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7 बार के सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और 20 साल की भाजपा सरकार में भी घंसौर अस्पताल बदहाल!

 7 बार के सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और 20 साल की भाजपा सरकार में भी घंसौर अस्पताल बदहाल!

कांग्रेस का तीखा हमला, जनपद सदस्य सुखदेव पंद्रे ने सांसद की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर टिप्पणी के बाद निशाने पर आये सांसद 

घंसौर/सिवनी। गोंडवाना समय।

मंडला संसदीय क्षेत्र के सात बार के सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और मध्यप्रदेश में लंबे समय से सत्ता में रही भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर सिवनी जिले के आदिवासी बहुल विकासखंड घंसौर में सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति को लेकर कांग्रेस ने भाजपा नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है।                         


जनपद सदस्य सुखदेव पंद्रे ने भी सांसद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि जब क्षेत्र को वर्षों से जनप्रतिनिधित्व और सरकार का संरक्षण प्राप्त है, तो फिर आम आदिवासी परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं क्यों नहीं मिल पा रही हैं?
                पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर टिप्पणी के बाद सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते विपक्ष के निशाने पर हैं। इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच घंसौर के अस्पताल की स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों ने क्षेत्रीय विकास, जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर बहस तेज कर दी है।

अस्पताल की दुर्दशा पर उठाए सवाल  

जनपद सदस्य सुखदेव पंद्रे ने सवाल उठाते हुये कहा है कि सांसद कुलस्ते हाल ही में घंसौर क्षेत्र के दौरे पर थे, जहाँ उन्होंने ग्राम भिलाई के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के कार्यक्रम में भाग लिया, एकलव्य आवासीय विद्यालय का निरीक्षण कर भोजन किया और जनपद पंचायत सभागार में 'दिशा' समिति की बैठक ली।                             राजनीतिक विश्लेषकों और स्थानीय नेताओं का कहना है कि सांसद जिन संस्थाओं और भवनों में कार्यक्रम कर रहे हैं, वे सभी पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में घंसौर की तत्कालीन विधायक व पूर्व आदिम जाति कल्याण मंत्री स्वर्गीय श्रीमती उर्मिला सिंह के प्रयासों से निर्मित हुए थे। 

            आरोप है कि फग्गन सिंह कुलस्ते लगातार 7 बार से सांसद हैं और मध्य प्रदेश में 20 से अधिक वर्षों से भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, इसके बावजूद घंसौर के विकास में कोई नया मील का पत्थर नहीं जोड़ा जा सका। कांग्रेस शासनकाल में स्वर्गीय श्रीमती उर्मिला सिंह के कार्यकाल के दौरान घंसौर में निर्मित 100 बिस्तरों वाला सर्वसुविधायुक्त (सिविल ) अस्पताल आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है।

         स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस अस्पताल की इमारत दिग्विजय सिंह सरकार के समय बनी थी, वर्तमान शासनकाल में उसकी ठीक से पुताई तक नहीं हो पा रही है। लगातार 7 बार सांसद रहने के बावजूद क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के इस हाल पर अब सांसद कुलस्ते के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है।

सात बार सांसद, फिर भी बुनियादी सुविधाओं पर सवाल 

फग्गन सिंह कुलस्ते लंबे समय से मंडला संसदीय क्षेत्र की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में क्षेत्र के आदिवासी बहुल इलाकों में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पेयजल और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर उनसे सवाल पूछना स्वाभाविक है।
            घंसौर जैसे आदिवासी बहुल विकासखंड में अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर असंतोष सामने आने पर यह सवाल उठता है कि इतने लंबे राजनीतिक अनुभव और केंद्र तथा प्रदेश में भाजपा की सरकारों के बावजूद स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था में अपेक्षित सुधार क्यों नहीं दिखाई दे रहा है? अस्पताल किसी भी क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं में से एक है।
                 ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में रहने वाले लोगों के लिए समय पर उपचार, पर्याप्त चिकित्सक, जरूरी दवाइयां, जांच की सुविधा, प्रसव सेवाएं और आपातकालीन चिकित्सा विशेष महत्व रखती हैं। यदि इन सुविधाओं के लिए लोगों को दूसरे शहरों का रुख करना पड़े, तो इसका सीधा असर गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति और मरीजों की सुरक्षा पर पड़ता है।

बीस साल की भाजपा सरकार से जनता का सवाल 

मध्यप्रदेश में भाजपा लंबे समय से सत्ता में रही है। ऐसे में घंसौर के अस्पताल की बदहाली को लेकर उठने वाले सवाल केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं और जवाबदेही से भी जुड़ते हैं। विपक्ष का सवाल है कि सरकार विकास के दावों और उपलब्धियों को सामने रखती है, लेकिन आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन कौन करेगा?
                क्या अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित है? क्या मरीजों को समय पर जांच, उपचार और आवश्यक दवाइयां मिल रही हैं? क्या गंभीर मरीजों को तत्काल रेफरल और एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध हो पा रही है? इन सवालों का जवाब सरकारी आंकड़ों, अस्पताल के रिकॉर्ड और जमीनी निरीक्षण से सामने आना चाहिए। घंसौर की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर उठ रहे मुद्दे इस बात की मांग करते हैं कि संबंधित विभाग केवल कागजी समीक्षा तक सीमित न रहे, बल्कि अस्पताल की वास्तविक जरूरतों का आकलन कर ठोस सुधार सुनिश्चित करे।

