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भाजपा के शीर्ष नेताओं ने मूल और स्थानीय प्रत्याशी को नकारा

भाजपा के शीर्ष  नेताओं ने मूल और स्थानीय प्रत्याशी को नकारा

सिवनी की तीन सीट से भाजपा ने घोषित किया प्रत्याशी 

सिवनी। गोंडवाना समय। राजनीति में अपना कैरियर बनाने के लिए वर्षो से भाजपा में काम करने वाले मूल और स्थानीय नेताओं को भाजपा के शीर्ष नेताओं ने नकारकर करारा झटका दे दिया है। केवलारी में मूल और स्थानीय प्रत्याशी का मुद्दा छाया रहने और कार्यकर्ताओं द्वारा एकजूट होकर मांग किए जाने के बावजूद शीर्ष नेताओं ने भाजपा जिला अध्यक्ष राकेश पाल को टिकिट देकर करारा झटका दे दिया है। वहीं सिवनी विधानसभा में जिताऊ प्रत्याशी का आंकलन करते हुए दिनेश राय मुनमुन को प्रत्याशी घोषित किया गया है। जबकि बरघाट से दो बार विधायक रह चुके कमल मर्सकोले पर भाजपा ने दांव खेला है। टिकिट की घोषणा होने के बाद जहां भाजपा कार्यालय में तिलकवंदन के बाद फटाके फोड़कर मिठाईयां बांटी गई। वहीं टिकिट की दावेदारी करने वाले मायूस चेहरे नदारद रहे। इक्का-दुक्का भाजपाई ही नजर आए।

जीत का दावा कर रहे प्रत्याशी-

टिकिट की घोषणा होने के बाद भाजपा कार्यालय पहुंचे अधिकृत उम्मीदवारों में सिवनी से दिनेश राय मुनमुन, केवलारी विधानसभा से राकेश पाल सिंह,बरघाट से कमल मर्सकोले सहित उनके समर्थक अच्छी लीड से जीतने का दावा कर रहे हैं। सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन ने 50 हजार से अधिक की लीड से चुनाव जीतने का दावा किया है। वहीं  केवलारी विधानसभा से राकेश पाल ने 28 साल से काबिज कांग्रेस सीट से छुटकारा दिलाने का दावा किया है। हालांकि इन प्रत्याशियों के दावे कितने सच होंगे यह तो मतदाता ही फैसला करके बताएंगे।

रायशुमारी को बताया दिखावा,बगावत की बनने लगी योजना-

चारों विधानसभा के प्रत्याशी चयन को लेकर शीर्ष नेताओं ने भाजपा कार्यालय में रायशुमारी की थी। जिसमें पार्टी के बड़े से लेकर छोटे पदाधिकारी तक शामिल किया गया था। बंद लिफाफे में अपनी राय दी  थी और खूलकर पार्टी की हुई बैठकों में मूल और स्थानीय प्रत्याशियों को टिकिट देने का मुद्दा रखा था। सबसे ज्यादा यह मुद्दा केवलारी विधानसभा में छाया हुआ था। केवलारी के स्थानीय नेताओं ने भोपाल-दिल्ली तक दौड़ लगाई थी। सूत्र बताते हैं कि वर्षो से भाजपा के लिए काम कर रहे नेताओं ने पहले ही राय शुमारी को दिखावा बताया था जो टिकिट की घोषणा होने के बाद सच साबित हो गई है। सूत्रों का यह भी कहना है कि अब मूल और स्थानीय का मुददा रखने वाले नेताओं में बगावत की योजना बनने लगी है।

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