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लाखों का नियम विरुद्ध व्यय करने पर महालेखाकार आॅडिट दल ने लगाया आपत्ति

लाखों का नियम विरुद्ध व्यय करने पर महालेखाकार आॅडिट दल ने लगाया आपत्ति

1550 कृषकों को हरियाली प्रसार योजना के अंतर्गत 808066 पौधों का फर्जी वितरण दशार्या गया 

कांकेर वन मंडल हरियाली प्रसार योजना का मामला


कांकेर/छत्तीसगढ़। गोंडवाना समय।

छत्तीसगढ़ राज्य में हरियाली प्रसार योजना का वन विभाग के अधिकारियों द्वारा भारी भ्रष्टाचार करने का मामला सामने आया है।
        


कांकेर वन मंडल के अधिकारी कर्मचारियों के साथ ही शासन के लाखों रुपये को गबन करने का आरोप शिकायकर्ता ने लगाया है।

नीलगिरी क्लोनल पौधों का वितरण किया जाना था


ज्ञात हो कि कांकेर वनमण्डल के भ्रष्ट अधिकारी/कर्मचारियों द्वारा हरियाली प्रसार योजना कृषि वानिकी को प्रात्साहित करने तथा ग्रामवासियों के आर्थिक उन्नति हेतु प्रारंभ की गयी हैं। इस योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के इच्छुक कृषकों तथा सामान्य श्रेणी के लघु कृषकों को उनकी पड़त भूमि में उनकी इच्छित प्रजाति के पौधे रोपित कर हस्तांतरित करने का प्रावधान है।
                वनमण्डलाधिकारी वनमण्डल, कांकेर के अभिलेखों का महालेखाकार आॅडिट दल के द्वारा किए गए नमूना जांच में देखा गया कि कार्यालय वन संरक्षक रायपुर वृत्त रायपुर ने हरियाली प्रसार योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2020-21 में कुल 808066 नीलगिरी क्लोनल पौधों का वितरण इच्छुक ग्रामिणों को किये जाने हेतु राशि 90.69 लाख का आवंटन वनमण्डल को प्रदाय किया गया। 

रोपण स्थल के प्रमाण के रूप में बी-1 की नकल की कॉपी संलग्न नहीं किया गया 

वनमण्डल ने 808066 क्लोनल नीलगिरी पौधों का वितरण 1550 हितग्राहियों को कर राशि 74.81 लाख का व्यय किया है। महालेखाकार आॅडिट दल के द्वारा किए गए जांच में देखा गया कि जिन 1550 ग्रामीणों को हरियाली प्रसार योजना के अंतर्गत पौधों का वितरण किया जाना बताया गया है किन्तु अभिलेखों में अनियमितता पायी गयी है।
            हरियाली प्रसार योजना के दिशा-निदेर्शों के अनुसार पौधों का वितरण इच्छुक कृषकों को ही किया जाना है। अत: योजना का लाभ प्राप्त करने हेतु इच्छुक कृषकों को वनमण्डल या परिक्षेत्र कार्यालय में आवेदन देना होता है लेकिन कृषकों का आवेदन वनमण्डल स्तर पर नहीं पाया गया।
            इच्छुक कृषकों को जिन्हें पौधा रोपण करना है रोपण स्थल के प्रमाण के रूप में बी-1 की नकल की कॉपी आवेदन पत्र के साथ संलग्न किया जाना था जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि पौधों का रोपण किस स्थल में हुआ है। लेकिन बी-1 की नकल की कापी संलग्न होना नहीं पाया गया। 

गड्डा खुदाई एवं पौधा रोपण के कार्य का संतुष्टी प्रमाण नहीं पाया गया

इच्छुक कृषकों को जब पौधा वितरण किया गया उस समय कृषकों से पौधा प्राप्ति संख्या सहित पावती प्राप्त किया जाना था, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कृषकों को पौधा प्राप्त हो गया है लेकिन वनमण्डल के अभिलेखों में ऐसी पावती की कापी संलग्न होना नहीं पाया गया।
             जिन कृषकों की निजी जमीन पर पौधा रोपण किये जाने हेतु नि:शुल्क पौधा वितरण कर रोपण का कार्य किया गया उन कृषको से सन्तुष्टी प्रमाण पत्र प्राप्त किया जाना था कि गड्डा खुदाई एवं पौधा रोपण के कार्य से मैं संतुष्ट हूँ। ऐसा संतुष्टी प्रमाण नहीं पाया गया। 

