गोंडवाना समय

Gondwana Samay

गोंडवाना समय

Gondwana Samay

Monday, July 22, 2019

पत्रकार अंतिम निर्णय पाठकों पर छोड़ दें और खुद कोई निर्णय नहीं सुनाएं-उपराष्ट्रपति

पत्रकार अंतिम निर्णय पाठकों पर छोड़ दें और खुद कोई निर्णय नहीं सुनाएं-उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति श्री एम.वेंकैया नायडू ने मीडिया को नैतिक और स्वतंत्र पत्रकारिता के मानकों के उल्लंघन के खिलाफ आगाह किया है और चौथे स्तम्भ से ईमानदारी और निष्पक्षता का प्रकाशदीप बनने का अनुरोध का आग्रह किया है।

नई दिल्ली। गोंडवाना समय। 
हैदराबाद में वरिष्ठ संपादक और लेखक  दिवंगत श्री गोरा शास्त्री के शताब्दी समारोह के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि समाचारों और विचारों के अंतर को हमेशा संतुलित रखना चाहिए और सयमशीलता के माध्यम से अभिव्यक्ति करनी चाहिए। श्री गोरा शास्त्री द्वारा की गई स्वतंत्र पत्रकारिता और उनके द्वारा लिखे गये लेखों की श्रोताओं को याद दिलाते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, स्वतंत्र एवं निर्भीक पत्रकारिता के महत्व पर बल देने के लिए वे उन घटनाओं की याद कर रहे हैं, जो वर्तमान में नदारद है। मौजूदा परिदृश्य में हम तक पहुंचने वाले समाचारों में, विचार समाहित होते हैं। इस प्रकार विचारों से समाचार अलग कर पाना और किसी सोची-समझी राय अथवा निष्कर्ष तक पहुंच पाना हमारे लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। असली तस्वीर अर्ध-सत्य और अंधकार में घिरकर धुंधला जाती है।

समाचारों को विचारों के साथ मिलाया नहीं जाना चाहिए

उपराष्ट्रपति ने पत्रकारिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में मूल्यों के विकृत हो जाने पर चिंता प्रकट की और इस बात पर जोर दिया कि समाचारों को विचारों के साथ मिलाया नहीं जाना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों को सलाह दी कि वे अंतिम निर्णय पाठकों पर छोड़ दें और खुद कोई निर्णय नहीं सुनाएं। श्री नायडू ने कहा कि आज के दौर का मीडिया चाहे वह इलेक्ट्रॉनिक हो, प्रिंट या डिजिटल हो उसे प्रतिबद्धता और स्पष्टवादिता, आधुनिकता एवं परम्परा के मिश्रण रहे श्री गोरा शास्त्री जैसी विभूतियों की सराहना करनी चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कहा कि कुछ अवसरों पर उन्हें श्री गोरा शास्त्री के साथ बातचीत करने का मौका मिला, जिनका विजन राष्ट्रवाद की भावना से गहन रूप से ओत-प्रोत था। उनका विवेक और हास्य, तेलुगु और अंग्रेजी साहित्य का ज्ञान तथा स्वतंत्र पत्रकारिता के मानकों के प्रति उनकी अचल निष्ठा उन्हें सामान्य पत्रकारिता से अलग करती है। उपराष्ट्रपति ने इच्छा व्यक्त की कि पत्रकारिता के पाठ्यक्रमों में महान पत्रकारों के जीवन के बारे में अध्याय शामिल किये जाएं। इससे पहले, उपराष्ट्रपति ने श्री गोरा शास्त्री के लेखों के संग्रह विनयाकुडी वीणा का विमोचन किया। इस अवसर पर साहित्य अकादमी के सचिव श्री के.श्रीनिवास राव, वेटरन जनरलिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं सचिव श्री जी.एस. वदार्चारी और श्री के.लक्ष्मण राव और कई अन्य प्रमुख वरिष्ठ पत्रकार भी मौजूद थे।

No comments:

Post a Comment

Translate