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अर्जुन और आनंद दोनो की नियत में खोट था, दोनो दुर्भावना से ग्रस्त-मोहन चंदेल

अर्जुन और आनंद दोनो की नियत में खोट था, दोनो दुर्भावना से ग्रस्त-मोहन चंदेल 

मोहन सिंह चंदेल ने कहा कि मैं अपनी बात पार्टी के प्रदेश एवं राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष रखूंगा


सिवनी। गोंडवाना समय। 

मध्यप्रदेश में बुरी तरह हारी कांग्रेस पार्टी में हार का ठीकरा हारने वाले विधानसभा के प्रत्याशी दुर्भावनावश फुड़वाने में तुले हुये है। अति उत्साह में जीत का सेहरा परिणाम आने के पहले ही अपने समर्थकों के साथ स्वयं के सिर पर बांधने वाले कांग्रेस पार्टी के बरघाट व सिवनी विधानसभा के प्रत्याशी कांग्रेस पार्टी के नेताआें पर निष्कासन की कार्यवाही कराने में जुटे हुये है।
            


इसकी शुरूआत जब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ थे तभी हो चुकी थी जिसमें सिवनी सिवनी जिले में कांग्रेस नेता मोहन सिंह चंदेल व राजा बघेल पर निष्कासन की गाज गिराई गई है। इसके बाद कांग्रेस का विरोध मोहन सिंह चंदेल व राजा बघेल के समर्थकों के द्वारा किया जा रहा है।
        वहीं कांग्रेस जो कि सिवनी विधानसभा में जातिगत समीकरण हमेशा से दरकिनार करते हुये चुनाव जीतने का सपना देखती रही है वह 2023 में चकनाचूर हो गया है। मोहन चंदेल ने कांग्रेस पर निष्कासन कराने की कार्यवाही को एकपक्षीय बताते हुये अपनी बात पत्रकारवार्ता में रखा है।  

अर्जुन सिंह काकोड़िया मुझसे दुर्भावना रखते हैं 


कांग्रेस से निष्कासित किये गये मोहन सिंह चंदेल ने पत्रकारवार्ता में बताया कि हाल ही में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधि का झूठा आरोप लगाते हुए मुझे पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।
             इस संबंध में मोहन सिंह चंदेल ने अपना पक्ष रखते हुये बताया कि मेरे निष्कासन की कार्यवाही दुर्भावनावश की गई है। मुझे ऐसा लगता है कि बरघाट के पूर्व विधायक श्री अर्जुन सिंह काकोड़िया मुझसे दुर्भावना रखते हैं। इसका परिचय वे विगत पंचायत चुनाव के दौरान भी दे चुके हैं।
        जबकि पंचायतों के चुनाव गैर दलीय होते हैं और उसमें आज तक कांग्रेस या भाजपा किसी भी पार्टी ने कोई कार्यवाही नहीं की है। जबकि एक ही दल से अनेक लोग पंचायत के चुनाव लड़ते रहे हैं। पार्टी विरोधी कार्य करने का आरोप झूठा एवं निराधार है। 

निष्कासन तो अर्जुन सिं काकोड़िया का होना चाहिये था 

बरघाट क्षेत्र के अनेक कार्यकतार्ओं ने स्वयं बयान जारी करके कहा है कि श्री अर्जुन काकोड़िया अपने कर्मो से ही हारे हैं। उस पर किसी अन्य पर दोषारोपण करना ठीक नहीं है। मोहन सिंह चंदेल ने कहा कि मेरे निष्कासन की प्रक्रिया गलत है।
            बिना मेरा पक्ष सुने बिना एक पक्षीय कार्यवाही की गई है। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विपरीत है। निष्कासन तो श्री अर्जुन काकोड़िया का होना चाहिए क्योंकि उन्होने विगत नगर परिषद के चुनाव में कांग्रेसी पार्षदों को भाजपा की परिषद बनाने में सहयोग हेतु प्रोत्साहित किया। यह घोर पार्टी विरोधी कृत्य है।

अर्जुन और आनंद दोनो ने मेरी छबि धूमिल करने के उद्देश्य से कराई कार्यवाही 

मोहन सिंह चंदेल ने कहा कि मुझे पक्की जानकारी है कि विधान सभा सिवनी के प्रत्याशी आनंद पंजवानी ने भी शिकायत की है। दोनो ही दुर्भावना से ग्रस्त लगते हैं। आम जनता एवं पार्टी कार्यकतार्ओं के बीच मेरी छबि को धूमिल करने के उद्देश्य से कार्यवाही कराई गई है। इनकी नीयत में ही खोट था। अगर ऐसी कोई बात थी तो चुनाव प्रक्रिया के दौरान ही कार्यवाही करवाना था।
             पहले इन्होने मतदान तक चुनाव प्रचार करवा लिया, फिर 17 नबम्वर को मतदान सम्पन्न होने के उपरांत 26 नबम्वर को शिकायत की गई तथा 29 नबम्वर को निष्कासन का आदेश निकला। जो कि 3 दिसंबर को चुनाव परिणाम आने के दो दिन बाद सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त हुआ।
                अर्थात ये चुनाव जीत भी जाते तो भी निष्कासन हो ही गया था। परन्तु लोग भूल जाते हैं कि ईश्वर सब कुछ देख रहा है, वो बक्श दिये जाते हैं जिनकी किस्मत खराब होती है, वो हरगिज नहीं बक्शे जाते जिनकी नीयत खराब होती है।