खसरा नंबर पर पौधा रोपण का अंकन नहीं किया गया

कृषकों की निजी जमीन पर रोपण कार्य पूर्ण होने के पश्चात कृषक के भू-अभिलेख में पौधा रोपण की जानकारी अंकित की जानी चाहिए थी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उक्त खसरा नंबर पर पौधा रोपण का कार्य किया जा कर उक्त भू-स्वामी को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है जो होना नहीं पाया गया।
             कृषकों की जिस निजी जमीन पर पौधा रोपण का कार्य किया गया है उस रोपण स्थल के साथ कृषक का फोटो अभिलेख में संधारित किया जाना था ताकि यह सुनिश्चित हो सके की पौधा रोपण का कार्य हुआ है। जो होना नहीं पाया गया। 

भाजपा सरकार इस पर संज्ञान में लेती हैं या नहीं ? 

परिणामस्वरूप, हरियाली प्रसार योजना के अंतर्गत उक्त अभिलेखों का संधारण वनमण्डल/परिक्षेत्र कार्यालय स्तर पर संधारित न होने से इस बात की पुष्टि होती है कि 1550 कृषकों को हरियाली प्रसार योजना के अंतर्गत 808066 पौधों का फर्जी वितरण दशार्या गया है।
        उपरोक्त लिखित तथ्य से यह स्पष्ट होता है कि कांकेर वनमण्डल के अधिकारी/कर्मचारी किस तरह खून-पसीना बहा कर भ्रष्टाचार युक्त कार्य को अंजाम देने में लगे हुए हैं। इसके बावजूद भी इन अधिकारियों पर ना तो किसी प्रकार की कोई कार्यवाही इनके वरिष्ठ अधिकारी कर पाए हैं, और ना ही शासन के महत्वकांक्षी योजनाओं की सफलतापूर्वक पूर्ति कराने में किसी का ध्यान दिया जा रहा है। अब प्रदेश में नई बैठी भाजपा सरकार इस पर संज्ञान में लेती हैं या नहीं ? इस पर भी सवालिया निशान लग रहे है। 

हरियर छत्तीसगढ़ योजना में भी 193.26 लाख का राशि अनियमित व्यय करने का मामला सामने आया हैं


कांकेर वन मंडल में ही हरियर छत्तीसगढ योजना के संधारित अभिलेखों का जांच महालेखाकार के आॅडिट दल द्वारा नमूना जांच में पाया गया कि प्रधान मुख्य संरक्षक के पत्र कमांक/वि.यो./बजट /3094 रायपुर दिनांक 24.9.2016 द्वारा वनमंडल कांकेर को हरियर छत्तीसगढ़ योजनांतर्गत राशि 400.00 लाख का अग्रिम आवंटन दिया गया था।
             वन मंडल द्वारा उक्त राशि में से तीन वर्ष वर्ष 2017-18, 2018-19 एवं 2019-20 में राशि 193.26 लाख व्यय किया जा चुका है। लेखापरीक्षा में पाया गया है कि योजना में स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि कार्य विरल वन आच्छादित क्षेत्र में रोपण योग्य राजस्व भूमि/राजस्व वन भूमि एवं अन्य क्षेत्रों में ब्लाक वृक्षारोपण एवं पुराने बिगड़े वृक्षारोपण को सुधारने हेतु किया जाना था।
            महालेखाकार के आॅडिट दल द्वारा अभिलेखों की जांच में देखा गया कि वनमंडल द्वारा सरोना परिक्षेत्र के अंतर्गत कक्ष क. 111 एवं 142 में कमश: 30.000 है. एवं 35.000 हे. मिश्रित रोपण का कार्य किया गया। कक्ष इतिहास एवं कार्य आयोजना के जांच में पाया गया कि ये दोनों कक्ष एस. सी.आई कार्य वृत के अंतर्गत आते है और इन कक्षों का धनत्व 5 से 7 है। अत: वन मंडल द्वारा योजनांतर्गत किये गये वृक्षारोपण इसके दिशा निर्देश के विपरित किया गया और इस पर राशि 193.26 लाख किया गया व्यय अनियमित पाया गया है।

शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच करने की मांग किया 

वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों द्वारा प्रमुख लोक आयुक्त राज्यपाल छत्तीसगढ़, मुख्यमंत्री, वन मंत्री सहित उच्च अधिकारियों के शिकायत कर निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग किया है।

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