गोंडवाना समय

Gondwana Samay

गोंडवाना समय

Gondwana Samay

Wednesday, May 29, 2019

भगोड़े आर्थिक अपराधियों को कुछ देशों में निरापद प्रश्रय प्राप्त दिया जाना वैश्विक चिंता का विषय-उपराष्ट्रपति

भगोड़े आर्थिक अपराधियों को कुछ देशों में निरापद प्रश्रय प्राप्त दिया जाना वैश्विक चिंता का विषय-उपराष्ट्रपति

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता प्राप्त करने के लिए सार्थक प्रयास जारी रखे जायें, उपराष्ट्रपति ने आतंकवाद के खतरे के विरूद्ध विश्व समुदाय द्वारा एकमत हो कर संगठित प्रयास करने का आह्वाहन किया, संरक्षणवाद की वापसी से विश्व के समावेशी विकास प्रयासों पर प्रतिकूल असर पड़ा है ।

नई दिल्ली। गोंडवाना समय।
उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता प्राप्त करने के लिए सार्थक प्रयास जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया है। विश्व में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा के संदर्भ में उपराष्ट्रपति ने इस विषय पर अधिकाधिक विश्वमत का समर्थन प्राप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार के मुद्दे पर विश्व समुदाय से सतत विमर्श जारी रखना जरूरी है। वे मंगलवार को नई दिल्ली स्थित अपने निवास पर भारतीय विदेश सेवा के 2018 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। विदेश सेवा को अपना कैरियर बनाने के लिए, प्रशिक्षु अधिकारियों को शुभकामनाऐं देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह सेवा उन्हें भारत की महान सभ्यता, सांस्कृतिक समृद्धि तथा यहां विकास की असीम संभावनाओं से वृहत्तर विश्व को परिचित कराने का अवसर प्रदान करेगी।

विश्व शांति के लिए हमारे संकल्पनिष्ठ प्रयास जारी रहेंगे

उन्होंने कहा कि युवा कूटनीतिज्ञ भविष्य के प्रवक्ता, अनुवादक तथा विश्व को भारत की विकास गाथा से परिचित कराने वाले सूत्रधार हैं । जो आने वाले वर्षों में भारत और वृहत्तर विश्व के बीच परस्पर सम्मान, सौहार्द, समझ तथा साझा विकास के सेतु का निर्माण करेंगे। उपराष्ट्रपति ने विदेश सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे भविष्य की भू-राजनीति तथा वैश्विक व्यवस्था को परिभाषित करेंगे। प्रशिक्षु अधिकारियों के सामने अपने वाली भावी चुनौतियों की चर्चा करते हुए श्री नायडु ने कहा कि विश्व में बढ़ती संरक्षणवादी प्रवृत्ति ने विश्व के साझा विकास के प्रयासों पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। विश्व में बढ़ते आतंकवाद पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी देश इस विपत्ति से निरापद नहीं है। उन्होंने इस वैश्विक आपदा के विरूद्ध संगठित विश्व के साझा प्रयासों का आहवान किया। उन्होंने आतंकवाद के विरूद्ध भारत के दृढ़ संकल्प की सराहना की और अपेक्षा व्यक्त की कि विश्व शांति के लिए हमारे संकल्पनिष्ठ प्रयास जारी रहेंगे।

हम सर्वे भवन्तु सुखिन: की प्रार्थना करते हैं

भगौड़े आर्थिक अपराधियों के भ्रष्ट कृत्यों की चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने चिंता व्यक्त की कि कुछ देशों में ये भगौडे आर्थिक अपराधी आसानी से निरापद प्रश्रय पा जाते हैं। उन्होंने वैश्विक अर्थतंत्र तथा वृहत्तर सामाजिक हितों को ऐसे अपराधियों के अनैतिक भ्रष्टाचार से संरक्षित रखने के लिए द्विपक्षीय, बहुपक्षीय समझौतों तथा प्रत्यर्पण संधियों की निरंतर समीक्षा करने की जरूरत पर बल दिया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि सतत विकास के लिए प्रस्तावित एजेंडा 2030 की सफलता के लिए भारत की सक्रिय साझेदारी अपरिहार्य है। उन्होंने कहा कि आधुनिक समस्याओं के निदान के लिए एक वृहत्तर मानवीय दृष्टिकोण अपनाना होगा। श्री नायडु ने कहा कि भारत की विहंगम विश्व दृष्टि, वसुधैव कुटुंबकम के विराट आदर्श से परिभाषित होती रही है। हम सर्वे भवन्तु सुखिन: की प्रार्थना करते हैं। हमारे उदार उदात्त आदर्श हमें वह नैतिक शक्ति देते हैं कि इन विषम वैश्विक परिस्थितियों में भी हम विश्व संवाद को सार्थक रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

जनता ने नि:संदेह स्पष्टता के साथ स्थिरता को चुना 

श्री नायडु ने कहा कि भारत तेजी से विकास मार्ग पर अग्रसर है तथा विश्व हमारी विकास गाथा को उत्सुकता से देख रहा है। उन्होंने कहा कि हमें विश्व व्यापार, निवेश तथा इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का भरसक लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने नव प्रशिक्षुओं से अपेक्षा की कि वे विश्व बाजार की संभावनाओं से लाभ उठाने में भारतीय उद्यमों तथा व्यवसायियों की आगे गढ़ कर सहायत करें तथा भारत में वैश्विक निवेश लाने के प्रयास करें हाल में संपन्न 2019 के आम चुनावों की चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि जनता ने नि:संदेह स्पष्टता के साथ स्थिरता को चुना है। उन्होंने कहा कि मैं आशा करता हूं कि सभी नागरिक हमारी समृद्ध लोकतांत्रिक परंपराओं को और सुदृढ़ करेंगे तथा अपनी साझा ऊर्जा आर्थिक विकास और लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने में लगायेंगे।

उन देशों और भारत के बीच रिश्तों को और प्रगाढ़ करें

उपराष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों से आशा व्यक्त की कि वे अपनी जानकारी और कौशल को निरंतर बढ़ायेंगे तथा जिस देश में नियुक्त होंगे उसके बारे में सभी जानकारी हासिल करेंगे। उपराष्ट्रपति ने अपेक्षा की कि अधिकारी नियुक्ति वाले देश में उपलब्ध संभावनाओं का पता लगायें तथा उन देशों और भारत के बीच रिश्तों को और प्रगाढ़ करें। इस अवसर पर श्री नायडु ने युवा प्रशिक्षु अधिकारियों को सत्यनिष्ठा, विवेकशीलता, कर्तव्यनिष्ठा की सलाह दी। उन्होंने अपेक्षा की कि प्रशिक्षु अधिकारी भविष्य में, शांतिपूर्ण सहअस्तित्व, सतत और समन्वेशी विकास जैसे विषयों पर भारत की नीति के मुखर प्रतिनिधि प्रवक्ता बनेंगे। इस अवसर पर विदेश सेवा संस्थान के डीन श्री जे.एस. मुकुल, संयुक्त सचिव श्री राहुल श्रीवास्तव तथा श्री अमरनाथ दूबे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

No comments:

Post a Comment

Translate