरे देश में हो सके। बस्तर और सरगुजा संभाग में निवासरत जनजातियों के समुचित विकास के लिए राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से विशेष पैकेज देने का भी अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि विशेष पैकेज मिलने से इन क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं का विस्तार होगा। युवाआें को रोजगार मिलेगा और जनजातिय समुदाय का और बेहतर विकास हो सकेगा।

आंगनबाड़ी, शहरी सामाजिक ऊषा और आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि कर उनके स्थायीकरण की दिशा में विचार करने किया अनुरोध


राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से देश के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शहरी सामाजिक कार्यकर्ताओं (ऊषा) और आशा कार्यकर्ताओं के संबंध में भी चर्चा करते हुए कहा कि ये कार्यकर्ता पूरी लगन से प्रदेश सहित देश के ग्रामीण क्षेत्रों में अपने कार्यो का संपादन कर रहे हैं। कोरोना काल में भी इनके द्वारा लगातार कार्य किया जाता रहा है। राज्यपाल ने इन कार्यकर्ताओं के कार्यो की सराहना करते हुए श्री नरेंद्र मोदी से इनके मानदेय में वृद्धि के साथ ही उनके स्थायीकरण की दिशा में भी विचार करने का अनुरोध किया। 

प्रधानमंत्री को प्रतीक चिन्ह और शॉल भेंट कर किया सम्मानित


राज्यपाल ने उत्तरप्रदेश के पूर्वांचल के चार जिलों चन्दौली, कुशीनगर, संत कबीरनगर, संत रविदास नगर को जनजाति जिलों में शामिल करने पर श्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया।

इस अवसर पर राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने प्रधानमंत्री को प्रतीक चिन्ह और शॉल भेंट कर सम्मानित किया।

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