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Tuesday, July 23, 2019

आदिवासी पूजारियों, भुमकाओं, बैगाओं को कितना मिलता मानदेय

आदिवासी पूजारियों, भुमकाओं, बैगाओं को कितना मिलता मानदेय 

आदिवासी देवस्थानों की जीर्णाद्धार हेतु कितना बजट निर्धारित 

भोपाल। गोंडवाना समय।
विधायक डॉ हीरालाल अलावा द्वारा पूछे गये आदिवासी संस्कृति के विकास, आदिवासी देव स्थलों के संरक्षण एवं वैधानिक मूल्याकंन, आदिवासियों के उपासना स्थलों की सामाजिक-सांस्कृतिक उपस्थिति को विकसित करने के लिये 1 जनवरी 2014 से प्रश्न दिनांक तक कितनी राशि आबंटित की गई एवं उक्त राशि को किन संस्थाओं, समितियों, व्यक्तियों के माध्यम से कहां-कहां कितना व्यय किया गया ? जिलेवार जानकारी उपलब्ध करायें वर्तमान मं आदिवासी देवस्थानों की जीर्णाद्धार हेतु कितना बजट निर्धारित किया है तब आदिम जाति मंत्री ओमकार मरकाम ने जवाब देते हुये बताया कि आदिवासी संस्कृति के विकास आदिवासी देव स्थलों के संरक्षण एवं वैधानिक मूल्याकंन, आदिवासियों के उपासना स्थलों की सामाजिक-सांस्कृतिक उपस्थिति को विकसित करने के लिये जनवरी 2014 से प्रश्न दिनांक तक संस्था को प्रथम से कोई राशि आबंटित नहीं की गई है । भारत सरकार जनजातिय कार्य मंत्रालय से आदिम जाति अनुसंधान एवं विकास संस्था की अनुमोदित वार्षिक कार्य योजना अनुरूप राशि प्राप्त होती है । अनुमोदित कार्ययोजना अनुसार राशि का व्यय किया जाता है । संस्था द्वारा प्रत्येक वर्ष में  प्रत्येक वर्ष में कार्य योजनाओं अनुरूप भारत सरकार द्वारा (वर्कशाप/सेमीनार/मेला/उत्सव आदि के लिये ) राशि आवंटित की जाती है । आवंटित राशि अनुरूप कार्यक्रम आयोजित कर राशि व्यय की जाती है । व्यय राशि की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है वहीं बजट विधानसभा में अनुमोदित होना शेष है ।

पुजारियों, बैगाओं, भुमकाओं के सवाल पर मंत्री ने ये दिया जवाब 

इसी तरह विधायक डॉ हीरालाल अलावा द्वारा पूछे गये  मध्य प्रदेश में आदिवासी देवस्थलों के पूजन, संरक्षण एवं अनुष्ठानों में रत कितने आदिवासी पुजारियों, बैगाओं, भुमकाओं को कितना नेमणुक/मानदेय राशि दिया जा रहा है ? नेमणुक/मानदेय राशि पाने वाले सभी आदिवासी पुजारियों, बैगाओं, भुमकाओं के नाम, पता सहित जिलेवार जानकारी उलब्ध कराएं । साथ ही अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में लगे कितने पुजारियों/सेवादारों/मुजाविरों आदि के लिये नेमणुक/मानदेय राशि दी जा रही है ? नाम, पता सहित जिलेवार जानकारी उपलब्ध कराये तो आदिम जाति मंत्री ओमकार मरकाम ने जवाब देते हुये बताया कि आदिवासी संस्कृति एवं देवठान संरक्षण (आस्ठान) योजना दिनांक 12 जून 2019 को आदेशित की गई है एवं राजपत्र में प्रकाशन दिनांक 14 जून 2019 को किया गया है इतना ही जवाब दे पाये ।

आनंद की अवधारणा जातिगत सीमाओं में नहीं की जा सकती परिभाषित 

आगे विधायक अलावा के द्वारा पूछे गये प्रश्न क्या आध्यात्म विभाग के योजनाआें मं आनंद की अवधारणा से मध्य प्रदेश के आदिवासी आबादी, दलित आबादी एवं पिछड़े वर्ग की आबादी को किस प्रकार से क्या-क्या लाभ मिलेगा इसके साथ ही आदिवासी दर्शन एवं दलित दर्शन के मद्देनजर आनंद की अवधारणा क्या है ? परिभाषित करे उक्त प्रश्नों पर मंत्री ओमकार मरकाम ने जवाब दिया कि यह योजना नहीं है लक्ष्य है, आनंद की अवधारणा जातिगत सीमाओं में नहीं बांधी जा सकती है अत: शेष के संदर्भ में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है और उन्होंने आगे प्रश्न के उत्तर में बताया कि  पुन: आनंद की अवधारणा जातिगत सीमाओं में परिभाषित नहीं की जा सकती है। 

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