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जुआं, सट्टा, ड्रग्स सफेद पाउडर का पता पुलिस को बताने का अंजाम दलित युवक की हत्या

 जुआं, सट्टा, ड्रग्स सफेद पाउडर का पता पुलिस को बताने का अंजाम दलित युवक की हत्या 

अनुराग डेहरिया की हत्या के मूल जड़ तक नवागत पुलिस अधीक्षक को पहुंचना जरूरी है

जुआं, सट्टा, सफेद पाउडर के अवैध धंधे पर क्यों है मेहरबान रहती है कोतवाली पुलिस ?

अनुराग डेहरिया की गला काट कर हत्या करने के पीछे मूल जड़ को तलाश पायेंगे नवागत पुलिस अधीक्षक 


सिवनी। गोंडवाना समय। 

अनुराग डेहरिया का पूरा परिवार बीते लगभग 2 वर्ष से दहशत व धमकी भरे साये में जी रहा था, दलित परिवार के युवक अनुराग डेहरिया की 13 मई की रात्रि में निमर्मता के साथ चाकूओं से गला काट कर हत्या कर दी गई।
            


दलित परिवार के युवक अनुराग डेहरिया की गलती यह थी कि लगभग डेढ़ से दो वर्ष पूर्व जिले के भर मुख्य जनप्रितनिधियों व नेताओं का निवास क्षेत्र बारापत्थर ऐरिया में बेखौफ होकर चलने वाले जुआं फड़, सट्टा का कारोबार, सफेद पाउडर के नशे के साथ अवैध गतिविधियों का संचालन को कोतवाली पुलिस के साथ में आॅन द स्पाट पर जाकर पकड़वाने में मदद किया था।  

एफआईआर की खानापूर्ति किया था 


दलित युवक अनुराग डेहरिया ने जिन जुआं फड़ संचालक, ड्रग्स की पुड़िया का धंधा करवाने वालों को पकड़वाकर कार्यवाही कराया था उस दौरान कोतवाली पुलिस थाना प्रभारी और कोई थे। इसके दो दिनों के बाद उन युवकों ने अनुराग डेहरिया युवक को उठाकर ले जाकर बारापत्थर क्षेत्र में ही अधमरा करते तक मारा था। इस संबंध में शिकायत के बाद कोतवाली पुलिस, अजाक थाना ने अपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने वालों के हिसाब से एफआईआर की खानापूर्ति किया था। 

दलित युवक अनुराग डेहरिया के परिवार वालों का जीना हराम कर दिया था 

इसके बाद जुआं, सट्टा का संचालन करने वालों ने दलित युवक अनुराग डेहरिया के परिवार वालों का जीना हराम कर दिया था। घर में घुसकर महिलाओं का धमकाना, परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट करना, पिता आॅटो चलाते थे, परिवार का पालन पोषण करते थे उन्हें परेशान करना। दहशत भरी जिंदगी जीने को दलित युवक अनुराग डेहरिया का परिवार मजबूर हो गया था।
        कोतवाली पुलिस में पुलिस अधीक्षक के यहां शिकायत करने जाने पर दलित युवक अनुराग डेहरिया की और उनके परिवारजनों की कोई सुनवाई नहीं होती थी। इस संबंध में सोशल मीडिया में अनेकों बार वीडियों बनाकर भी पोस्ट किया लेकिन आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में ही कोतवाली पुलिस ने अपनी भूमिका निभाते रही। 

पुलिस प्रशासन के ऐसे चेहरों को बेनकाब करना होगा 

जुआं, सट्टा और ड्रग्स की पुड़िया का अवैधानिक कारोबार को पकड़वाना दलित युवक अनुराग डेहरिया को इतना महंगा पड़ गया कि उसे गला कटवाकर निमर्मतापूर्वक अपनी जान गवाना पड़ा। दलित परिवार का युवक अनुराग डेहरिया की हत्या के मूल जड़ तक नवागत पुलिस अधीक्षक को पहुंचना जरूरी है क्योंकि कोतवाली पुलिस थाना क्षेत्र यानि शहर को अपराधमुक्त रखना है तो आपराधिक कृत्य को संरक्षण देने वाले पुलिस प्रशासन के ऐसे चेहरों को बेनकाब करना होगा जो वर्दी की आड़ में रूपये पैसा लेकर अवैधानिक गतिविधियों को संरक्षण दे रहे है। 

दलित परिवार का विश्वास न्याय की उम्मीद को लेकर उठ चुका है

बहरहाल दलित युवक अनुराग डेहरिया का परिवार हत्या के बाद दहशत के साये में जीने के लिये सहम गया है क्योंकि अनुराग के बड़े भाई अभिषेक डेहरिया की हत्या करने की कोशिश करते हुये दशहरा के दिन चाकूओं से गोदकर 18 से 20 टांकों तक का जख्म दिया गया था।
            इस मामले में भी अनुराग डेहरिया का गला काटने वालों का हाथ था जिन पर कानूनी कार्यवाही करने एफआईआर दर्ज करने में कोतवाली पुलिस ने पीड़ित दलित परिवार को बार-बार कानून की चौखटों में नाक रगड़वाया था। बीते दो वर्ष में कोतवाली थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली को लेकर पीड़ित दलित परिवार ने आरोप लगाते हुये नवागत पुलिस अधीक्षक से कार्यवाही की मांग भी किया है। कोतवाली पुलिस थाना प्रभारी से पीड़ित दलित परिवार का विश्वास न्याय की उम्मीद को लेकर उठ चुका है। 

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