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गद्दार कांग्रेसी सदस्यों के सहयोग से भाजपा जिला पंचायत अध्यक्ष को मिला विश्वास मत

गद्दार कांग्रेसी सदस्यों के सहयोग से भाजपा जिला पंचायत अध्यक्ष को मिला विश्वास मत

घनश्याम सनोडिया, दुपेन्द्र अमूले, तेज सिंह रघुवंशी, राकेश सनोडिया, पप्पू ठाकुर, चित्रा बिसेन संदिग्ध 

मायादेवी कुमरे का भी भाजपा को साथ मिलने की चर्चा 

कांग्रेस और गोंगपा के गठबंधन के बाद भी भाजपा को कैसे मिला विश्वास मत


सिवनी। गोंडवाना समय।

जिसके साथ सब थे वह हार गये और जिसके साथ कोई नहीं था वह जीत गये। कांगे्रस के 11 और गोंगपा 5 के जिला पंचायत सदस्यों की कुल संख्या 16 होने के बाद भाजपा के  3 जिला पंचायत सदस्य होने के बाद कैसे विश्वास मत पाने में सफल हो गये।
             


यह कांग्रेस के लिये चिंतन-मंथन के लिये बड़ा सबक है। इसके बाद भी कांग्रेस ने यदि सीख नहीं लिया तो कांग्रेस को सिवनी व बरघाट विधानसभा में हारने का इतिहास में बढ़ोत्तरी होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। गद्दारी का शौक को  अमलीजामा पहनाने की प्रक्रिया कांग्रेस में बढ़ती जा रही है। सबसे पहले कांग्रेस को पार्टी के प्रति वफादारी, ईमानदारी को मजबूत करना होगा।
            बीते चुनावी इतिहास को देखे तो कांग्रेस में सांसद जैसे सीट पर प्रत्याशी अपना नामाकंन वापस लेकर भाजपा की झोली में जीत आसानी से भर रहा है। राज्यसभा में गद्दारी करके भाजपा को कम वोट होने के बाद भी जिता रहा है। कांग्रेस की कमलनाथ सरकार मध्यप्रदेश में गिराने में कांग्रेसी विधायक व नेताआें की ही बड़ी भूमिका थी।
            कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व राहूल गांधी, प्रियंका गांधी भले ही सड़कों पर पुलिस के लाठी डंडो के बीच जमीन पर लेटकर घसटकर कांग्रेस को सत्ता में वापस लाने का प्रयास करें लेकिन उनकी ये मंशा कांग्रेस की विचारधारा के प्रति, कांग्रेस के मिशन के प्रति पार्टी के पदाधिकारियों व चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी और कांग्रेस से जीतकर जाने वाले उम्मीदवारों के लिये मजबूत, ईमानदार, निष्ठा, वफादारी पर संदेह की संभावना ज्यादा बढ़ने लगी है। इसके चलते कांग्रेस सत्ता से कोसो दूर होती जा रही है।

आखिर कौन कांग्रेसी जिला पंचायत सदस्य गद्दार है ?  

सिवनी जिले में जिला  पंचायत अध्यक्ष के प्रति अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। सिवनी जिला पंचायत में कुल 19 सदस्य है। कांग्रेस के 10,


गोंगपा के 5, भाजपा के 3 है और 1 निर्दलीय है लेकिन निर्दलीय को कांग्रेस अपना सदस्य मानती है।
        सिवनी जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रति अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। जिसके लिये वोटिंग 22 अक्टूबर को हुई तो भाजपा समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष को पक्ष में 7 और 12 वोट विपक्ष में पड़े इससे अविश्वास मत पारित नहीं हो पाया और भाजपा की जिला पंचायत  अध्यक्ष पुन: कुर्सी में काबिज हो गई।
             

परिणाम बाहर आने के बाद कांग्रेसी खेमे में चिंता की लकीरे खिच गई और भाजपाईयों में श्रेय लेने की होढ़ मच गई। जिन्होंने जिला  पंचायत अध्यक्ष को पुन: विश्वास मत लाने में कोई मदद भी नहीं किया था वह नेता जी श्रेय लेते हुये नजर आये। अब सवाल यह उठ रहा है कि कौन कांग्रेसी जिला पंचायत सदस्य गद्दार है जिसने कांग्रेस के जिला पंचायत सदस्य को अध्यक्ष बनने से रोका। 

जीतू पटवारी और उमंग सिंघार को गद्दारों को खोजने की है जरूरत 

मध्यप्रदेश में आगामी समय में पंचायती, नगरीय निकाय के बाद विधानसभा चुनाव होना है। मध्यप्रदेश में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित वरिष्ठ कांग्रेस नेता, विधायकगण भरपूर कोशिश कर रहे है कि कांग्रेस मध्यप्रदेश में सत्ता में वापस लौटे लेकिन उनकी मेहनत कैसे सफल होगी, इस पर आत्मचिंतन करना बेहद जरूरी है।
            सिवनी में जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ लाये गये अविश्वास मत को लेकर जिला कांग्रेस सिवनी के प्रभारी, जिला कांग्रेस अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस पदाधिकारी, विधायक सहित अन्य नेताआें ने रणनीति बनाकर गोंगपा के साथ गठबंधन करके कांग्रेस के 11 जिला पंचायत सदस्य और गोंगपा के 5 सदस्यों को मिलाकर कुल 16 सदस्य थे और भाजपा के पास 3 सदस्य थे।
        इसके बाद भी वोटिंग परिणाम के दौरान भाजपा को 7 और कांग्रेस के पक्ष में 12 ही मत डल पाये अब सवाल यह उठ रहा है कि 4 कौन कांग्रेसी संदिग्ध चेहरे है जिन्होंने गद्दारी करके भाजपा का जिला पंचायत अध्यक्ष को विश्वास मत दिलाने में अपनी भूमिका निभाया। इसको लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार को सचेत और सबक लेकर गद्दारों को चिन्हित करने की आवश्यकता है।    

नितिन डेहरिया को आगे बढ़ने से रोकने किया गद्दारी 

जिला पंचायत अध्यक्ष नितिन डेहरिया नव युवा न बन जाये, इसको भी कुछ र्कांग्र्रेसी जिला पंचायत सदस्य नहीं पचा पा रहे थे। वहीं कुछ जिला पंचायत सदस्य गुटबाजी के शिकार हो गये, वहीं कुछ कार्ययोजना के 75 लाख की राशि मिलने के लोभ के चक्कर में गद्दारी करने में सफल हो गये।
            अनुसूचित जाति वर्ग का नव युवक जिला पंचायत सदस्य नितिन डेहरिया का जिला पंचायत अध्यक्ष बनना तय था लेकिन गद्दार कांग्रेसियों ने अपनी ही पार्टी को नीचा दिखाने में गद्दारी करने में कोई कसर नहीं छोड़े। कांग्रेस की गुटबाजी को हवा देने वाले नेताआें को खोजने की आवश्यकता है।
            राजनीतिक गलियारों में गद्दार कांग्रेसी के नामों में इन नामों की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है। जिसमें घनश्याम सनोडिया, दुपेन्द्र अमूले, तेज सिंह रघुवंशी, राकेश सनोडिया, पप्पू ठाकुर, चित्रा बिसेन संदिग्ध चेहरे के रूप में गिने जा रहे है वहीं निर्दलीय मायादेवी कुमरे का भी भाजपा को साथ मिलने की चर्चा चल रही है। अब सच क्या है इसे गद्दार ही आईने के सामने खड़ा अपना चेहरा देखकर सही बता सकता है।

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