Friday, May 3, 2019

आदिवासी कानून पर राहूल गांधी को बयान पड़ा भारी

आदिवासी कानून पर राहूल गांधी को बयान पड़ा भारी

चुनाव आयोग ने थमाया नोटिस, मांगा जवाब

नई दिल्ली। गोंडवाना समय। 
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को चुनाव आयोग से यह दूसरी बार नोटिस मिला है । चुनाव आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को नोटिस दिया है । जिसमें चुनाव आयोग ने राहुल गांधी से 48 घंटे के भीतर जवाब मांगा है । राहुल गांधी पर मध्य प्रदेश स्थित शहडोल की एक रैली में आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने का आरोप है । राहुल गांधी ने शहडोल की रैली में कहा था कि नरेंद्र मोदी ने एक नया कानून बनाया है जिसमें एक लाइन है कि आदिवासियों को गोली मारी जा सकती है ।
                   शहडोल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राहूल गांधी ने कहा कि 'मैं वादा करता हूं कि 2019 के बाद लोन न चुका पाने के कारण कोई किसान जेल नहीं जाएगा। राहुल गांधी ने ये भी कहा था कि जीएसटी और नोटबंदी के कारण अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लगा और कांग्रेस की 'न्याय' योजना के बाद कई रोजगार पैदा होंगे और अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटेगी । राहुल गांधी ने आदिवासी बहुल आबादी को संबोधित करते हुए ये आरोप भी लगाया कि 'मोदी सरकार ने एक ऐसा कानून भी बनाया है जिसके तहत सरकार आदिवासियों से उनकी जमीन और संसाधन छीनकर उन्हें गोली भी मार सकती है'।
भाजपा नेताओं ने की थी शिकायत
                      कांग्रेस अध्यक्ष राहूल गांधी ने मध्यप्रदेश के शहडोल में 23 अप्रैल को एक जनसभा को संबोधित करते हुए एक बयान दिया था । राहुल गांधी ने शहडोल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था, 'अब नरेंद्र मोदी ने एक कानून बनाया है। जनजातियों के लिए एक नया कानून बनाया गया है, जिसमें कहा गया है कि आदिवासियों पर गोली चलाई जा सकती है आपकी जमीन ली जएगी। आपका वन लिया जाएगा, आपका पानी छीना जाएगा।'
                  जिससे राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के लिए दिशानिर्देश के लिए आदर्श आचार संहिता के भाग (1) के अनुच्छेद (2) के तहत आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है। आयोग ने गांधी को नोटिस का जवाब देने के लिए 48 घंटे का वक्त दिया है। इस अवधि में जवाब नहीं देने की सूरत में आयोग अपनी तरफ से कार्रवाई के लिए स्वतंत्र होगा।  एक विशेष संदेशवाहक के जरिए उन्हें नोटिस दिया गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता ओम पाठक और नीरज ने आयोग से शिकायत की थी। शिकायत के बाद मध्य प्रदेश के चुनाव अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई।

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