नाबालिक है पारधी जनजाति समुदाय की बेटी मोनालिसा
फरमान पर एफआईआर दर्ज कर मध्य प्रदेश पुलिस ने कसा शिकंजा
लव जिहाद की साजिश को समझने में अक्षम थी नाबालिग मोनालिसा
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग नई दिल्ली की जांच खत्म
महेश्वर के सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड में मोनालिसा नाबालिग निकली
22 अप्रैल को केरल एवं मध्य प्रदेश के डीजीपी जनजाति आयोग नई दिल्ली तलब
नई दिल्ली/मध्यप्रदेश। गोंडवाना समय।
मध्य प्रदेश की 'मोनालिसा' मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की जांच के बाद एक चौंकाने वाला मोड़ आया है।
जनजाति आयोग अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के नेतृत्व में, आयोग की सक्रियता और पूर्व न्यायाधीश व जनजाति आयोग विधिक सलाहकार श्री प्रकाश उइके के मार्गदर्शन में अधिवक्ता प्रथम दुबे द्वारा की गई कानूनी पैरवी ने यह साबित कर दिया है कि जिस युवती को बालिग बताकर विवाह कराया गया था। वह वास्तव में पारधी जनजाति समुदाय की एक नाबालिग लड़की है।
संदिग्ध भूमिका और राजनीतिक और पीएफआई कनेक्शन
अधिवक्ता प्रथम दुबे ने इस संवेदनशील मामले को पूरी प्रखरता के साथ आयोग के समक्ष 17 मार्च 2026 को उठाया था। पूर्व न्यायाधीश व जनजाति आयोग विधिक सलाहकार श्री प्रकाश उइके के मार्गदर्शन में श्री प्रथम दुबे ने अपनी शिकायत में उन कढ़ियों को जोड़ा जो इस विवाह के पीछे के छिपे हुए एजेंडे को उजागर करती हैं। प्रथम दुबे ने आयोग को अवगत कराया कि इस विवाह में केरल के सीपीआई-एम नेताओं की सक्रिय भागीदारी और पीएफआई जैसे संगठनों की संलिप्तता एक गंभीर चिंता का विषय है।
नैरेटिव की साजिश, 72 घंटे में सच उजागर किया
शिकायत में स्पष्ट किया गया कि यह विवाह केवल एक निजी मामला नहीं, बल्कि 'लव जिहाद' के अस्तित्व को नकारने के लिए वैश्विक स्तर पर एक फॉल्स नैरेटिव सेट करने की रणनीतिक कोशिश थी। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष श्री अन्तर सिंह आर्य के निर्देश पर गठित जांच दल ने केरल से लेकर मध्य प्रदेश के गांवों तक गहन छानबीन की एवं मात्र 72 घंटे में केरल से लेकर मध्य प्रदेश के महेश्वर तक सारे तार जोड़ कर सच को उजागर कर दिया। सलाहकार श्री प्रकाश ऊईके एवं निदेशक श्री पी. कल्याण रेड़ी की जांच महेश्वर के सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड में मोनालिसा।नाबालिग निकली
न्यायिक अनुभव का प्रभाव, ठोस सबूत
न्यायाधीश रह चुके श्री प्रकाश उइके के न्यायिक अनुभव के कारण जांच दल उन दस्तावेजों तक पहुँचने में सफल रहा, जिन्हें छिपाने की कोशिश की गई थी। जांच की शुरूआत केरल के श्री नयनार देवा मंदिर से शुरू किया गया। मंदिर प्रशासन ने जांच में बताया कि मोनालिसा एवं फरमान की शादी आधार में उल्लेखित आयु के आधार पर की गई है तथा केरल के पुअर गांव के ग्राम पंचायत कार्यालय में इस शादी का पंजीकरण किया गया है। जिसमें मोनालिसा के गलत जन्म प्रमाण पत्र को आधार बनाया गया है।
गलत जन्म प्रमाण पत्र नगर पालिका महेश्वर से जारी किया
जांचदल ने पाया कि यह गलत जन्म प्रमाण पत्र नगर पालिका महेश्वर से जारी किया गया है। उसके बाद जांचदल ने तत्काल मध्यप्रदेश महेश्वर के सरकारी मेडिकल अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच की एवं पाया कि मोनालिसा का जन्म 30 दिसंबर 2009 को शाम 5:50 हुआ था। जिसके आधार पर वह केरल में संपन्न विवाह 11 मार्च, 2026 को मात्र 16 वर्ष 2 माह और 12 दिन की थी।
साथ ही जांच टीम ने पूर्व में स्थानीय नगर पालिका महेश्वर द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र जो गलत जन्म तिथि के आधार पर जारी किया गया है जिसमें मोनालिसा की जन्म तिथि 1/1/2008 लिखाई गई थी उसे निरस्त करवाने में भी कानूनी प्रावधानों का अध्ययन कर स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया।
जन्म प्रमाण पत्र के इस दस्तावेजी प्रमाण ने विवाह के पक्षकारों की साजिश को बेनकाब कर दिया। मोनालिसा के माता-पिता द्वारा उनके रक्त संबंधियों के जाति प्रमाण पत्र भी आयोग को उपलब्ध कराए गए जिससे यह बात भी साबित हो गई की मोनालिसा के माता-पिता अनुसूचित जनजाति समुदाय के सदस्य है।
केरल पुलिस प्रशासन एवं राजनैतिक बाहुबलियों के संरक्षण पर सवाल
अधिवक्ता प्रथम दुबे ने यह गंभीर सवाल उठाया है कि आखिर क्यों नाबालिक मोनालिसा (मध्य प्रदेश) और फरमान निवासी (उत्तर प्रदेश) का विवाह केरल में भारी पुलिस सुरक्षा एवं स्थानीय विधायक और सांसदों की उपस्थिति के बीच बिना किसी जांच पड़ताल के कराया गया?
