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गोंडवाना राज्य का सोने का सिक्का भारतीय संग्रहालय कोलकाता में रखे जाने की मांग

गोंडवाना राज्य का सोने का सिक्का भारतीय संग्रहालय कोलकाता में रखे जाने की मांग 

गोंडवाना साम्राज्य एवं आदिवासियों के लिये संग्रहालय में अलग स्थान बनाने की मांग 

गोंगपा राष्ट्रीय महासचिव श्याम सिंह मरकाम व अन्य गोंगपा पदाधिकारी ने कोलकाता में किया दौरा 

भ्रमण के दौरान भारतीय संग्रहालय के अधिकारियों से की चर्चा 

पश्चिम बंगाल। गोंडवाना समय। 

देश के एक मात्र भारतीय संग्रहालय जो कि पश्चिम बंगाल के कोलकाता में स्थित है। जहां पर भारत देश के समस्त शासकों के शासनकाल के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पूर्वजों की सामग्री व इतिहास को संग्रहित भारतीय संग्रहालय में किया गया है।
            


जहां पर देश व विदेश के नागरिक संग्रहालय में भारत की विशेषताएं को देखने आते है। वहीं बीते दिवस गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव श्याम सिंह मरकाम, राष्ट्रीय महामंत्री संतोष चंद्राकर एवं छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष इंजिनियर संजय सिंह कमरों सहित अन्य पदाधिकारी पश्चिम बंगाल में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों शामिल होने के पश्चात कोलकाता स्थित भारतीय संग्रहालय का भ्रमण करने गये थे। 

20 वर्ष पूर्व सोने का सिक्का वहां पर मौजूद था 


भ्रमण के दौरान गोंगपा के पदाधिकारियों ने भारतीय संग्रहालय में उन्होंने देखा कि गोंडवाना साम्राज्य के संस्थापक संग्राम शाह जी के गोंडवाना शासल काल के दौरान सोने के सिक्का वहां पर मौजूद नहीं था। उक्त संबंध में श्याम सिंह मरकाम ने बताया कि भारतीय संग्रहालय में लगभग 20 वर्ष पूर्व गोंडवाना शासनकाल का सोने का सिक्का मौजूद था लेकिन वर्तमान में वह वहां पर मौजूद नहीं है। इस संबंध में जब भारतीय संग्रहालय के जिम्मेदार अधिकारियों से चर्चा किया तो उन्होंने बताया कि संग्रहालय की कुछ सामग्री को स्थानांतरित किया गया है।

258 रियासत को संग्रहालय में अलग गैलरी तक का स्थान मुनासिब नहीं हो सका 


इतिहासकारों के अनुसार भारत पाकिस्तान के विभाजन के पूर्व देश में 565 रियासत थी। जिसमें से 23 रियासत पाकिस्तान में विभाजित हो गई थी जिसके बाद भारत में 542 रियासत बची थी। वहीं कुल भारत की 542 में से 258 रियासत गोंडवाना साम्राज्य व जनजाति समुदाय से संबंधित थी।
        इसके बाद भी 284 रियासत जिनकी थी उनके साम्राज्य को इतिहास के पन्नों में कहें संग्रहालयों में उचित स्थान आज भी मिला हुआ है। वहीं दूसरी ओर 258 रियासत वाले एवं देश में 46 प्रतिशत का हिस्सेदार गोंडवाना साम्राज्य की रियासत या गोंडवाना साम्राज्य के गोंडवाना शासनकाल के ऐतिहासिक व इतिहास को आज भी उचित स्थान कहीं पर भी नहीं मिल पाया है।
                सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय संग्रहालय जो कि कोलकाता में स्थित है वहां पर गोंडवाना साम्राज्य कहेंं या आदिवासी समुदाय से संबंधित इतिहास को संजोकर रखने के लिये अलग से गैलेरी या कक्ष नहीं बनाया गया है। देश में आजादी के बाद जिनकी भी सरकारें रही उन्होंने भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया और न ही संज्ञान लिया। इसके साथ ही देश भर में संसद में जाने वाले आदिवासी सांसदों ने भी इस संबंध में कभी कोई आवाज नहीं उठाया है। 

गोंडवाना साम्राज्य व जनजातियों के लिये अलग गैलरी बनाने का दिया आश्वासन 


वहीं भारतीय संग्रहालय में जब गोंडवाना साम्राज्य के शासनकाल एवं जनजातियों से संबंधित ऐतिहासिक सामग्रियों के लिये अलग गैलेरी नहीं होने एवं अलग स्थान कक्ष नहीं होने पर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव श्याम सिंह नेतृत्व में गोंगपा पदाधिकारियों का एक प्रतिनिधिमण्डल ने भारतीय संग्रहालय कोलकाता में संग्रहालय के अधिकारियों से भेंटवार्ता किया।
        इस दौरान वहां के अधिकारियों में सुहास कुमार मुखर्जी एवं सत्यकाम सेन ने उन्हें आश्वसन दिया कि भारतीय संग्रहालय में गोंडवाना साम्राज्य एवं जनजातियों से संबंधित ऐतिहासिक संग्रहित सामग्रियों के लिये अलग गैलरी एवं अलग स्थान बनाने का प्रयास हमारे द्वारा किया जायेगा। इसके पहले किसी ने इस तरह का सुझाव या मांग नहीं किया था। 

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1 Comments
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  1. बहुत अच्छी जानकारी और प्रयास है कि गोंडवाना साम्राज्य से संबंधित ऐतिहासिक चिन्हों, सिक्कों की के लिए अलग गैलरी हो।

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