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छिंदवाड़ा में आदिवासियों के देव स्थल को तोड़ने पर, नगर निगम के खिलाफ दर्ज कराया विरोध

छिंदवाड़ा में आदिवासियों के देव स्थल को तोड़ने पर, नगर निगम के खिलाफ दर्ज कराया विरोध 

आचार संहिता में छिंदवाड़ा नगर निगम की कार्यवाही पर आदिवासी समाज ने उठाया सवाल 

आदिवासियों की आस्था पर ठेस पहुंचाने का लगाया आरोप 


छिंदवाड़ा। गोंडवाना समय।
 

आदिवासी बाहुल्य जिला छिंदवाड़ा के छिंदवाड़ा नगर निगम की टीम ने पोला ग्राउंड में स्थित आदिवासी समाज का देव स्थल को बिना किसी सूचना जारी किए बिना किसी नोटिस जारी किए 20 अक्टूबर 2023 को बुलडोजर चला दिया और कहा कि यह नगर निगम की जगह है यह आदिवासियों की जगह नहीं है इसलिए वहां कोई भी कार्य आप नहीं कर सकते है।
                


जानकारी मिलने पर आदिवासी समाज सहित एससी, ओबीसी व मूल निवासी समाज के लोग एकत्रित होकर उक्त घटना का विरोध करते हुए पोला ग्राउंड में शाम 7:00 बजे तक अपना विरोध दर्ज कराते रहे। इस दौरान नगर निगम कमिश्नर सहित निगम के समस्त अधिकारियों के समक्ष उक्त घटना का नुकसान पंचनामा बनाया गया।
                

वहीं सांस्कृतिक स्थल का पुनर्निर्माण करने के लिए निगम को बताया गया और साथ ही जिन-जिन अधिकारियों ने उक्त जगह पर बुलडोजर चलाया है उन पर कठोर करवाई करने के लिये एसटी, एससी एक्ट के अंतर्गत मामला कायम करते हुये कार्यवाही की मांग की गई है। 

निगम कमिश्नर हटाओ छिंदवाड़ा बचाव का नारा लगाया गया


उक्त घटनास्थल पर नगर निगम महापौर से लेकर आदिवासी समाज, यादव समाज, बारिया समाज, मेहरा समाज, चर्मकार समाज सहित अन्य मूल निवासी समुदाय के वरिष्ठ जन उपस्थित रहे। इस दौरान मूलनिवासी समाज के लोगों ने कहा कि नगर निगम छिंदवाड़ा का यह कृत्य धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला रवैया है उसके खिलाफ निगम कमिश्नर हटाओ छिंदवाड़ा बचाव का नारा लगाया गया।

खंडेरा बाबा, मालदेव और साथी ही मुठवा बाबा की पूजन करता है आदिवासी समाज


आदिवासियों ने कहा कि यह धार्मिक स्थल किसी नगर निगम का नहीं है यह आदिवासियों का पूजनीय स्थल है। यहां पर खंडेरा बाबा, मालदेव और साथी ही मुठवा बाबा, इन देवताओं को आदिवासी मूलनिवासी समाज के लोग ही पूजते हैं। यह जगह निगम की नहीं आदिवासियों की है और यहां पर किसी भी तरीके से इस देश की मूल मलिक आदिवासियों को डरा धमकाकर उनके सांस्कृतिक स्थल को आप तोड़ नहीं सकते यह बात कह कर उपस्थित आदिवासी समाज के लोगों ने अपनी आवाज बुलंद किया।

आदिवासी समाज की आस्था को ठेस पहुंचने का काम हो रहा है


इसके साथ ही पोला ग्राउंड में खंडेरा में रावण पूजा हजारों सालों से आदिवासी समाज कर रहा है और इस जगह रावण दहन करके उनकी आस्था को ठेस पहुंचने का काम हो रहा है। इसके विरोध में पूरी समाज में आवाज उठाई गई। वहीं कहा गया कि यदि रावण दहन नहीं रुकता है तो छिंदवाड़ा जिले में उपस्थित मूल निवासी समाज इसका पुरजोर विरोध करेगा और रावण दहन करने वाली समिति के ऊपर एसटी, एससी एक्ट सहित अन्य धाराओं पर मामला दर्ज कराया जाएगा इस बात की चेतावनी दी गई।
                आदिवासी और मौजूद कुछ यादव समाज की युवाओं ने कहा कि मूल निवासी समाज के महापुरुषों और देवी देवताओं का अगर अपमान होता है और गांव में किसी भी तरीके से इस प्रकार से रावण दहन कार्यक्रम होता है तो ऐसे लोगों पर कठोर कानूनी कार्रवाई के लिए प्रत्येक थाना और चौकी में ज्ञापन सोपा जाएगा। इस बात की सूचना 20 अक्टूबर 2023 को धरना देने वाले तमाम समुदाय ने कहा। 

आदिवासियों की धर्मस्थली से खिलवाड़ बर्दास्त नहीं-भीम सेना

छिंदवाड़ा मुख्यालय में दिनांक 20 अक्टूबर 2023 दिन शुक्रवार दोपहर लगभग 2:30 बजे पोलाग्राउण्ड में आदिवासी समुदाय के धार्मिक स्थल मालदेव बाबा, मठुआ बाबा, खंडेरा बाबा को नगर निगम अधिकारी कर्मचारी के द्वारा तोड़ा गया। आचार संहिता में भी निगम के अधिकारी कर्मचारी ने आकर जे.सी.बी. मशीन से जबरन धार्मिक स्थल को तोड़ा गया जिसकी भीम सेना सहित संपूर्ण आदिवासी समाज ने निंदा की है। वहीं प्रशासन के इस कृत्य से संपूर्ण आदिवासी एवं दलित समाज में आक्रोष व्याप्त है।
                 उक्ताशय की जानकारी भीम सेना प्रमुख शिवम पहाड़े ने देते हुये कहा यह आदिवासी समाज के लोगों की आस्था के साथ जानबूझकर खिलवाड़ और सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने का कार्य किया गया है। यह सोची समझी साजिश नगर निगम कमिश्नर ने जातिगत द्वेष भावना से निदंनीय कार्य कराया गया है।
                इसके पश्चात आदिवासी समाज एकत्रित होकर नगर निगम के समस्त आयुक्त अधिकारी, कर्मचारी के समक्ष उक्त घटना की निष्पक्ष जांच कर कर्मचारी व अधिकारी के एट्रोसिटी एक्ट के तहत एफ.आई.आर.दर्ज कर न्याय दिलाया जायें एवं उक्त धार्मिक स्थल को भव्य बनाने में तुरंत कार्यवाही की जायें।
                जिसमें मुख्य रूप से प्रहलाद सिंह कुशरे, देवरावेण भलावी, बालाराम परतेती, शिवरावण तिरगाम, मिथुन धुर्वे, संजय परतेती, शिवम पहाडेÞ, संजय विश्वकर्मा, शैलेन्द्र मर्सकोले, मोहरू पटेल, गणपत यदुवंशी, शैलेन्द्र मर्सकोले, ज्ञानेश्वर गजभिये, तुलसी धुर्वे, मदन बरखाने, किशोर वंशकार, पप्पू गोनेकर, सिद्धांत थनेसर, मनीष मृदुलकर, शिव कुमार सिरसाम, सोनू उइके, राजा धुर्वे, अनिल परतेती, मोनू धुर्वे, अरविंद मोहबे, दिनेश इवनाती आदि। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोग उपस्थित थे ।

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