स्थानीय जन प्रतिनिधियों द्वारा मोनालिसा एवं फरमान को 2 वर्षों से व्यक्तिगत रुप से पहचानने की बात रिकॉर्ड में आई है। जो विगत 3 माह से निरंतर मोनालिसा एवं फरमान बड़े-बड़े होटलों एवं वीआईपी जन प्रतिनिधियों के मेहमान बने हुए थे।
विदेशी फंडिंग, देह व्यापार एवं तस्करी की भी संभावना
स्थानीय मीडिया के माध्यम से नैरेटिव सेट कर रहे हैं। इस सभी मामले में फंडिंग कहा से हो रही है इसमें विदेशी फंडिंग की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है एवं आदिवासी बच्चों के देह व्यापार एवं तस्करी की भी संभावना पर पुलिस की जांच केंद्रीत होनी चाहिए। क्या इस पूरे मामले में केरल पुलिस मध्य प्रदेश पुलिस का सहयोग करेगी यह भी भविष्य के गर्त में है?
फरमान पर पॉक्सो बीएनएस एवं एट्रोसिटी एक्ट के अंतर्गत एफआईआर दर्ज
मध्य प्रदेश के थाना महेश्वर में पॉक्सो बीएनएस एवं एट्रोसिटी एक्ट के अंतर्गत एफआईआर दर्ज किया गया है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद जनजाति आयोग की अनुसंशा पर प्रशासन हरकत में आ गया है। आरोपी फरमान के खिलाफ पुलिस ने गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जिसमें पॉक्सो एक्ट क्योंकि सरकारी दस्तावेजों में युवती की जन्मतिथि 30/12/2009 पाई गई है, जिससे वह कानूनी रूप से नाबालिग सिद्ध हुई है। एट्रोसिटी एक्ट पीड़िता महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में अधिसूचित 'पारधी' जनजाति से संबंध रखती है, जिसके कारण उन पर अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं। इसके साथ ही भारतीय न्याय संहिता साजिश और अवैध विवाह से संबंधित विभिन्न धाराओं के तहत भी कार्यवाही की जा रही है।
जांच दल ने दस्तावेजों के आधार पर ध्वस्त कर दिया
जनजाति आयोग की जांच टीम ने यह यह सिद्ध कर दिया है कि मोनालिसा नाबालिग है और वह लव जिहाद की साजिश को समझने में अक्षम थी। कानून के साथ खिलवाड़ कर जो नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की गई थी, उसे आयोग के जांच दल ने दस्तावेजों के आधार पर ध्वस्त कर दिया है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की अगली कार्रवाई
इस खुलासे के बाद आयोग अब दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। आयोग ने 22 अप्रैल 2026 को केरल एवं मध्य प्रदेश के डीजीपी को आयोग मुख्यालय नई दिल्ली तलब किया है। नाबालिग के विवाह और इसमें शामिल राजनीतिक व कट्टरपंथी संगठनों की भूमिका की विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जा रही है।
पारधी जनजाति की इस नाबालिग बेटी के साथ हुए अन्याय ने केरल पुलिस और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि वह दोषियों को सजा मिलने तक इस कार्यवाही पर पैनी नजर बनाए रखेगा एवं हर तीन दिन में मध्यप्रदेश और केरल के डीजीपी से उपरोक्त केस की प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगी है।
