Thursday, June 27, 2019

अनुसूचित वर्गों के प्रकरणों में पुलिस अधिकारियों के माध्यम से मिलेगी राहत राशि-मुख्यमंत्री

अनुसूचित वर्गों के प्रकरणों में पुलिस अधिकारियों के माध्यम से मिलेगी राहत राशि-मुख्यमंत्री 

पुलिस का चेहरा सहानूभूति और संवेदनशीलता लिये होना चाहिए

बेहतर परिणाम के लिये सूचना प्रौद्योगिकी का अधिकाधिक उपयोग करे पुलिस विभाग 

भोपाल। गोंडवाना समय।
मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा है कि बेहतर परिणाम के लिये  पुलिस विभाग को सूचना प्रौद्योगिकी और अनुसंधान की नई तकनीकों के साथ कदमताल करते हुए काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी परिवर्तनशील होती है। इसलिये इसके साथ निरंतर चलते रहना होगा। इसका उपयोग वंचित वर्गों को न्याय दिलाने और उनकी रक्षा करने में होना चाहिए। मुख्यमंत्री कमल नाथ गुरूवार को मिन्टो हॉल में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्गों के प्रति संवेदनशीलता विषय पर पुलिस मुख्यालय की अनूसूचित जाति कल्याण शाखा द्वारा आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे।

वंचित वर्गों को कानून की ज्यादा जरूरत 

मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों की मांग से सहमत होते हुए कहा कि अनुसूचित वर्गों के प्रकरणों में जो राहत राशि राजस्व विभाग के माध्यम से पीड़ित पक्ष को मिलती है, उसे पुलिस अधिकारियों के माध्यम से दिलाये जाने के निर्देश दिये जायेंगे। उन्होने कहा कि पुलिस का चेहरा सहानूभूति और संवेदनशीलता लिये होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर कानून का अपना उद्देश्य होता है। इस उद्देश्य को समझते हुए इसका अक्षरश: पालन करने से ही बेहतर परिणाम मिलते हैं। उन्होंने कहा कि वंचित वर्गों को कानून की ज्यादा जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस विभाग के पास आज जितनी सुविधाएँ हैं, वे दस साल पहले नहीं थीं। जो आज उपलब्ध हैं, वे समय के साथ बदल जायेंगी। इसलिये वर्तमान में उपलब्ध सूचना प्रौद्योगिकी और अनुसंधान की नई तकनीकों का उपयोग कर अपनी अनुसंधान क्षमता को बढ़ायें। इससे संबंधित कानून उपलब्ध हैं, उनका उपयोग करें। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग को परिवर्तन के प्रति हमेशा सचेत रहते हुए इसके साथ ही आगे बढ़ना होगा।

निर्धारित कर्तव्यों को निभाते हुए अपनी वर्दी का सम्मान रखें

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर वर्ग का पुलिस से वास्ता पड़ता है। हर नागरिक पुलिस को पहचानता है। पुलिस प्रशासन और सरकार की कार्य-प्रणाली का पैमाना होती है। उन्होंने कहा कि पुलिस को एक सामाजिक विभाग की तरह काम करना होगा, जिससे हर नागरिक में सुरक्षा का भाव आये। उन्होंने कहा कि निर्धारित कर्तव्यों को निभाते हुए अपनी वर्दी का सम्मान रखें।  मुख्यमंत्री ने कहा कि उपलब्धियों से ज्यादा जरूरी है संतुष्टि। उपलब्धियों का लिखित रिकार्ड रहता है लेकिन संतुष्टि को महसूस किया जाता है। इसका उल्लेख कागज पर नहीं होता। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों को यह देखना होगा कि वे अपना आंकलन किस नजरिये से करना चाहते हैं।

श्रेष्ठ प्रतिभागियों को किया सम्मानित 

पुलिस महानिदेशक श्री वी. के. सिंह ने कहा कि अनूसूचित वर्गों के अधिकारों के प्रति पुलिस अधिकारियों को जागरूक और संवेदनशील बनाने के लिये हर साल दो बार प्रशिक्षण आयोजित किया जाता है। उन्होंने कहा कि पुलिस महकमे को वंचित वर्गों की सेवा करने का अवसर मिला है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अजाक) श्रीमती प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न जिलों के अजाक शाखा में पदस्थ 75 अधिकारियों ने भाग लिया। 

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