आदिवासी बालिका का रेप कर बनाया वीडियो, ब्लैकमेलिंग कर 3 दोस्तो से भी करवाया बलात्कार
पुलिस ने पीड़िता पर दबाव देकर 1 पर मामला बनाकर तीन को दिया था अभयदान
164 के बयान में खुली पुलिस की महिला के प्रति संवेदनशीलता की पोल
बरघाट थाने में नाबालिक आदिवासी बच्ची के मामले में महिला एसआई की हुई थी शिकायत
सिवनी। गोंडवाना समय।
आदिवासी बाहुल्य जिला सिवनी में आदिवासी वर्ग के साथ अन्याय, अत्याचार, शोषण के मामले रूकने का नाम नहीं ले रहे है। इनकी संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है वहीं पुलिस प्रशासन के उच्चाधिकारियों की महिला के प्रति संवेदनशीलता के साथ कार्यवाही करने की नसीहत व निर्देश का असर धरातल पर होते नहीं दिख रहा है।
आदिवासी बाहुल्य जिला मुख्यालय सिवनी में आदिवासी नाबालिक बालिका के साथ दुराचार अनैतिक कृत्य का मामला सामने आया है जिसमें पीड़िता को प्रथम स्तर पर पुलिस की चौखट में ही न्याय नहीं मिल पाया है।
महिला पुलिस थाना में पदस्थ पुलिस कर्मियों के द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने में पीड़िता पर ही दबाव बनाकर एक को ही आरोपी बनाकर तीन को अभयदान देने का प्रयास किया गया है। पुलिस की कार्यप्रणाली की पोल खुद पीड़िता ने अपने 164 के बयान में खोल दी है। अब पुलिस प्रशासन के उच्चाधिकारियों को इस मामले में संवेदनशीलता बरतने की आवश्यकता है।
गरीब मासूम आदिवासी बच्ची की अस्मत को तार-तार कर दिया
हम आपको बता दे कि 16 साल की नाबालिक आदिवासी बच्ची को प्रेमजाल में एक बढ़ई लड़के ने फंसाया, बहला फुसलाकर इसके साथ ज्यादती किया। वहीं अपनी हैवानियत का वीडियो बनाया। इसके बाद वीडियो को अपने तीन दोस्तों ने वीडियो बनाने वाले दोस्त की मदद से नाबालिक को ब्लैकमेल किये। वीडियो दिखाकर वायरल करने की धमकी दिए। इसके साथ ही वायरल नहीं करने के लिये शर्त रखी कि हमें भी हैवानियत करने दो। नाबालिक आदिवासी बच्ची लोकलाज के डर से इन चारों दरिंदो के चुंगल में फंस गई और चारो ने उस नाबालिक गरीब मासूम आदिवासी बच्ची की अस्मत को तार-तार कर दिया।
वकीलों के सवाल का जवाब तुम नहीं दे पाओगी
हैवानियत करने वालों की भूख यहीं खत्म नहीं हुई आदिवासी नाबालिक बच्ची को और भी ब्लैकमेल किया जाने लगा। बच्ची ने तंग आकर अपने परिजनों को बताया,परिजनों ने बच्ची को पुलिस के पास ले गए तो प्रथम दृष्टया पुलिस ने यह कहते हुए कि तुम्हारी बदनामी होगी। वकीलों के सवाल का जवाब तुम नहीं दे पाओगी इसीलिए एक का नाम लिखा दो और बच्ची ने मुख्य आरोपी का नाम लिखवाकर चली आई लेकिन बाद में जब 164 के बयान में बच्ची ने चारों आरोपियों का नाम के बयान दर्ज कराई।
अग्रिम जमानत का मौका दिया जाता है
आखिर पुलिस पीड़ित का साथ क्यों नहीं दे पा रही है। हमेशा पीड़िता को क्यों डराया धमकाया जाता है। कहीं इसके पीछे अन्य आरोपियों को बचाने का खेल तो नहीं चल रहा है। राजस्थान में 13 साल की बच्ची के साथ 100 लोगों ने बलात्कार किया, बच्ची मर गई, क्या पुलिस ऐसा ही कुछ करना चाहती है।
यह कोई पहली घटना नहीं है जहां पीड़ित को डरा चमक कर आरोपियों को बचाया जाता है, उन्हें संरक्षण दिया जाता है, उन्हें अग्रिम जमानत का मौका दिया जाता है, उन्हें फरार होने का मौका दिया जाता है और बदले में उनसे बहुत सी व्यवस्थाएं स्वीकार की जाती हैं।
यह सवाल पुलिस विभाग के साथ-साथ पुलिस कप्तान से भी जनता पूछना चाहती है कि आरोपियों की श्रेणी में क्या वह पुलिसकर्मी नहीं आता है जो पीड़ित पक्ष के साथ खड़ा ना होकर आरोपी पक्ष को संरक्षण देने में अपनी भूमिका निभाता है जबकि पीड़ित एक नाबालिक आदिवासी बच्ची है, उसे डरा चमाककर अन्य आरोपियों का नाम नहीं लेने के लिए कहना क्या पुलिस अनुशासन की अवहेलना नहीं है, क्या ऐसे पुलिसकर्मियों पर कप्तान कार्यवाही करेंगे।
