सिवनी शहर के प्राइवेट स्कूलो में मची लूट, टीचर घर में ट्यूशन आने का देते है दबाव
गोंडवाना समय सिवनी शहर के निजी पब्लिक स्कूलों की ग्राउंड रिपोर्ट कर रहा तैयार
सिवनी। गोंडवाना समय।
महंगी स्कूल फीस किताबे और यूनिफॉर्म में भी कमीशन और मुनाफा कमाने वाले सीबीएसई पाठ्यक्रम अंग्रेजी माध्यम वाले स्कूलों में शाला प्रबंधन और स्कूलों में कार्यरत शिक्षक, शिक्षाकाओं की सांठ गांठ से खुलेआम ट्यूशन के नाम पर लूट का खेल चल रहा है।
जिला कलेक्टर से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी तक को इस लूट की भनक है लेकिन शहर के इन स्कूलों के ऊपर लगाम कसने की कोई हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहा है। छात्र-छात्राओं के हितों का ढिंढौरा पीटने वाले संगठन एनएसयूआई हो या एबीवीपी या गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन तीनों इस मामले में चुप्पी साधे हुए है। मजाल है कि रसूखदार स्कूल मालिकों के खिलाफ मुंह खोलने को तैयार नहीं है।
ट्यूशन व्यवसाय में स्कूल के प्रबंधन और प्राचार्यों की मौन स्वीकृति है
सिवनी शहर में जितने भी सीबीएसई पाठ्यक्रम वाले पब्लिक स्कूल खुले है, वो सब गुणवत्ता युक्त शिक्षा स्कूल में ही देने के दावों के साथ मोटी-मोटी फीस छात्र-छात्राओं के अभिभावकों से वसूल रहे है लेकिन हकीकत में इन स्कूल के अधिकांश शिक्षक-शिक्षिकाएं स्कूल में पढ़ाने की बजाए स्कूल में छात्र-छात्राओं को दबाव देकर घर पर ट्यूशन आने के लिए बाध्य करते हैं।
टीचर जिस सब्जेक्ट को स्कूल में पढ़ातें है उसी सब्जेक्ट को दोबारा घर पर पढ़ाकर मोटी फीस वसूल रहे हैं। बहुत से छात्रों ने बताया कि ऐसे टीचर जानबूझकर स्कूल में अच्छा नहीं पढ़ाते है। कुछ टीचर आधा-अधूरा पढ़ाकर स्टूडेंट्स के ऊपर ट्यूशन आने का मानसिक दबाव बनाते है। सूत्र बताते है कि उक्त स्कूल के ट्यूशनखोर शिक्षक के ट्यूशन व्यवसाय में उस स्कूल के प्रबंधन और प्राचार्यों की मौन स्वीकृति है।
अभिभावकों को दोहरा आर्थिक भार उठाना पड़ता है
जबलपुर रोड स्थित चर्च के पीछे मिशन इंग्लिश स्कूल हो या शहर का कथित नंबर वन सेंट फ्रांसिस स्कूल हो, इन स्कूलों के टीचर स्कूल खुलते ही लगभग पूरी क्लास को घर पर कोचिंग के लिए बुलाने लगते है। आलम ये है कि नए सत्र में स्कूल खुलते ही स्कूल के टीचर छात्र-छात्राओं को उस विषय की कोचिंग के लिए अपनी निजी कोचिंग क्लास का पता समझाने लगते है। इससे अभिभावकों को दोहरा आर्थिक भार उठाना पड़ता है।
मानसिक रूप प्रताड़ित किया जाता है
शहर के कथित पब्लिक स्कूलों में पच्चीस हजार तीस हजार से लेकर चालीस हजार तक फीस देने के बाद भी अभिभावकों को ट्यूशन के लिए पंद्रह बीस हजार अितरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। जो स्टूडेंट्स स्कूल के टीचर के पास ट्यूशन नहीं जाते हैं, उनको टीचर के द्वारा मानसिक रूप प्रताड़ित किया जाता है।
अभिभावक अपने बच्चों को अच्छी गुणवत्तायुक्त शिक्षा दिलाने की लिए महंगी कॉपी, किताबे, यूनिफार्म और महंगी फीस इसलिए देते है कि उनके बच्चों को स्कूल में ही अच्छी टीचिंग मिले लेकिन अधिकांश स्कूलों में ऐसा नहीं हो रहा है। इस मामले में स्कूल प्राचार्य और प्रबंधन की भी मिलीभगत है।
स्कूल में पढ़ाने के नाम पर ट्यूशन का धंधा चलाने वालों का चेहरा करेंगे उजागर
गोंडवाना समय सिवनी शहर के निजी पब्लिक स्कूलों की ग्राउंड रिपोर्ट तैयार कर रहा है और ऐसे समस्त स्कूल और उनमें पढ़ाने वाले स्कूल के टीचर के नाम फोटो प्रकाशित करेगा जो स्कूल में पढ़ाने के नाम पर ट्यूशन का धंधा चला रहे है। हम शहर के अभिभावकों से भी अपील करते है कि यदि स्कूलों के टीचर स्कूल में आपके बच्चों को ट्यूशन आने के लिए बाध्य करते है तो इसकी जानकारी हमें दीजिए। छात्र संगठन यदि इस मामले में कोई कदम नहीं उठाते हैं तो हम जनहित में इन संगठनों की चुप्पी के बारे में भी समाचार प्रकाशित करेंगे।

