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अंशकालीन चपरासी की भर्ती के भ्रष्टाचार का 2 करोड़ से अधिक का है वार्षिक टर्नओवर

अंशकालीन चपरासी की भर्ती के भ्रष्टाचार का 2 करोड़ से अधिक का है वार्षिक टर्नओवर

जनजाति कार्य विभाग सिवनी में बेरोजगार आदिवासियों को लुटने के लिये विभाग के सरकारी दलाल सक्रिय 


सिवनी। गोंडवाना समय। 

जनजाति कार्य विभाग सिवनी में जनजातियों के कल्याण, उत्थान, विकास के लिये अनेकों योजनाएं शासन, सरकार के द्वारा संचालित की जा रही है। इस विभाग को संचालित व योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिये जनजाति कार्य विभाग सिवनी कार्यालय सहित जिले में अधिकारी कर्मचारियों की नियुक्ति की गई जिन्हें हजारो-लाखों रूपये वेतन सरकारी खजाने से दी जाती है।
          


 इसके बाद भी कुछ ऐसे अधिकारी कर्मचारी है जिन्हें आदिवासी समाज के बेरोजगार युवकों को खून के आंसू रूलाकर, सेठ-साहूकारों के कर्जदार बनाकर, या अपनी जमीन व जेबर गिरवी रखकर 5-6 हजार की अंशकालीन चपराशि की भर्ती के लिये 1 लाख रूपये से अधिक रूपये लेकर लूटने के लिये खुली छूट दी गई है। सरकारी वेतन पाने के बाद भी ऐसे कुछ हरामखोरों को हराम की खाने की आदत पड़ चुकी है। 

इस खेल के सभी हिस्सेदार करोड़ों के आसामी है 


जनजाति कार्य विभाग सिवनी के अंतर्गत आने वाले शिक्षण संस्थानों, छात्रावासों सहित अन्य कार्यालयों में जहां पर अंशकालीन चपराशी की भर्ती कराने के लिये 1 लाख रूपये से अधिक की राशि बेरोजगार आदिवासी युवकों के साथ साथ अन्य वर्ग के युवकों से भी लिया जाता है।
        विभागीय सूत्र बताते है कि अंशकालीन चपराशी के पद पर भर्ती होने वाले को 5 से 6 हजार रूपये ही पारिश्रमिक दिया जाता है। वहीं अधिकांशतय: 10-11 महिने या शिक्षण संस्थान के संचालित होने तक ही इन्हें रखा जाता है इसके बाद इन्हें ंहटा दिया जाता है।
        अब आप ही अंदाजा लगा सकते है कि 1 लाख रूपये से अधिक अंशकालीन चपराशि की भर्ती के लिये बेरोजगारों से लेते है और 50-60 हजार रूपये ही मिल पाते होंगे। वहीं कई बार तो कई महिने तक पारिश्रमिक भी नहीं निकल पाता है। जनजाति कार्य विभाग सिवनी के अंतर्गत शासकीय सेवा में पदस्थ कुछ अधिकारी व कर्मचारी इस गौरखधंधे में शामिल होकर बेरोजगारों को लूटने का व्यापार चला रहे है।
            विभागीय सूत्र तो यह भी बताते है कि अंशकालीन भर्ती के नाम पर प्रति वर्ष दलाल सैकेड़ों की संख्या में अंशकालीन भर्ती करवाते है यदि सबसे ये 1 लाख रूपये से अधिक लेते होंगे तो जनजाति कार्य विभाग सिवनी में अंशकालीन चपराशि की भर्ती का वार्षिक टर्नओबर लगभग 2 करोड़ से अधिक का हो सकता है।
        यह तो सिर्फ अंशकालीन चपराशि की भर्ती का ही टर्नओबर यदि और भी दूसरे भ्रष्टाचार का हिसाब लगायेंगे तो इस खेल के सभी हिस्सेदार करोड़ों के आसामी है।  

पढ़ाते नहीं आर्थिक सेटिंग का कारोबार संभालते है महेन्द्र चौकसे शिक्षक

अंशकालीन चपराशी सहित अन्य सेटिंग का मास्टरमार्इंड महेन्द्र चौकसे जो कि जनजाति कार्य विभाग के अंतर्गत शिक्षक के पद पर पदस्थ है। महेन्द्र चौकसे तो अंशकालीन चपराशि की भर्ती का रेट फिक्स करके बेरोजगारों को लूट रहा है।
         वहीं सबसे ज्यादा आदिवासी शिक्षित बेरोजगार युवक को वह निशाना बनाता है। जनजाति कार्य विभाग सिवनी के उच्चाधिकारियों का महेन्द्र चौकसे सबसे चहेता कर्मचारियों में से एक है। महेन्द्र चौकसे जैसे और भी विभाग के सरकारी कर्मचारी है जो भर्ती से लेकर अन्य कार्यों में भ्रष्टाचार को खुलेआम बेधड़क अंजाम दे रहे है। यदि महेन्द्र चौकसे की संपत्ति की जांच कराई जाये तो पूरा खेल सामने आ सकता है।
            सूत्र बताते है कि जनजाति कार्य विभाग सिवनी के अंतर्गत पदस्थ महेन्द्र चौकसे शिक्षक जिस स्कूल में पढ़ाने के लिये पदस्थ है वहां के बच्चे उसे पहचानते भी नहीं है क्योंकि महेन्द्र चौकसे शिक्षक पढ़ाने का कार्य नहीं करते है वह आर्थिक सेटिंग का पूरा कारोबार संभालते है। 

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