वीडियो के माध्यम से ब्लैकमेल कर दोस्तों से भी दुष्कृत करवाया
पुलिसिया कार्यवाही के बाद जब सक्षम अधिकारी के सामने नाबालिक बच्ची का 164 का बयान हुआ तब नाबालिक बच्ची ने चार आरोपियों के नाम खोल दिए और उसके बाद पुलिस जिन तीन आरोपियों को संरक्षण देकर रखी थी, उन्हें ढूंढने लग गई। पीड़िता के नाबालिक पीड़ित बच्ची के बयान के अनुसार गौरव विश्वकर्मा बच्ची से पहले मोबाइल पर बात कर नजदीकियां बढ़ाया, उसके बाद अपने दोस्त सत्यम कोसले जिसे बच्ची अपना भाई मानती थी उसके माध्यम से अपने घर बुलवाया और उसके साथ उसका मुंह दबाकर दुष्कृत किया।
दुष्कृत करने के बाद उसे डराया चमकाया
दुष्कृत करने के बाद उसे डराया चमकाया और जान से मारने की धमकी दी। इस पूरी घटना को अंजाम देने वाला गौरव विश्वकर्मा ने वीडियो भी बनाया। इस वीडियो को अपने दोस्तों को दिया। इसी बीच हार्दिक शर्मा नामक लड़के ने पीड़िता को रोककर वीडियो दिखाकर यह धमकी दी कि अगर वह उसके घर में नहीं आएगी तो उसका वीडियो वायरल कर देगा।
कुछ दिनों तक धमकाते रहा पीड़िता डर के कारण हार्दिक शर्मा के घर गई। हार्दिक शर्मा ने भी पीड़िता के साथ दुष्कृत करने का प्रयास किया। इसी बीच पीड़िता वहां से भाग निकली, अभिषेक यादव और सत्यम कोसले नामक लड़कों ने गौरव विश्वकर्म और हार्दिक शर्मा का इस दुष्कृत को करने में मदद किया परंतु यह सब बताने के बाद भी पुलिस ने कोई मदद नहीं की।
तुम इतने सारे लोगों का नाम मत लिखाओ
उल्टा पीड़िता के बताएं अनुसार नीलू उइके नामक महिला पुलिसकर्मी ने पीड़िता को यह बोला कि वकील तरह-तरह के सवाल पूछेंगे तुम बदनाम हो जाओगी, तुम इतने सारे लोगों का नाम मत लिखाओ, तुम किसी एक का नाम लिखाओ, बच्ची को दबाव बनाकर एक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी गई और बच्ची दबाव में आकर न्याय न होने के चलते अपने परिजनों को यह बात बताते रही कि मेरे साथ चार लोगों ने गलत किया है।
क्या ऐसे दरिंदों से छिपकर क्या मासूम को छिपकर जीना पड़ेगा
ठीक इसके बाद 164 के बयान में नाबालिक बच्ची ने चारों आरोपियों के नाम खोल दी और पुलिस बचे तीन आरोपियों को ढूंढने की जबरन कोशिश कर रही है जबकि यह तीनों आरोपी फरार हो चुके हैं और उनकी अग्रिम जमानत की कार्रवाई भी शुरू हो गई है।
अब ऐसे में जी पुलिसकर्मी ने बच्ची को दबाव बनाया, क्या वह भी आरोपी की श्रेणी में नहीं आती है, क्या कप्तान इस पुलिसकर्मी पर कार्रवाई करेंगे। गौरव विश्वकर्मा, हार्दिक शर्मा, अभिषेक यादव, सत्यम कोसले क्या पुलिस ऐसे दुराचारियों का नाम उजागर कर प्रेस नोट जारी करेगी, क्या इनका जुलूस निकाला जाएगा, क्या ऐसे दरिंदों से छिपकर क्या मासूम को छिपकर जीना पड़ेगा या फिर इन दरिदों को जनता के सामने लाकर उनकी हकीकत दिखाई जाएगी।
बरघाट थाने में भी एसआई नीलू उइके पर लगे थे आरोप
बरघाट थाना अंतर्गत नाबालिक आदिवासी बच्ची के साथ दुष्कृत के मामले में भी बरघाट थाना अंतर्गत जनवरी 2025 में दर्ज हुये मामले में भी आदिवासी नाबालिग बच्ची ने एसआई नीलू उइके पर दबाव बनाने और बयान अपने हिसाब लिखने का आरोप लगाया था।
इतना ही नहीं पीड़ित आदिवासी नाबालिक बच्ची को कक्षा बारहवी की परीक्षा के समय परीक्षा दिनांक के समय ही बयान देने के लिये बार-बार थाना बुलाकर दबाव बनाने का आरोप एसआई नीलू उइके पर लगाया था। इतना ही नहीं बयान बदलने के लिये भी एसआई नीलू उइके के द्वारा दबाव बनाया जाकर बच्ची के साथ मारपीट भी की गई थी।
पीड़ित नाबालिक बच्ची को बयान नहीं बदलने पर परिवार के सदस्यों को जेल भिजवाने की धमकी भी दी गई थी। मेडिकल के लिये बच्ची को साथ में ले जाने के दौरान भी एसआई नीलू उइके का व्यवहार ठीक नहीं था। एसआई नीलू उइके के द्वारा बयान लिखकर दिया गया था और नाबालिक बच्ची से पढ़ने का कहा जाकर वीडियों बनाया गया था इस तरह के आरोप नाबालिक आदिवासी बच्ची ने लगाया था।
