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25 करोड़ वर्ष पुराना, भारतीय संग्रहालय में मौजूद है गोंडवाना लैंड का इतिहास

25 करोड़ वर्ष पुराना, भारतीय संग्रहालय में मौजूद है गोंडवाना लैंड का इतिहास

डेडोक्सिलन वृक्ष के तने जीवाश्म के रूप में है मौजूद 

भारतीय संग्रहालय कोलकाता में गोंडवाना लैंड का इतिहास संरक्षित  

डेडोक्सिलन वृक्ष के तने जीवाश्म 25 करोड़ वर्ष पूर्व के है

कोलकाता। गोंडवाना समय। 

1814 में निर्मित भारतीय संग्रहालय में देश विदेश की प्राचनी सभ्यता आज भी प्रमाणित रूप में मौजूद है। वहीं गोंडवाना लैंड का 25 करोड़ वर्ष पूर्व का इतिहास भी भारतीय संग्रहालय में मौजूद है। इससे यह प्रमाणित होता है कि गोंडवाना का इतिहास करोड़ो वर्ष पूर्व का ऐतिहासिक रहा है।
            


भले ही आजादी के बाद देश की सत्ता संभालने वाले सरकारों ने न गोंडवाना राज्य निर्माण में अपनी सक्रियता दिखाया है और न ही गोंडी भाषा को मान्यता देने में कोई दिलचस्पी दिखाया है।
        गोंडवाना का समृद्धशाली इितहास आज भी गढ़, किले, महल, जल संरक्षण के लिये अपना ऐतिहासिक स्थान व पहचान रखते है। इसके बाद भी गोंडवाना से संबंधित सगा समाज को अपने हक, अधिकार के लिये संघर्ष ही करना पड़ रहा है। 

25 करोड़ वर्ष पूर्व जंगली वृक्ष के रूप में ये समस्त प्राचीन गोडवाना लैंड पर फैले हुये थे 


कोलकाता में स्थित भारतीय संग्रहालय में मौजूद जीवाश्म डोक्सिलन वृक्ष जाति के तने है। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह वर्ष 1924 में आसनसोल पश्चित बंगाल के निकट रेलवे लाइन निर्माण के दौरान पाया गया था। इस प्रजाति के वृक्ष आज कल विलुप्त हो गये है।
            

लगभग 25 करोड़ वर्ष पूर्व जंगली वृक्ष के रूप में ये समस्त प्राचीन गोडवाना लैंड पर फैले हुये थे। जीसर्क अंतर्गत भारत, आफ्रिका, आॅस्ट्रेलिया, उत्तरी एवं दक्षिण अमेरिका आते है। इस जीवाश्म के तने की कुल लंबाई 22.25 मीटर (73 फिट) है। भूवैज्ञानिक दृष्टि से यह जीवाश्म गोंडवाना के अंतर्गत पंचेत फार्मेशन के तलछटी चट्टानों के भीतर संरक्षित पाया गया है। 

भारतीय संग्रहालय का गोंगपा पदाधिकारियों ने किया था भ्रमण 


बीते दिनों गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव श्याम सिंह मरकाम, राष्ट्रीय महामंत्री संतोष चंद्राकर सहित गोंगपा के अन्य पदाधिकारी पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के संबंध में दौरा पर गये हुये थे। इस दौरान उन्होंने कोलकाता स्थित भारतीय संग्रहालय का भ्रमण किया था।
        जहां पर उन्होंने गोंडवाना शासनकाल व गोंडवाना साम्राज्य से संबंधित प्राचीन व ऐतिहासिक सभ्यता व सामग्रियों के लिये अलग गैलरी बनाने का सुझाव व मांग भारतीय संग्रहालय के प्रशासनिक अधिकारियों से किया है। जहां पर भारतीय संग्रहालय के प्रशासनिक अधिकारियों ने गोंडवाना साम्राज्य के इतिहास के लिये एवं जनजातियों से संबंधित ऐतिहासिक इतिहास के लिये अलग गैलरी बनाये जाने का आश्वासन दिया है। 

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