आनंद पंजवानी ने 2018 के चुनाव में नहीं निभाया था जिम्मेदारी 


मोहन सिंह चंदेल ने बताया कि हार का ठीकरा दूसरे लोगों पर फोड़ने की बजाय जनता जर्नादन के फैसले को शिरोधार्य करना चाहिए। मैने भी 2018 में विधान सभा चुनाव लड़ा था परन्तु मैने किसी को दोष नहीं दिया जबकि कांग्रेस के कई नेता जिन्होने खुलकर भीतरघात किया था।
             जिला कांग्रेस कार्यालय में बैठकर जिम्मेदार लोग मेरे चुनाव में खिलाफत कर रहे थे। श्री आनंद पंजवानी जो कि जिला युवक कांग्रेस के अध्यक्ष थे, लगातार कई दिनों के प्रयास के बाद उनसे भेंट हो पाई थी और मैने उनके सिवनी नगर पालिका चुनाव के अनुभव को देखते हुए सिवनी शहर की जिम्मेदारी संभालने को कहा था परन्तु उन्होने इस जिम्मेदारी को नहीं संभाला बल्कि वे ग्रामीण क्षेत्र की ओर चले गये जहां पर कांग्रेस के कार्यकर्ता पहले से ही मजबूती से जुटे हुए थे। 

राजकुमार खुराना कार्यालय से चुनाव संचालन करते रहे 

मोहन सिंह चंदेल ने कहा कि वैसे तो श्री राजकुमार खुराना जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं। उन्हे चारों विधान सभा में जाना चाहिए था परन्तु उन्होने इस तरह से कार्य किया, जैसे कि वो विधान सभा सिवनी के ही अध्यक्ष हों।             सिवनी का पूरा चुनाव श्री राजकुमार खुराना के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में लड़ा गया परन्तु वे पूरे समय कार्यालय से ही संचालन करते रहे। मैदान में जाने की जहमत उन्होने नहीं उठाई। अगर उन्हें चुनाव के दौरान भीतरघात की शिकायत प्राप्त हुई थी तो चेतावनी भी देना चाहिए था।

चुनाव हारने का अनुभव वालों से लिया जाता रहा परामर्श 

मोहन सिंह चंदेल ने आगे बताया कि विधान सभा का पूर्व प्रत्याशी होने एवं जिला पंचायत के कई चुनाव जीतने के अनुभव होने के बावजूद मुझसे किसी प्रकार की कोई सलाह मशविरा नहीं किया गया। बल्कि जिन्हे सिर्फ चुनाव हारने का अनुभव है, उनसे ही परामर्श लिया जाता रहा गया।
                 मुझे केबल दो मंडलम याने 20 बूथ की जिम्मेदारी दी गई। मैं सौंपे गये क्षेत्र में ही प्रचार करता रहा। जिसकी पुष्टि कोई भी व्यक्ति संबंधित क्षेत्र के बूथ, सेक्टर, मंडलम, ब्लाक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष से कर सकते हैं।

केवल दो लोगों पर हार का ठीकरा फोड़कर आप मुक्त नहीं हो सकते

जब पूरा चुनाव ही संगठन ने मिलकर लड़ा है तो जिम्मेदारी भी सभी को सामूहिक रूप से लेना चाहिए। केवल दो लोगों पर हार का ठीकरा फोड़कर आप मुक्त नहीं हो सकते। बल्कि आपको नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए त्याग पत्र की पेशकश करना चाहिए थी।
                मोहन सिंह चंदेल ने कहा कि मैं अपनी बात पार्टी के प्रदेश एवं राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष रखूंगा। मैं आसानी से हार मानने वाले लोगों में से नहीं हूं। है नहीं मंजूर मुझको, मोर्चे का फैसला। जंग को लड़ने से पहले, हार कैसे मान लूं। मेरे पास सभी विकल्प खुले हैं।
                    मैं अपने साथियों एवं सर्मथकों के साथ विचार विमर्श करके आगे की कार्यवाही का खुलासा करूंगा। अभी जो समय बचा है उसे प्रभु श्री राम की सेवा में एवं अपने समाज व ओ.बी.सी. संगठन को मजबूत बनाने हेतु लगाऊंगा। समाज की सेवा करने के लिए किसी राजनैतिक दल का सदस्य होना आवश्यक नहीं है।


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