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भाषा जीवन को विस्तार देती है, भाषा की ताकत से राष्ट्र का जन्म होता है-राकेश सिंह

भाषा जीवन को विस्तार देती है, भाषा की ताकत से राष्ट्र का जन्म होता है-राकेश सिंह

भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भारतीय भाषाओं को शामिल किया गया है

15 भारतीय भाषाओं के शब्दों से रचे गये अमर गीत मिले सुर मेरा तुम्हारा की रिकार्डिंग विद्यार्थियों को सुनाई गई

महान स्वतंत्रता सेनानी सुब्रमण्यम भारती की जयंती पर हुआ आयोजन

सिवनी। गोंडवाना समय।  

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के निर्देश पर महान साहित्यकार और स्वाधीनता सेनानी चिन्नास्वामी सुब्रमण्यम भारती के जन्मदिवस 11 दिसम्बर को देशभर के सभी कालेजों  में भारतीय भाषा दिवस के रूप में मनाया गया।
        


इसी कड़ी में   पीजी कॉलेज में भी भारतीय भाषा उत्सव का आयोजन हुआ। जिले के  पुलिस अधीक्षक राकेश  सिंह के मुख्य आतिथ्य में संपन्न  कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

भाषा का कोई धर्म नहीं होता 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिले के पुलिस कप्तान राकेश सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारतीय भाषाओं  के माध्यम से ज्ञान और साहित्य को बढ़ावा मिलता है। कहा कि भाषा हमेशा धर्म पर भारी पड़ती है। भाषा का कोई धर्म नहीं होता।  भाषा की ताकत से राष्ट्र का जन्म होता है।
                अपने वक्तव्य में चिंता जताते हुए उन्होंने कहा की भाषा के साथ-साथ हमारी बोलियां पर भी संकट आ गया है। कहा कि हिंदी और भारतीय भाषाएं हमारी पहचान हैं। अपने प्रेरक वक्तव्य में उन्होंने युवा विद्यार्थियों से आग्रह किया कि हमें मातृभाषा के साथ-साथ कम से कम दो भाषाएँ जरूर सीखना चाहिए। कहा कि भाषाएँ हमारे जीवन को विस्तार देती हैं। 

पंजाबी भाषा में राष्ट्र को एकता के सूत्र में जोड़ने की ताकत है 

कार्यक्रम के विशेष वक्ता और मलयालम भाषा के विद्वान जॉन स्टेनली ने कहा कि दक्षिण भारत की भाषाएं और उत्तर भारत की भाषाओं में समानता भी देख सकते हैं। मलयालम भाषा में दिए गए अपने वक्तव्य में जॉन स्टेनली ने समय प्रबंधन पर महत्वपूर्ण बात कही।
                बताया कि हमें दक्षिण भारत की भाषाओं को भी सीखना चाहिए। कार्यक्रम में पंजाबी भाषा के विद्वान चरण सिंह ज्ञानी ने 'एक-करतार मंत्र' की व्याख्या की। कहा कि पंजाबी भाषा में राष्ट्र को एकता के सूत्र में जोड़ने की ताकत है। पंजाबी भाषा में दिए गए अपने वक्तव्य में उन्होंने गुरु ग्रंथ साहब के दोहों के मानव जीवन में महत्व पर भी प्रकाश डाला।
                कार्यक्रम में बांग्ला भाषा की विदुषी के रूप में तुहिना अग्निहोत्री ने 'एकला चलो रे' गीत की शानदार प्रस्तुति दी। बांग्ला और अंग्रेजी भाषा के मिले जुले संबोधन में तुहिना ने युवा विद्यार्थियों को व्यक्तित्व निर्माण के टिप्स भी बताए। 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में भारतीय भाषाओं को महत्व दिया गया है

भारतीय भाषा दिवस कार्यक्रम के संयोजक प्रोफेसर सत्येन्द्र कुमार शेन्डे ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भारतीय भाषाओं को शामिल किया गया है। इन भाषाओं  के प्रति विद्यार्थियों की रूचि जागृत करने के उद्देश्य से भारतीय भाषा दिवस मनाया जा रहा है। बताया कि भारतीय भाषाएँ हमारी राष्ट्रीय एकता की प्रतीक हैं। प्रोफेसर शेन्डे ने जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में भारतीय भाषाओं को महत्व दिया गया है।

कौन हैं चिन्नास्वामी सुब्रमण्यम भारती

1882 में जन्मे तमिल के महान रचनाकार सुब्रमण्यम भारती को उत्तर भारत और दक्षिण भारत की संस्कृतियों में एकता स्थापित करने वाला पुल कहा जाता है। स्वाधीनता सेनानी के रूप में उन्होंने उन्होंने अपनी रचनाओं से भारतीय एकता को बढ़ावा दिया।

भारतीय भाषाओं से हमारी सास्कृतिक विविधता झलकती है 

कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ रविशंकर नाग ने कहा कि साहित्य की अभिव्यक्ति के लिए भाषा अनिवार्य है। उप प्राचार्य डॉ अरविंद चौरसिया ने कहा कि भारतीय भाषाओं से हमारी सास्कृतिक विविधता झलकती है। मिले सुर मेरा तुम्हारा गीत भाषाई एकता का प्रतीक, लगभग 15 भारतीय भाषाओं के शब्दों से रचे गये अमर गीत मिले सुर मेरा तुम्हारा की रिकार्डिंग विद्यार्थियों को सुनाई गई।
            अस्सी के दशक के भारतीय दूरदर्शन के इस लोकप्रिय गीत ने सभी का मन मोह लिया। महान शास्त्रीय गायक भीमसेन जोशी, भारत कोकिला लता मंगेशकर और अन्य गायकों के सुरों से सजा हुआ यह गीत भारतीय भाषाओं की एकता के प्रतीक के रूप में आज भी जाना जाता है।

इस दौरान प्रमुख रूप से ये रहे मौजूद 

कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर सत्येन्द्र कुमार शेन्डे ने किया। जन भागीदारी अध्यक्ष अजय बाबा पांडे ने सभी के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम में डॉ. ज्योत्सना नावकर, डॉ मुन्नालाल चौधरी, डॉ. सीमा भास्कर, डॉ. एस पी सिंह, क्रीड़ाधिकारी के सी राउर, प्रो सोहनलाल बिरनवार, अतिथि विद्वान डॉ. दिनेश वर्मा, पूनम ठाकुर, डॉ संतलाल डहेरिया, समेत एमए हिन्दी के छात्र-छात्राओं सहित अन्य कक्षाओं के विद्यार्थियों तथा कॉलेज स्टॉफ की उपस्थिति रही।

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