Monday, May 6, 2019

आईएससो प्रमाणित घंसौर एकलव्य विद्यालय का निराशा जनक रहा 12 वीं का रिजल्ट

आईएससो प्रमाणित घंसौर एकलव्य विद्यालय का निराशा जनक रहा 12 वीं का रिजल्ट

मलाईदार पोस्ट पाने व आराम करने के लिये लेते है राजनीतिक पहुंच का सहारा

क्षेत्रिय जनप्रतिनिधियों की अनदेखी से जनजातियों के बच्चों का भविष्य बन रहा अंधकारमय

सिवनी/घंसौर। गोंडवाना समय। 
जिले का एकमात्र एकलव्य आवासीय विद्यालय का 12 कक्षा का परिणाम निराशाजनक रहा जिसको लेकर एकलव्य विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों पर सवालिया निशान लगने लगे है। उच्च स्तरीय शिक्षा और प्रबंधन को लेकर पिछले दिनों आईएसओ प्रमाणित हुई इस संस्था के प्राचार्यं ने संस्था के द्वारा दिये गए इस प्रमाणपत्र मिलने के बाद खूब बाहवाही बटोरी मगर जैसे ही 12 वी का रिजल्ट घोषित हुआ तो एकलव्य विद्यालय की शैक्षणिक स्थिति की सत्यता सामने आ गई । इस वर्ष एकलव्य आवासीय विद्यालय का 12 वीं का रिजल्ट 55 प्रतिशत रहा है। जबकी विगत दिनों विद्यालय के अध्यक्ष व जिला कलेक्टर ने अपने दौरे के दौरान विद्यालय प्रबंधन को रिजल्ट अच्छे लाने के लिये निर्देश भी दिये थे और संस्था के प्राचार्य एम एस डेहरिया द्वारा बेहतर रिजल्ट को लेकर जिला कलेक्टर को आश्वासन भी दिया गया था ।

एकलव्य विद्यालय में राजनीति कर रही शैक्षणिक स्तर खराब

सिवनी जिले में जनजाति बाहुल्य ब्लॉक घंसौर में एकलव्य विद्यालय इसलिये प्रारंभ किया गया था ताकि वहां पर अध्ययनरत बच्चे अच्छी व उच्चस्तरीय शिक्षा प्राप्त कर सके लेकिन विद्यालय में पद का मोह शिक्षकों को नहीं छूट रहा आखिर वहां पर ऐसा कौन सा फायदा है कि वहां पर नौकरी करने के लिये शिक्षक राजनीतिक नेताओं व जनप्रतिनिधियों का पूरी जोर आजमाईश करते है । बीते कई माह से एकलव्य विद्यालय में पोस्टिंग स्थानांतरण को लेकर खींचतान चल रही है । बीते समय ही जब 12 वीं की परीक्षा एवं आचार संहिता के दौरान ही विद्यालय में बालिका छात्रावास की अधीक्षिका शांति मरावी को हटाने के बाद निर्मित हुए विवाद का प्रभाव कही न कहीं पालक व क्षेत्रिय नागरिक विद्यालय के रिजल्ट में देख रहे है ।

एकलव्य विद्यालय में पढ़ाना कम विवाद ज्यादा कर रहे शिक्षक 

विवादों से घिरे इस विद्यालय में पढ़ रहे उन बच्चों का क्या दोष है जो उनके भविष्य से इतना बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा है । जबकी एम एस डेहरिया के संस्था में प्राचार्य पद पर आते ही उत्पन्न हुए इन विवादों को समय रहते आखिर क्यों नहीं सुलझाया गया विद्यालय से जुड़े सूत्र बताते हैं कि जिन आदेशों के तहत बालिका छात्रावास की अधीक्षिका शांति मरावी को हटाया गया उन्ही आदेशों को अगर गौर से अध्ययन किया जाए तो यह साफ देखा जा सकता है कि बालक छात्रावास से अधीक्षक बजारीलाल भलावी को विद्यालय के प्राचार्य एम एस डेहरिया द्वारा खास रियायत दी गई जबकी आदेश में स्पष्ट लिखा गया था कि संस्था के किसी एक शिक्षक व शिक्षिका को छात्रावासों की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाए ।

आखिर कौन है जिम्मेदार व जवाबदार

संस्था में 12 वी के 45 छात्र छात्राएं अध्ययनरत थे, जिनमें से 25 बच्चे ही पास हुए जबकि 10 बच्चों को सप्लीमेंटी आई है और वहीं 09 बच्चों को असफलता हाथ लगी जबकि एक बच्चा परीक्षा के दौरान अनुपस्थित रहा। इस तरह से विद्यालय का रिजल्ट आने से संस्था की गरिमा पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो रहा है । जबकि इस संस्था में पढ़ रहे बच्चों के भविष्य के लिये वहां पर पदस्थ प्राचार्य व शिक्षक जिम्मेदार तो है ही वहीं संस्था के लिये बड़े अधिकारी भी कहीं न कहीं जवाबदार है ।

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