सुखदेव पंद्रे जनपद सदस्य के तीखे सवाल

जनपद सदस्य सुखदेव पंद्रे ने सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका रुख इस व्यापक जनचिंता को सामने लाता है कि क्षेत्र के विकास का मूल्यांकन केवल राजनीतिक बयानों या चुनावी उपलब्धियों के आधार पर नहीं, बल्कि आम जनता को मिल रही सुविधाओं के आधार पर भी किया जाना चाहिए। सांसद का दायित्व केवल संसद में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने तक सीमित नहीं माना जाता।
            जनता उनसे यह अपेक्षा भी करती है कि वे अपने संसदीय क्षेत्र की समस्याओं को संबंधित मंत्रालयों और सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाएं, विकास कार्यों की निगरानी करें और जरूरतमंद क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए पहल करें।

घंसौर में अस्पताल को सिविल हॉस्पिटल बनाने की मांग भी उठ चुकी 

घंसौर की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर असंतोष पहले भी सार्वजनिक रूप से सामने आ चुका है। दिसंबर 2025 में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल हॉस्पिटल का दर्जा देने और विशेषज्ञ डॉक्टरों की पदस्थापना की मांग को लेकर घंसौर में पुरजोर मांग उठाई गई थी। इस दौरान क्षेत्र में आवश्यक उपकरण, दवाइयां और आपातकालीन सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी उठी थी। वहीं जुलाई 2026 में घंसौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक युवक की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने एंबुलेंस तथा स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया था। इन घटनाओं के मद्देनजर स्वास्थ्य व्यवस्था का सवाल केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय नहीं, बल्कि ग्रामीण जनता की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा मुद्दा है। यदि क्षेत्र में लंबे समय से स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की मांग हो रही है, तो सरकार और स्वास्थ्य विभाग को इन मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

राजनीतिक बयानबाजी से आगे, विकास का हिसाब दे सरकार 

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल को लेकर सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते की टिप्पणी ने राजनीतिक बहस को हवा दी है। घंसौर में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में उन्होंने कांग्रेस सरकार के पुराने कार्यकाल में विकास कार्यों के लिए धन की कमी होने और तबादलों से संबंधित चचार्ओं का जिक्र किया था।
            लेकिन मौजूदा समय में जनता के सामने सवाल यह है कि बीते वर्षों में भाजपा सरकार ने घंसौर के लिए क्या किया और क्षेत्र की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए कौन-कौन से ठोस कदम उठाए गए? पुरानी सरकारों की कमियां गिनाना राजनीतिक विमर्श का हिस्सा हो सकता है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था के प्रदर्शन का मूल्यांकन वर्तमान उपलब्धियों और कमियों के आधार पर ही होना चाहिए।
            यदि घंसौर में अस्पताल को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधा के रूप में विकसित करने की जरूरत है, तो सरकार को इसके लिए स्वीकृत पदों, उपलब्ध चिकित्सकों, विशेषज्ञ सेवाओं, बजट, उपकरणों और प्रस्तावित उन्नयन की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

सुखदेव पंद्रे ने घंसौर अस्पताल को ये भी रखी मांग 

जनपद सदस्य सुखदेव पंद्रे ने सवाल उठाते हुये कहा है कि घंसौर अस्पताल की व्यवस्था सुधारने के लिए ठोस कार्ययोजना कब बनेगी, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता कैसे सुनिश्चित होगी और अस्पताल को उन्नत करने की मांग पर सरकार क्या निर्णय लेगी?घंसौर अस्पताल में स्वीकृत एवं रिक्त चिकित्सकीय पदों की जानकारी सार्वजनिक की जाए, विशेषज्ञ डॉक्टरों की आवश्यकता का आकलन कर पदस्थापना सुनिश्चित की जाए, दवाइयों, जांच सुविधाओं, आवश्यक उपकरणों और एंबुलेंस की उपलब्धता की समीक्षा हो, गंभीर मरीजों को समय पर रेफर करने और आपातकालीन उपचार की व्यवस्था मजबूत की जाए, अस्पताल को सिविल हॉस्पिटल में उन्नत करने की मांग पर शासन की स्थिति स्पष्ट की जाए, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की समीक्षा बैठकों में स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता देकर कार्रवाई की प्रगति सार्वजनिक की जाए, आदिवासी जनता को चाहिए बेहतर इलाज, केवल राजनीतिक आश्वासन नहीं घंसौर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी तथा अन्य ग्रामीण परिवारों के लिए अस्पताल की सुविधा सीधे जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ी है।
                 बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में समय पर इलाज मिलना किसी राजनीतिक दल की कृपा नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की बुनियादी जिम्मेदारी है। सात बार सांसद रहे फग्गन सिंह कुलस्ते के लंबे राजनीतिक अनुभव को देखते हुए जनता उनसे यह अपेक्षा कर सकती है कि वे घंसौर की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी पहल करें। इसी प्रकार प्रदेश सरकार को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं केवल योजनाओं और घोषणाओं तक सीमित न रहें।

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