बाघ के शिकारियों को छोड़ने में योगेश पटेल एसडीओ की क्या है भूमिका ?
मुख्यमंत्री से लेकर वन विभाग के अफसरों तक पहुंची शिकायत कहां दबी
बाघ के शिकार जैसे संवेदनशील मामले में योगेश पटेल को मिल रहा संरक्षण
सिवनी। गोंडवाना समय।
बाघ की संख्या को लेकर मध्यप्रदेश पूरे देश में प्रसिद्ध है। वहीं दूसरी ओर बाघ के शिकार होने के बाद वन्य अपराधों के तहत वन विभाग की कार्यवाही और जेल भेजने के लिये पूरी गंभीरता से सक्रियता के साथ जिम्मेदारी निभाने की वाहवाही अक्सर मीडिया की सुर्खियां बनी रहती है।
यदि उसी वन विभाग के अफसर बाघ के शिकारियों को अपनी अर्थलिप्सा को पूरी करने के लिये छोड़ने में अपनी भूमिका निभाये और उसी अफसर को वन विभाग के उच्च अधिकारी बचाने में अपना कर्तव्य निभाये तो ऐसी स्थिति में बाघ को बचाने के लिये करोड़ों की योजनाएं दिखावा ही सिद्ध होगी।
बच्चों को चित्रकारी, रंगोली, पेंटिंग्स और कहानियों के माध्यम से बाघ व वन्य प्राणियों को बचाने की शपथ दिलाने वाला वन विभाग ही यदि बाघ के शिकारियों को छोड़ने वाले एसडीओ को बचाने के लिये संरक्षण देने में अपनी भूमिका निभायें तो इसे क्या कहा जायेगा।
बाघ के शिकारियों को बढ़ावा देने का कार्य किया
दक्षिण वन मण्डल सामान्य क्षेत्र में पदस्थ एसडीओ योगेश पटेल वन विभाग के अपने मातहत कर्मचारियों को प्रताड़ित करने के मामले में चर्चित चेहरा के रूप में अपनी पहचान रखते है। यहां तक कि वन विभाग के विश्राम गृह का उपयोग शराब कवाब की पार्टी अपने मित्रों को खुश करने के लिये भी चर्चित रहे है।
प्रताड़ित कर्मचारियों ने एसडीओ योगेश पटेल की प्रताड़ना से मुक्ति के लिये शिकवा शिकायत भी किया था लेकिन वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने संरक्षण देते हुये एसडीओ योगेश पटेल को बचाने में अपनी भूमिका निभाया। एसडीओ योगेश पटेल द्वारा हद तो तब पार कर दी गई है जब बाघ के शिकारियों को छोड़ने में अपनी अर्थलिप्सा को पूरी करने के लिये वन विभाग के कानून को ठेंगा दिखाकर बाघ के शिकारियों को बढ़ावा देने का कार्य किया गया है।
पीओआर बदलकर अज्ञात आरोपी के नाम से दर्ज किया मामला
दक्षिण वन मण्डल सामान्य सिवनी के अंतर्गत बाघ के शिकार जैसे संवेदनशील मामले में योगेश पटेल ने बाघ के शिकारियों को छोड़ने के लिये बड़ा ही खेला किया है। बाघ के शिकार जैसे संवेदनशील मामले में पीओआर बदलकर प्राथमिक वन अपराध प्रकरण दर्ज करने में अर्थलिप्सा की प्यास बुझाने के लिये एसडीओ योगेश पटेल ने वन विभाग के कानून को ठेंगा दिखाकर बाघ के शिकारियों को बढ़ावा देने का जो कृत्य किया है उसे संरक्षण देने का काम मध्यप्रदेश वन विभाग के उच्च अफसरों ने कोई कसर नहीं छोड़ा है।

