जनजाति की जमीन हड़पने 26 साल से सूरज वर्मा शासन, प्रशासन व न्यायालय को कर रहा गुमराह
राजस्व के पटवारी व पुलिस की सांठगांठ का सूरज वर्मा उठा रहा फायदा
अपने साले अशोक वर्मा को राजकुमार उइके बनाकर सूरज वर्मा ने कराया था फर्जी रजिस्ट्री
सूरज वर्मा अधिसूचित क्षेत्र कुरई में 26 साल से आदिवासी की जमीन में खेती कर कमा रहा लाभ
कुरई/सिवनी। गोंडवाना समय।
पढ़ लिखकर मेहनत करके अधिकारी, कर्मचारी एवं माननीय न्यायालय की कुर्सी में बैठकर न्याय करने वाले सम्मानीय न्यायालय को लगभग 26 वर्ष से अधिक समय से अधिसूचित ब्लॉक कुरई तहसील के ग्राम पोतलई में सूरज वर्मा ने वर्ष 2002 में लगभग 3 एकड़ जनजाति वर्ग की जमीन को पहले ठेकानामा के नाम पर फिर उसके बाद अपने ही साले अशोक वर्मा को राजकुमार उइके बनाकर रजिस्ट्रार कार्यालय सिवनी में सांठगांठ करते हुये फर्जी रजिस्ट्री करवा लिया था। जिसका नामांतरण वर्ष 2013 तक नहीं कराया तब तक उक्त जमीन पर खेती कर सूरज वर्मा लाभ कमाते रहा और आज भी राजस्व विभाग के पटवारी, पुलिस की सांठगांठ से वह लाभ ही कमा रहा है।
सूरज वर्मा की चाल के आगे नतमस्तक है
ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले सूरज वर्मा की चालाकी के आगे पुलिस प्रशासन, राजस्व विभाग के अधिकारी कर्मचारी, पटवारी, यहां तक माननीय न्यायालय तक को वह आसानी से गुमराह कर रहा है। बीते लगभग 26 वर्ष से सूरज वर्मा ने जनजाति वर्ग की खेती की जमीन पर खेती करके लाखों रूपये का लाभ कमा चुका है। जनजाति वर्ग की जमीन हड़पने के लिये सूरज वर्मा जिस तरह की चालबाजी दिखाता आ रहा है, उसकी चाल के आगे सभी नतमस्तक है।
अपने साला अशोक वर्मा को बना दिया राजकुमार उइके
आदिवासी बाहुल्य मध्यप्रदेश में आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी आसानी से नहीं खरीद सकता है। इसके लिये विशेष परिस्थिति में ही कलेक्टर की अनुमति के बाद ही विक्रय करने की अनुमति दी जाती है और फिर गैर आदिवासी जमीन क्रय कर पाता है।
ऐसा नियम सामान्य ब्लॉक में है लेकिन अधिसूचित क्षेत्र व आदिवासी विकासखंड में तो आदिवासी की जमीन क्रय करने के लिये अनुमति भी नहीं मिल पाती है। ऐसी स्थिति में सूरज वर्मा जैसे भूमाफियाआें के लिये आदिवासी की जमीन खरीद पाना असंभव था तो सूरज वर्मा ने ऐसी तरकीब निकाला कि अपने ही साला अशोक वर्मा को राजकुमार उइके बनाकर आदिवासी के रूप में खड़ा करके ग्राम पोतलई में जनजाति वर्ग की जमीन को खरीदने का फर्जीवाड़ा किया। सूरज वर्मा की चालाकी के कारण अच्छे अच्छे पढ़े लिखे भी फेल हो चुके है।
पटवारी के संरक्षण में सूरज वर्मा कर रहा खेला
सूरज वर्मा गांधी छाप चश्मा पहनकर जनजाति वर्ग की जमीन हड़पने के लिये राजकुमार उइके नाम की आड़ में जो करामात कहें या करतूत सूरज वर्मा कर रहा है उसकी हकीकत हालांकि क्षेत्रिय राजस्व अधिकारियों, कर्मचारियों व विशेषकर पटवारी को है लेकिन सूरज वर्मा के द्वारा गांधी छाप चश्मा पहनने के कारण उसका चेहरा चौंधिया जाती है और उन्हें फर्जी बनाकर लाये गये राजकुमार उइके सही नजर आता है।
जबकि भौतिकता और वास्तविकता में यह है कि सूरज वर्मा का साला अशोक वर्मा रजिस्ट्री के समय राजकुमार उइके बना था। ग्राम पोतलई में जनजाति वर्ग की जमीन को हड़पने में सूरज वर्मा का सहयोग और संरक्षण ग्राम पोतलई में कार्यरत रहे पटवारी विशेष रूप से 20 वर्ष से अधिक समय से साथ देते आ रहे है।

